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Bilaspur News: कलश यात्रा के साथ लेहड़ मंदिर में मां संतोषी भागवत कथा का हुआ शुभारंभ
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संतोषी माता की आरती करने से होती है विशेष कृपा : गोपाल
संवाद न्यूज एजेंसी
बरठीं (बिलासपुर)। विकास खंड झंडूता की सुन्हाणी पंचायत के संतोषी माता मंदिर लेहड़ में नौ दिवसीय मां संतोषी भागवत कथा का शुभारंभ भव्य कलश यात्रा और ढोल-नगाड़ों के साथ हुआ। कथा वाचक गोपाल स्वरूप शर्मा ने पहले दिन मां संतोषी भागवत की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि जो भी व्यक्ति संतोषी माता की आरती करता है, उस पर संतोषी माता की विशेष कृपा रहती है। साधक के जीवन से सारे कष्ट भी खत्म हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि संतोषी माता की आरती करने से व्यक्ति के जीवन में खुशियां ही खुशियां आती हैं। सनातन धर्म में हर दिन किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित है। इसी तरह सनातन धर्म में शुक्रवार का दिन माता संतोषी को समर्पित है। इस दिन विधि-विधान से माता संतोषी की जो पूजा और नियम पूर्व व्रत करता है, उसे अत्यंत फलदायी लाभ मिलता है। इस व्रत के पालन से घर में सुख-समृद्धि आती है। व्रत का महत्व बताते हुए कहा कि सृष्टि के सभी प्राणियों का कल्याण करने वाले भगवान शंकर के पुत्र श्री गणेश महाराज और माता रिद्धि, सिद्धि की पुत्री संतोषी माता विश्व के सभी उपासक स्त्री और पुरुषों का कल्याण करती हैं। व्रत करने और कथा सुनने वाले स्त्री पुरुषों को धन समर्पित भंडार और माता संतोषी धन से आनंदित करती है। विपत्ति नष्ट होती है और मनुष्य चिंता मुक्त होकर जीवन यापन करता है। स्त्रियां सदा सुहागन रहती हैं। निसंतानों को पुत्र की प्राप्ति होती है और जीवन में सभी मनोकामनाएं संतोषी माता के व्रत से पूरी होती है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बरठीं (बिलासपुर)। विकास खंड झंडूता की सुन्हाणी पंचायत के संतोषी माता मंदिर लेहड़ में नौ दिवसीय मां संतोषी भागवत कथा का शुभारंभ भव्य कलश यात्रा और ढोल-नगाड़ों के साथ हुआ। कथा वाचक गोपाल स्वरूप शर्मा ने पहले दिन मां संतोषी भागवत की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि जो भी व्यक्ति संतोषी माता की आरती करता है, उस पर संतोषी माता की विशेष कृपा रहती है। साधक के जीवन से सारे कष्ट भी खत्म हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि संतोषी माता की आरती करने से व्यक्ति के जीवन में खुशियां ही खुशियां आती हैं। सनातन धर्म में हर दिन किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित है। इसी तरह सनातन धर्म में शुक्रवार का दिन माता संतोषी को समर्पित है। इस दिन विधि-विधान से माता संतोषी की जो पूजा और नियम पूर्व व्रत करता है, उसे अत्यंत फलदायी लाभ मिलता है। इस व्रत के पालन से घर में सुख-समृद्धि आती है। व्रत का महत्व बताते हुए कहा कि सृष्टि के सभी प्राणियों का कल्याण करने वाले भगवान शंकर के पुत्र श्री गणेश महाराज और माता रिद्धि, सिद्धि की पुत्री संतोषी माता विश्व के सभी उपासक स्त्री और पुरुषों का कल्याण करती हैं। व्रत करने और कथा सुनने वाले स्त्री पुरुषों को धन समर्पित भंडार और माता संतोषी धन से आनंदित करती है। विपत्ति नष्ट होती है और मनुष्य चिंता मुक्त होकर जीवन यापन करता है। स्त्रियां सदा सुहागन रहती हैं। निसंतानों को पुत्र की प्राप्ति होती है और जीवन में सभी मनोकामनाएं संतोषी माता के व्रत से पूरी होती है।