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Bilaspur News: बकरियां चराते खुद की बंदूक से लगी गोली से सेवानिवृत्त सैनिक की मौत
Sat, 28 Mar 2026 11:36 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Sat, 28 Mar 2026 11:36 PM IST
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घायल अवस्था में लाया गया एम्स, आरोप- घुटने में गोली लगने के बावजूद कई घंटे नहीं मिला उपचार
परिजनों ने एम्स प्रबंधन पर उठाए सवाल
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। बरमाणा थाना के तहत खांगड़ गांव के सेवानिवृत्त सैनिक की बकरियां चराते खुद की बंदूक से निकली गोली से गंभीर रूप से घायल हुए पूर्व सैनिक की इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजनों में एम्स प्रबंधन को लेकर गहरा आक्रोश है। परिजनों और ग्रामीणों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। आरोप हैं कि पूर्व सैनिक को समय पर इलाज नहीं मिला, इसके कारण उनकी मौत हो गई। हालांकि एम्स प्रबंधन ने पूरी तरह से आरोपों को नकारा है। प्रबंधन का कहना है कि इलाज में कोई कोताही नहीं बरती गई है।
परिजनों के अनुसार, वीरवार शाम करीब 4:30 बजे ईश्वर सिंह चंदेल घर के खेत में बकरियां चरा रहे थे। इनके साथ गांव के ही सुशील कुमार भी थे। बंदूक पेड़ के पास खड़ी की थी। इस दौरान बकरियां इधर-उधर भागने लगी और बंदूक नीचे गिरी तो उससे गोली निकल कर पूर्व सैनिक के घुटने में लगी। घुटने में गोली लगने के बाद उन्हें घायल अवस्था में एम्स लाया गया, लेकिन उन्हें समय पर प्राथमिक उपचार नहीं दिया गया। आरोप है कि शाम 5:30 बजे से लेकर रात करीब 12 बजे तक मरीज को न तो उचित इलाज मिला और न ही समय पर खून की व्यवस्था की गई। करीब सात घंटे बाद उनका ऑपरेशन किया गया, जिसे प्रशिक्षु डॉक्टरों के हवाले कर दिया गया। इसके बाद शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे उनकी मौत हो गई। मामला तब और बढ़ गया जब परिजनों ने आरोप लगाया कि मृत्यु के बाद भी अस्पताल प्रशासन ने संवेदनशीलता नहीं दिखाई। शुक्रवार सुबह मौत होने के बावजूद समय पर पोस्टमार्टम नहीं किया गया और शव सौंपने में भी देरी की गई, जिससे लोगों में भारी रोष है। कहा कि एक सेवानिवृत्त सैनिक, जिसने देश की सेवा की, यदि उसके साथ ऐसा व्यवहार हो सकता है तो आम जनता की स्थिति का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि जब गोली घुटने में लगी थी, तो आखिर मौत कैसे हुई और इलाज में इतनी देरी क्यों की गई। इस मामले में समाजसेवी महेंद्र सिंह चंदेल, पूर्व बीडीसी सदस्य अमित सिंह चंदेल, पूर्व प्रधान अरुण कुमार सहित सेना से जुड़े अधिकारियों ने भी एम्स प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि युद्ध में भी गंभीर रूप से घायल सैनिकों को बचा लिया जाता है, जबकि यहां घुटने में गोली लगने के बावजूद समय पर उपचार नहीं मिल पाया। बीडीटीएस के पदाधिकारी गंगा सिंह ठाकुर ने कहा कि मरीज घटना के बाद पूरी तरह होश में था और सभी से बातचीत कर रहा था। उसने पुलिस को भी सही हालत में बयान दिया था। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
कोट
मरीज का इलाज केवल प्रशिक्षु डॉक्टरों ने नहीं, बल्कि सुपर स्पेशलिटी के सीनियर रेजिडेंट्स और वरिष्ठ फैकल्टी की देखरेख में किया गया। गोली लगने से पैर की मुख्य नस (आर्टरी) बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिससे मरीज का ब्लड प्रेशर काफी गिर गया था। डॉक्टरों ने अत्यधिक जोखिम के बावजूद करीब 4.5 से 5 घंटे तक सर्जरी की। इलाज में कोई कोताही नहीं बरती गई, बल्कि चोट इतनी गंभीर थी कि मरीज का शरीर सर्जिकल शॉक और लगातार गिरते ब्लड प्रेशर को सहन नहीं कर पाया। पोस्टमार्टम में देरी के संबंध में बताया गया कि यह मामला एमएलसी का था और पुलिस द्वारा आवश्यक कागजी कार्रवाई दोपहर करीब 2 बजे तक पूरी नहीं की गई थी, जिसके बिना नियमानुसार पोस्टमार्टम संभव नहीं था। संस्थान में वर्तमान में पोस्टमार्टम की सुविधा केवल दिन के समय में उपलब्ध है।
