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तीन रिमाइंडर देने के बाद भी जिलों से नहीं भेजी रिपोर्ट
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बिलासपुर। मंडी, कुल्लू, बिलासपुर और सोलन जिले में फोरलेन विस्थापितों और प्रभावितों की समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। हालांकि लोगों से मिली शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए सरकार ने कैबिनेट उपसमिति के समक्ष मामले को उठाने का फैसला लिया है जिसमें विस्थापितों और प्रभावितों की समस्याओं पर मंथन होना था।
हैरत की बात यह है कि राज्य सरकार की ओर से इस संबंध में तीन-तीन बार पत्र भेजा कर उक्त जिलों के उपायुक्त से समस्याओं के हल के लिए कमेंट मांगे गए हैं लेकिन अभी सरकार के आदेश के बाद किसी भी जिले के उपायुक्त की ओर से कमेंट देना जरूरी नहीं समझा गया। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि अधिकारी सरकार के आदेशों के पालन को लेकर कितने गंभीर है। इस पूरे मामले का खुलासा आरटीआई से प्राप्त सूचना पत्र संख्या नंबर डीआईवीसीओएम(एसएमएल)आर(17)2/2017-784 दिनांक 15 फरवरी को डिविजनल कमीशनर शिमला के कार्यालय से जारी हुए पत्र से हुआ है।
उल्लेखनीय है कि कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन विस्थापितों एवं प्रभावित लोगों ने सरकार की ओर से बनाई गई जिला स्तर की कमेटियों को साक्ष्य सहित पेश आ रही समस्याओं के बारे में लिखित में दिया था। अकेले जिला बिलासपुर की ओर से ही करीब 600 शिकायतें कमेटी को दी गई थीं। मंडी जिले से करीब 250 के करीब शिकायतें दी गई थीं। इसके अलावा कुल्लू और सोलन से शिकायतें गई हैं जिसके सरकार ने जिला स्तर पर 2018 में कमेटियों का गठन किया था।
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शिकायतें मिलने के बाद सरकार की ओर से उक्त सभी जिला उपायुक्तों से पूछा गया था कि इन समस्याओं के समाधान कैसे होंगे इस पर अपने-अपने कमेंट दें लेकिन तीन-तीन बार रिमाइंडर भेजे जाने के बाद भी किसी जिला से कोई रिपोर्ट नहीं आई है। इस कारण सैकड़ों विस्थापितों और प्रभावितों की बात को कैबिनेट उपसमिति के समक्ष नहीं रखा जा सका है।
इधर, फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के उपप्रधान अशोक कुमार, चिंता देवी, सीता राम, जगदीश राम, बलदेव, जगत राम, सुभाष और महासचिव एवं पूर्व सैनिक मदन लाल शर्मा का कहना है कि सरकार को लापरवाही करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई हो।
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हैरत की बात यह है कि राज्य सरकार की ओर से इस संबंध में तीन-तीन बार पत्र भेजा कर उक्त जिलों के उपायुक्त से समस्याओं के हल के लिए कमेंट मांगे गए हैं लेकिन अभी सरकार के आदेश के बाद किसी भी जिले के उपायुक्त की ओर से कमेंट देना जरूरी नहीं समझा गया। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि अधिकारी सरकार के आदेशों के पालन को लेकर कितने गंभीर है। इस पूरे मामले का खुलासा आरटीआई से प्राप्त सूचना पत्र संख्या नंबर डीआईवीसीओएम(एसएमएल)आर(17)2/2017-784 दिनांक 15 फरवरी को डिविजनल कमीशनर शिमला के कार्यालय से जारी हुए पत्र से हुआ है।
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उल्लेखनीय है कि कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन विस्थापितों एवं प्रभावित लोगों ने सरकार की ओर से बनाई गई जिला स्तर की कमेटियों को साक्ष्य सहित पेश आ रही समस्याओं के बारे में लिखित में दिया था। अकेले जिला बिलासपुर की ओर से ही करीब 600 शिकायतें कमेटी को दी गई थीं। मंडी जिले से करीब 250 के करीब शिकायतें दी गई थीं। इसके अलावा कुल्लू और सोलन से शिकायतें गई हैं जिसके सरकार ने जिला स्तर पर 2018 में कमेटियों का गठन किया था।
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शिकायतें मिलने के बाद सरकार की ओर से उक्त सभी जिला उपायुक्तों से पूछा गया था कि इन समस्याओं के समाधान कैसे होंगे इस पर अपने-अपने कमेंट दें लेकिन तीन-तीन बार रिमाइंडर भेजे जाने के बाद भी किसी जिला से कोई रिपोर्ट नहीं आई है। इस कारण सैकड़ों विस्थापितों और प्रभावितों की बात को कैबिनेट उपसमिति के समक्ष नहीं रखा जा सका है।
इधर, फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के उपप्रधान अशोक कुमार, चिंता देवी, सीता राम, जगदीश राम, बलदेव, जगत राम, सुभाष और महासचिव एवं पूर्व सैनिक मदन लाल शर्मा का कहना है कि सरकार को लापरवाही करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई हो।