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Bilaspur News: घुमारवीं की 63 पंचायतों में स्टाफ की कमी, विकास कार्यों प्रभावित
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घुमारवीं में आयोजित पंचायत प्रतिनिधियों की बैठक में मौजूद सदस्य। स्रोत: जागरूक पाठक
45 पंचायत सचिव, 11 तकनीकी सहायक और 11 ग्राम रोजगार सेवकों के सहारे चल रहा काम
कई सचिवों के पास दो-दो पंचायतों का जिम्मा, तकनीकी सहायकों और रोजगार सेवकों को पांच से छह पंचायतों का काम
नवनिर्वाचित प्रधानों ने बैठक में प्रमुखता से उठाया मुद्दा
संवाद न्यूज एजेंसी
भगेड़ (बिलासपुर)। विकास खंड घुमारवीं की ग्राम पंचायतों में कर्मचारियों की कमी अब ग्रामीण विकास के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। पंचायतों के नवनिर्वाचित प्रधानों की बैठक में यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। प्रधानों ने कहा कि पंचायत सचिव, तकनीकी सहायक और ग्राम रोजगार सेवकों की कमी के कारण विकास कार्यों की रफ्तार प्रभावित हो रही है। वहीं, कर्मचारियों पर अतिरिक्त कार्यभार बढ़ने से पंचायतों के रोजमर्रा के कामकाज पर भी असर पड़ रहा है।
आंबेडकर भवन घुमारवीं में ग्राम पंचायत औहर के प्रधान देश राज शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में पंचायतों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई। प्रधानों ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में विकास योजनाओं को धरातल पर उतारने में पंचायतों की अहम भूमिका है, लेकिन पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध न होने से पंचायत प्रतिनिधियों को काम करवाने में लगातार दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। देश राज शर्मा ने बताया कि विकास खंड घुमारवीं में कुल 63 ग्राम पंचायतें हैं, जबकि वर्तमान में केवल 45 पंचायत सचिव कार्यरत हैं। ऐसे में कई पंचायत सचिवों को दो-दो पंचायतों का जिम्मा संभालना पड़ रहा है। इसी तरह तकनीकी सहायकों और ग्राम रोजगार सेवकों की भी भारी कमी है। पूरे विकास खंड में महज 11 तकनीकी सहायक और 11 ग्राम रोजगार सेवक कार्यरत हैं। एक-एक कर्मचारी को करीब पांच से छह पंचायतों का काम देखना पड़ रहा है।
प्रधानों ने कहा कि एक साथ कई पंचायतों का कार्यभार होने से कर्मचारियों पर काम का दबाव बढ़ रहा है। इसका असर मनरेगा कार्यों, विकास योजनाओं के तकनीकी अनुमोदन, पंचायतों के निर्माण कार्यों और अन्य सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर पड़ सकता है। कई मामलों में ग्रामीणों को अपने कार्यों के लिए भी लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। बैठक में नवनिर्वाचित प्रधानों ने प्रशासन और प्रदेश सरकार से मांग की कि घुमारवीं विकास खंड की सभी 63 पंचायतों की आवश्यकता के अनुसार पंचायत सचिव, तकनीकी सहायक और ग्राम रोजगार सेवकों के रिक्त पदों को जल्द भरा जाए। जिन पंचायतों में कर्मचारियों पर अतिरिक्त कार्यभार है, वहां अतिरिक्त स्टाफ की व्यवस्था करने की भी मांग उठाई गई। बैठक में रमेश कुमार, निक्कू राम, सदा राम, रेखा कुमारी, मोनिका देवी, ऊषा देवी, कांता देवी, बिमला देवी, रेखा कुमारी, पवन कुमार, राकेश कुमार, विनय कुमार और सुनील कुमार आदि मौजूद रहे।
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पंचायतों में स्टाफ की कमी दूर करने की मांग
प्रधानों ने उपायुक्त बिलासपुर, जिला पंचायत अधिकारी, जिला लोकपाल, पंचायत राज मंत्री, मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप कर पंचायतों में कर्मचारियों की कमी दूर करने की मांग की। उन्होंने कहा कि पर्याप्त स्टाफ मिलने से विकास कार्यों में तेजी आएगी और ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर मिल सकेगा।
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कई सचिवों के पास दो-दो पंचायतों का जिम्मा, तकनीकी सहायकों और रोजगार सेवकों को पांच से छह पंचायतों का काम
नवनिर्वाचित प्रधानों ने बैठक में प्रमुखता से उठाया मुद्दा
संवाद न्यूज एजेंसी
भगेड़ (बिलासपुर)। विकास खंड घुमारवीं की ग्राम पंचायतों में कर्मचारियों की कमी अब ग्रामीण विकास के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। पंचायतों के नवनिर्वाचित प्रधानों की बैठक में यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। प्रधानों ने कहा कि पंचायत सचिव, तकनीकी सहायक और ग्राम रोजगार सेवकों की कमी के कारण विकास कार्यों की रफ्तार प्रभावित हो रही है। वहीं, कर्मचारियों पर अतिरिक्त कार्यभार बढ़ने से पंचायतों के रोजमर्रा के कामकाज पर भी असर पड़ रहा है।
आंबेडकर भवन घुमारवीं में ग्राम पंचायत औहर के प्रधान देश राज शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में पंचायतों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई। प्रधानों ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में विकास योजनाओं को धरातल पर उतारने में पंचायतों की अहम भूमिका है, लेकिन पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध न होने से पंचायत प्रतिनिधियों को काम करवाने में लगातार दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। देश राज शर्मा ने बताया कि विकास खंड घुमारवीं में कुल 63 ग्राम पंचायतें हैं, जबकि वर्तमान में केवल 45 पंचायत सचिव कार्यरत हैं। ऐसे में कई पंचायत सचिवों को दो-दो पंचायतों का जिम्मा संभालना पड़ रहा है। इसी तरह तकनीकी सहायकों और ग्राम रोजगार सेवकों की भी भारी कमी है। पूरे विकास खंड में महज 11 तकनीकी सहायक और 11 ग्राम रोजगार सेवक कार्यरत हैं। एक-एक कर्मचारी को करीब पांच से छह पंचायतों का काम देखना पड़ रहा है।
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प्रधानों ने कहा कि एक साथ कई पंचायतों का कार्यभार होने से कर्मचारियों पर काम का दबाव बढ़ रहा है। इसका असर मनरेगा कार्यों, विकास योजनाओं के तकनीकी अनुमोदन, पंचायतों के निर्माण कार्यों और अन्य सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर पड़ सकता है। कई मामलों में ग्रामीणों को अपने कार्यों के लिए भी लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। बैठक में नवनिर्वाचित प्रधानों ने प्रशासन और प्रदेश सरकार से मांग की कि घुमारवीं विकास खंड की सभी 63 पंचायतों की आवश्यकता के अनुसार पंचायत सचिव, तकनीकी सहायक और ग्राम रोजगार सेवकों के रिक्त पदों को जल्द भरा जाए। जिन पंचायतों में कर्मचारियों पर अतिरिक्त कार्यभार है, वहां अतिरिक्त स्टाफ की व्यवस्था करने की भी मांग उठाई गई। बैठक में रमेश कुमार, निक्कू राम, सदा राम, रेखा कुमारी, मोनिका देवी, ऊषा देवी, कांता देवी, बिमला देवी, रेखा कुमारी, पवन कुमार, राकेश कुमार, विनय कुमार और सुनील कुमार आदि मौजूद रहे।
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पंचायतों में स्टाफ की कमी दूर करने की मांग
प्रधानों ने उपायुक्त बिलासपुर, जिला पंचायत अधिकारी, जिला लोकपाल, पंचायत राज मंत्री, मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप कर पंचायतों में कर्मचारियों की कमी दूर करने की मांग की। उन्होंने कहा कि पर्याप्त स्टाफ मिलने से विकास कार्यों में तेजी आएगी और ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर मिल सकेगा।