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Bilaspur News: मशरूम और हस्तनिर्मित उत्पाद तैयार कर हजारों महिलाओं को किया सुदृढ़
Sat, 25 Oct 2025 11:10 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Sat, 25 Oct 2025 11:10 PM IST
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निर्मला धीमान की ओर से तैयार उत्पाद। संवाद
35 हजार महिलाओं को स्वरोजगार की राह दिखा रहीं हैं कंदरौर की निर्मला धीमान
संचालित स्वावलंबन केंद्र में चलाए जा रहे हैं कई विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम
उत्पाद बनाने के साथ उन्हें बाजार तक पहुंचाने का हुनर भी सीख रही महिलाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिले की कंदरौर निवासी निर्मला धीमान आज भी सक्रिय रूप से महिलाओं को स्वरोजगार और आर्थिक सशक्तीकरण के लिए प्रेरित कर रही हैं। उन्होंने साल 2000 में मात्र 900 रुपये में 36 बैग मशरूम खरीदकर अपना व्यवसाय शुरू किया। पहली फसल से ही उन्हें 35,000 रुपये का मुनाफा हुआ। तभी से उन्होंने तय किया कि उनकी सफलता अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बनेगी।
निर्मला ने 2002 में 20 महिलाओं को जोड़कर स्वयं सहायता समूह बनाया और इसे सरकार के आतमा प्रोजेक्ट से जोड़ा। 20,000 रुपये की वित्तीय सहायता से समूह ने बड़े स्तर पर मशरूम उत्पादन शुरू किया। वर्तमान में, केवल छह महीने के एक सीजन में उनका मुनाफा दो से ढाई लाख रुपये तक पहुंच जाता है। निर्मला सिर्फ मशरूम उत्पादन तक सीमित नहीं हैं। वह चीड़ की पत्तियों से टोकरी, चपाती बॉक्स, फूलदान और आभूषण जैसे हस्तनिर्मित उत्पाद भी तैयार कर रही हैं। इन उत्पादों की कीमत 250 से 1,200 रुपये तक है और उन्हें तैयार करने में दो से पांच दिन लगते हैं। उनके घर पर संचालित स्वावलंबन केंद्र में चलाए जा रहे विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से महिलाएं न केवल उत्पाद बनाना सीख रही हैं, बल्कि उन्हें बाजार तक पहुंचाने और बिक्री करने का व्यावसायिक ज्ञान भी मिल रहा है। हाल ही में राष्ट्रीय सहकारिता संघ की मदद से तीन महीने का प्रशिक्षण कैंप लगाया गया, जिसमें महिलाओं को उत्पाद निर्माण और मार्केटिंग के गुर सिखाए गए।
निर्मला धीमान के प्रयासों से अब तक 35,000 महिलाओं को स्वरोजगार की राह दिखाई जा चुकी है। उनके उत्पादों की मांग न केवल स्थानीय बाजार में है, बल्कि राष्ट्रीय प्रदर्शनियों में भी इन्हें रखा और बेचा जा रहा है। उनका मॉडल यह साबित करता है कि स्थानीय संसाधनों का सही उपयोग कर महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त बन सकती हैं। उनका व्यवसाय केवल आय का स्रोत नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिला उद्यमिता और स्वावलंबन का प्रतीक बन चुका है। वर्तमान में वे लगातार नई तकनीक, प्रशिक्षण और मार्केटिंग रणनीतियों के जरिए अपने स्वरोजगार केंद्र को विशेष बना रही हैं, ताकि अधिक से अधिक महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।
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संचालित स्वावलंबन केंद्र में चलाए जा रहे हैं कई विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम
उत्पाद बनाने के साथ उन्हें बाजार तक पहुंचाने का हुनर भी सीख रही महिलाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिले की कंदरौर निवासी निर्मला धीमान आज भी सक्रिय रूप से महिलाओं को स्वरोजगार और आर्थिक सशक्तीकरण के लिए प्रेरित कर रही हैं। उन्होंने साल 2000 में मात्र 900 रुपये में 36 बैग मशरूम खरीदकर अपना व्यवसाय शुरू किया। पहली फसल से ही उन्हें 35,000 रुपये का मुनाफा हुआ। तभी से उन्होंने तय किया कि उनकी सफलता अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बनेगी।
निर्मला ने 2002 में 20 महिलाओं को जोड़कर स्वयं सहायता समूह बनाया और इसे सरकार के आतमा प्रोजेक्ट से जोड़ा। 20,000 रुपये की वित्तीय सहायता से समूह ने बड़े स्तर पर मशरूम उत्पादन शुरू किया। वर्तमान में, केवल छह महीने के एक सीजन में उनका मुनाफा दो से ढाई लाख रुपये तक पहुंच जाता है। निर्मला सिर्फ मशरूम उत्पादन तक सीमित नहीं हैं। वह चीड़ की पत्तियों से टोकरी, चपाती बॉक्स, फूलदान और आभूषण जैसे हस्तनिर्मित उत्पाद भी तैयार कर रही हैं। इन उत्पादों की कीमत 250 से 1,200 रुपये तक है और उन्हें तैयार करने में दो से पांच दिन लगते हैं। उनके घर पर संचालित स्वावलंबन केंद्र में चलाए जा रहे विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से महिलाएं न केवल उत्पाद बनाना सीख रही हैं, बल्कि उन्हें बाजार तक पहुंचाने और बिक्री करने का व्यावसायिक ज्ञान भी मिल रहा है। हाल ही में राष्ट्रीय सहकारिता संघ की मदद से तीन महीने का प्रशिक्षण कैंप लगाया गया, जिसमें महिलाओं को उत्पाद निर्माण और मार्केटिंग के गुर सिखाए गए।
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निर्मला धीमान के प्रयासों से अब तक 35,000 महिलाओं को स्वरोजगार की राह दिखाई जा चुकी है। उनके उत्पादों की मांग न केवल स्थानीय बाजार में है, बल्कि राष्ट्रीय प्रदर्शनियों में भी इन्हें रखा और बेचा जा रहा है। उनका मॉडल यह साबित करता है कि स्थानीय संसाधनों का सही उपयोग कर महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त बन सकती हैं। उनका व्यवसाय केवल आय का स्रोत नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिला उद्यमिता और स्वावलंबन का प्रतीक बन चुका है। वर्तमान में वे लगातार नई तकनीक, प्रशिक्षण और मार्केटिंग रणनीतियों के जरिए अपने स्वरोजगार केंद्र को विशेष बना रही हैं, ताकि अधिक से अधिक महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।

निर्मला धीमान की ओर से तैयार उत्पाद। संवाद
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