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एम्स प्रबंधन
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परिजनों ने एम्स प्रबंधन पर उठाए सवाल
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। बरमाणा थाना के तहत खांगड़ गांव के सेवानिवृत्त सैनिक की बकरियां चराते खुद की बंदूक से निकली गोली से गंभीर रूप से घायल हुए पूर्व सैनिक की इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजनों में एम्स प्रबंधन को लेकर गहरा आक्रोश है। परिजनों और ग्रामीणों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। आरोप हैं कि पूर्व सैनिक को समय पर इलाज नहीं मिला, इसके कारण उनकी मौत हो गई। हालांकि एम्स प्रबंधन ने पूरी तरह से आरोपों को नकारा है। प्रबंधन का कहना है कि इलाज में कोई कोताही नहीं बरती गई है।
परिजनों के अनुसार, वीरवार शाम करीब 4:30 बजे ईश्वर सिंह चंदेल घर के खेत में बकरियां चरा रहे थे। इनके साथ गांव के ही सुशील कुमार भी थे। बंदूक पेड़ के पास खड़ी की थी। इस दौरान बकरियां इधर-उधर भागने लगी और बंदूक नीचे गिरी तो उससे गोली निकल कर पूर्व सैनिक के घुटने में लगी। घुटने में गोली लगने के बाद उन्हें घायल अवस्था में एम्स लाया गया, लेकिन उन्हें समय पर प्राथमिक उपचार नहीं दिया गया। आरोप है कि शाम 5:30 बजे से लेकर रात करीब 12 बजे तक मरीज को न तो उचित इलाज मिला और न ही समय पर खून की व्यवस्था की गई। करीब सात घंटे बाद उनका ऑपरेशन किया गया, जिसे प्रशिक्षु डॉक्टरों के हवाले कर दिया गया। इसके बाद शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे उनकी मौत हो गई। मामला तब और बढ़ गया जब परिजनों ने आरोप लगाया कि मृत्यु के बाद भी अस्पताल प्रशासन ने संवेदनशीलता नहीं दिखाई। शुक्रवार सुबह मौत होने के बावजूद समय पर पोस्टमार्टम नहीं किया गया और शव सौंपने में भी देरी की गई, जिससे लोगों में भारी रोष है। कहा कि एक सेवानिवृत्त सैनिक, जिसने देश की सेवा की, यदि उसके साथ ऐसा व्यवहार हो सकता है तो आम जनता की स्थिति का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि जब गोली घुटने में लगी थी, तो आखिर मौत कैसे हुई और इलाज में इतनी देरी क्यों की गई। इस मामले में समाजसेवी महेंद्र सिंह चंदेल, पूर्व बीडीसी सदस्य अमित सिंह चंदेल, पूर्व प्रधान अरुण कुमार सहित सेना से जुड़े अधिकारियों ने भी एम्स प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि युद्ध में भी गंभीर रूप से घायल सैनिकों को बचा लिया जाता है, जबकि यहां घुटने में गोली लगने के बावजूद समय पर उपचार नहीं मिल पाया। बीडीटीएस के पदाधिकारी गंगा सिंह ठाकुर ने कहा कि मरीज घटना के बाद पूरी तरह होश में था और सभी से बातचीत कर रहा था। उसने पुलिस को भी सही हालत में बयान दिया था। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
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मरीज का इलाज केवल प्रशिक्षु डॉक्टरों ने नहीं, बल्कि सुपर स्पेशलिटी के सीनियर रेजिडेंट्स और वरिष्ठ फैकल्टी की देखरेख में किया गया। गोली लगने से पैर की मुख्य नस (आर्टरी) बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिससे मरीज का ब्लड प्रेशर काफी गिर गया था। डॉक्टरों ने अत्यधिक जोखिम के बावजूद करीब 4.5 से 5 घंटे तक सर्जरी की। इलाज में कोई कोताही नहीं बरती गई, बल्कि चोट इतनी गंभीर थी कि मरीज का शरीर सर्जिकल शॉक और लगातार गिरते ब्लड प्रेशर को सहन नहीं कर पाया। पोस्टमार्टम में देरी के संबंध में बताया गया कि यह मामला एमएलसी का था और पुलिस द्वारा आवश्यक कागजी कार्रवाई दोपहर करीब 2 बजे तक पूरी नहीं की गई थी, जिसके बिना नियमानुसार पोस्टमार्टम संभव नहीं था। संस्थान में वर्तमान में पोस्टमार्टम की सुविधा केवल दिन के समय में उपलब्ध है।
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