फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Bilaspur News ›   Story of Shri Ram's exile narrated in Kotlu Brahmana

Bilaspur News: कोटलु ब्राह्मणा में सुनाई श्रीराम के वनवास की कथा

Thu, 07 Mar 2024 11:06 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 07 Mar 2024 11:06 PM IST
विज्ञापन
Story of Shri Ram's exile narrated in Kotlu Brahmana
- पंडित बोले, श्री राम से लेनी चाहिए आज के युवाओं को सीख
विज्ञापन


संवाद न्यूज एजेंसी
बरठीं(बिलासपुर)। शिव शक्ति मंदिर कोटलु ब्राह्मणा में चल रही श्रीराम कथा के नौंवे दिन प्रभु श्रीराम के जन्म और उनके वनवास की कथा का वर्णन हुआ। कथा वाचक आचार्य मदनलाल दुर्वासा ने श्रीराम के वनवास की कथा का वर्णन सुनते हुए कहा कि महाराजा दशरथ ने श्रीराम के राजतिलक से लेकर वनवास तक की कथा सुनाई।
उन्होंने कहा कि राजा दशरथ के चार पुत्रों में श्रीराम सबसे बड़े थे। वे अपने पिता की हर बात का भी पालन करते थे। चारों भाइयों में सबसे बड़े होने के नाते राम को राजपथ का भी बहुत ज्ञान था। वे राजपाट के कार्य में अपने पिता दशरथ का हाथ बंटाते थे। जैसे-जैसे श्री राम बड़े हुए तो दशरथ के मन में एक ही बात थी कि जीते जी उन्हें अयोध्या का राजा बनाकर राजतिलक कर दूं। राजा दशरथ ने अपने राज्य में युवराज राम को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया। पूरी अयोध्या नगरी प्रभु श्रीराम के राजतिलक को उतावली थी। इसी बीच मंथरा ने माता कैकई को राजा दशरथ से अपने लिए वरदान मांगने की याद दिलाई। कैकई ने राजा दशरथ से श्रीराम को वनवास भेजना और अपने बेटे भरत के लिए राजा बनाने की बात कही। जैसे ही राजा दशरथ महल से निकलकर दरबार में आए तो उन्होंने राजतिलक के स्थान पर प्रभु श्री राम को 14 वर्ष का वनवास दे दिया। महाराजा दशरथ ने कहा कि श्रीराम बिना कुछ सवाल किए अपने पिता राजा दशरथ की बातों को सुनना वनवास के लिए जाने लगे। इसी बीच माता सीता और लक्ष्मण भी उनके साथ वनवास के लिए निकल गए। अपने युवराज को वनवास जाता देख पूरी अयोध्या उनके साथ वन में जाने को तैयार थी, लेकिन श्रीराम ने अपने पिता के वचन का मान रखते हुए सभी को समझाया और अपने पिता की आज्ञा का पालन करने के लिए 14 वर्ष के वनवास के लिए निकल पड़े।
विज्ञापन

कथावाचक ने कहा कि आज के युवाओं को भी प्रभु श्रीराम की कथा से प्रेरणा लेते हुए माता-पिता की आज्ञा का पालन करने का संकल्प लेना चाहिए। कलयुग के बच्चे माता-पिता की बातों को सुनना तो दूर उन्हें ही वनवास भेज रहे हैं। उन्होंने सभी युवाओं से अपने माता-पिता का सम्मान करने की बात कही। इस दौरान संगीत में भजन की प्रस्तुति के माध्यम से भी कथा का वर्णन किया गया। इस अवसर पर मंदिर कमेटी प्रधान लाला मनोहर लाल महाजन, पवन कुमार शर्मा, प्रेम लाल, अमरनाथ भारद्वाज, हरिपाल शर्मा, सुभाष ठाकुर, विद्या सागर, राम चंद, रामदास गौतम सहित समस्त कमेटी सदस्य मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed