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Bilaspur News: 900 से शुरू किया मशरूम उत्पादन, निर्मला 35 हजार महिलाओं को दे चुकी ट्रेनिंग
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निर्मला धीमान को सम्मानित करते हुए सीएम। स्रोत: महिलाएं
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर मुख्यमंत्री ने 1 लाख रुपये से किया सम्मानित
चीड़ की पत्तियों के उत्पादों से भी महिलाओं को दे रहीं रोजगार
चीड़ की पत्तियों से सजावटी व घरेलू उपयोग के उत्पाद बनाकर समूह खुद बाजार तक पहुंचाता है
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। कंदरौर क्षेत्र की निर्मला धीमान आज हजारों महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर उनके उत्कृष्ट कार्यों को देखते हुए मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने उन्हें सम्मानित किया। इस दौरान उन्हें प्रोत्साहन स्वरूप एक लाख रुपये की पुरस्कार राशि और प्रशस्ति पत्र भेंट किया गया।
निर्मला धीमान की सफलता की कहानी करीब दो दशक पहले शुरू हुई थी। वर्ष 2000 में उन्होंने मात्र 900 रुपये से मशरूम के 36 बैग खरीदकर कार्य की शुरुआत की। पहले संसाधन सीमित थे लेकिन मेहनत और सीखने की लगन के दम पर उन्होंने मशरूम उत्पादन में सफलता हासिल की। पहली ही फसल से उन्हें करीब 35 हजार का मुनाफा हुआ। इसके बाद उन्होंने कार्य को बड़े स्तर पर आगे बढ़ाने का फैसला किया।
निर्मला ने वर्ष 2002 में 20 महिलाओं को साथ जोड़कर स्वयं सहायता समूह बनाया। उनका उद्देश्य आसपास की महिलाओं को भी सशक्त बनाना था। धीरे-धीरे उन्होंने मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण महिलाओं को देना शुरू किया। समय के साथ उनका प्रयास अभियान की तरह फैलता गया। आज वे करीब 35 हजार महिलाओं को मशरूम उत्पादन और स्वरोजगार का प्रशिक्षण दे चुकी हैं। उनके मार्गदर्शन में कई महिलाएं घर में ही मशरूम उत्पादन कर रही हैं। इससे अच्छी आय अर्जित कर रही हैं।
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इसके अलावा निर्मला धीमान ने चीड़ की पत्तियों से बनने वाले हस्तनिर्मित उत्पादों को भी स्वरोजगार का माध्यम बनाया है। उनके समूह की महिलाएं चीड़ की सूखी पत्तियों से टोकरी, चपाती बॉक्स, फूलदान, सजावटी वस्तुएं और घरेलू उपयोग की कई चीजें तैयार करती हैं। इन उत्पादों का उपयोग घरों की सजावट के साथ-साथ दैनिक घरेलू कार्यों में भी किया जाता है। खास बात यह है कि निर्मला स्वयं महिलाओं को इन उत्पादों को बनाने का प्रशिक्षण देती हैं। इससे महिलाएं घर बैठे आय का साधन बना सकें।
निर्मला के समूह की विशेषता ये भी है कि महिलाएं अपने उत्पादों को स्वयं बाजार तक पहुंचाती हैं। समूह की सदस्य मेलों, प्रदर्शनियों और स्थानीय बाजारों में उत्पादों की बिक्री करती हैं। इससे उन्हें सीधे ग्राहकों से जुड़ने का अवसर मिलता है और उनकी आय भी बढ़ती है। लगातार मेहनत और बेहतर प्रबंधन के कारण आज निर्मला धीमान मशरूम उत्पादन से अच्छी आय अर्जित कर रही हैं। वे मशरूम उत्पादन के छह महीने के एक सीजन में करीब 2 से 2.5 लाख रुपये तक का मुनाफा कमा रही हैं।
वर्ष 2021 में मशरूम रिसर्च सेंटर चंबाघाट ने उन्हें उत्कृष्ट कार्यों के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया था। निर्मला का मानना है कि सीमित संसाधनों के बावजूद यदि व्यक्ति में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो सफलता जरूर मिलती है। उनका कहना है कि उन्होंने जो सीखा, उसे दूसरों तक पहुंचाने की कोशिश की और यही उनके काम की सबसे बड़ी उपलब्धि है।
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चीड़ की पत्तियों के उत्पादों से भी महिलाओं को दे रहीं रोजगार
चीड़ की पत्तियों से सजावटी व घरेलू उपयोग के उत्पाद बनाकर समूह खुद बाजार तक पहुंचाता है
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। कंदरौर क्षेत्र की निर्मला धीमान आज हजारों महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर उनके उत्कृष्ट कार्यों को देखते हुए मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने उन्हें सम्मानित किया। इस दौरान उन्हें प्रोत्साहन स्वरूप एक लाख रुपये की पुरस्कार राशि और प्रशस्ति पत्र भेंट किया गया।
निर्मला धीमान की सफलता की कहानी करीब दो दशक पहले शुरू हुई थी। वर्ष 2000 में उन्होंने मात्र 900 रुपये से मशरूम के 36 बैग खरीदकर कार्य की शुरुआत की। पहले संसाधन सीमित थे लेकिन मेहनत और सीखने की लगन के दम पर उन्होंने मशरूम उत्पादन में सफलता हासिल की। पहली ही फसल से उन्हें करीब 35 हजार का मुनाफा हुआ। इसके बाद उन्होंने कार्य को बड़े स्तर पर आगे बढ़ाने का फैसला किया।
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निर्मला ने वर्ष 2002 में 20 महिलाओं को साथ जोड़कर स्वयं सहायता समूह बनाया। उनका उद्देश्य आसपास की महिलाओं को भी सशक्त बनाना था। धीरे-धीरे उन्होंने मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण महिलाओं को देना शुरू किया। समय के साथ उनका प्रयास अभियान की तरह फैलता गया। आज वे करीब 35 हजार महिलाओं को मशरूम उत्पादन और स्वरोजगार का प्रशिक्षण दे चुकी हैं। उनके मार्गदर्शन में कई महिलाएं घर में ही मशरूम उत्पादन कर रही हैं। इससे अच्छी आय अर्जित कर रही हैं।
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इसके अलावा निर्मला धीमान ने चीड़ की पत्तियों से बनने वाले हस्तनिर्मित उत्पादों को भी स्वरोजगार का माध्यम बनाया है। उनके समूह की महिलाएं चीड़ की सूखी पत्तियों से टोकरी, चपाती बॉक्स, फूलदान, सजावटी वस्तुएं और घरेलू उपयोग की कई चीजें तैयार करती हैं। इन उत्पादों का उपयोग घरों की सजावट के साथ-साथ दैनिक घरेलू कार्यों में भी किया जाता है। खास बात यह है कि निर्मला स्वयं महिलाओं को इन उत्पादों को बनाने का प्रशिक्षण देती हैं। इससे महिलाएं घर बैठे आय का साधन बना सकें।
निर्मला के समूह की विशेषता ये भी है कि महिलाएं अपने उत्पादों को स्वयं बाजार तक पहुंचाती हैं। समूह की सदस्य मेलों, प्रदर्शनियों और स्थानीय बाजारों में उत्पादों की बिक्री करती हैं। इससे उन्हें सीधे ग्राहकों से जुड़ने का अवसर मिलता है और उनकी आय भी बढ़ती है। लगातार मेहनत और बेहतर प्रबंधन के कारण आज निर्मला धीमान मशरूम उत्पादन से अच्छी आय अर्जित कर रही हैं। वे मशरूम उत्पादन के छह महीने के एक सीजन में करीब 2 से 2.5 लाख रुपये तक का मुनाफा कमा रही हैं।
वर्ष 2021 में मशरूम रिसर्च सेंटर चंबाघाट ने उन्हें उत्कृष्ट कार्यों के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया था। निर्मला का मानना है कि सीमित संसाधनों के बावजूद यदि व्यक्ति में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो सफलता जरूर मिलती है। उनका कहना है कि उन्होंने जो सीखा, उसे दूसरों तक पहुंचाने की कोशिश की और यही उनके काम की सबसे बड़ी उपलब्धि है।