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आरबीएसके योजना के नाम पर मजाक, बिना उपचार लौट रहे बच्चे
मंगल ठाकुर/ अमर उजाला, बिलासपुर।
Updated Sun, 15 May 2016 11:21 PM IST
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राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम आरबीएसके योजना में 6 वर्ष से 18 वर्ष के बच्चों को निशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं देने के नाम धोखा हो रहा है। बच्चों को स्कूल से स्वास्थ्य जांच करने के बाद कार्ड देकर बड़े अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है। लेकिन वहां बच्चों के इलाज के पैसे वसूल किए जा रहे है। ऐसे में सरकारी कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया हैं।
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत प्रदेश भर के स्कूली बच्चों का चिकित्सीय परीक्षण करने के लिए सरकार ने 256 चिकित्सकों की भर्ती की है। बिलासपुर जिला में आठ चिकित्सक इस कार्यक्रम के तहत नियुक्त किए गए हैं। इसके तहत दो चिकित्सक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बरठीं में तैनात हैं। चिकित्सक जिला की पाठशालाओं में बच्चों का स्वास्थ्य जांच कर उनके कार्ड बना रहे हैं।
डॉक्टरों ने कहा, इलाज का खर्चा खुद उठाना होगा : रावमापा बड़गांव के लगभग 80 बच्चों का स्वास्थ्य जांचने के बाद उन्हें गंभीर बीमारी के चलते सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बरठीं और जिला अस्पताल रेफर किया गया। हैरान करने वाली बात तब हुई जब गांव के दो अभिभावक बच्चों को लेकर जिला अस्पताल गए। लेकिन वहां चिकित्सकों ने उनके कार्डों को अनदेखा करते हुए उपचार का खर्च परिजनों को स्वयं वहन करने की बात कही।
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इस पर बच्चों के अभिभावकों ने कहा कि वह गरीब हैं इसका खर्च नहीं उठा सकते, चिकित्सकों ने कहा कि तब आपको बच्चों का इलाज शिमला में करवाना होगा। ऐसे में अभिभावक बच्चों को बिना इलाज करवाए वापस लौटने को मजबूर हो गए।
बीएमओ झंडूता डॉ. घनश्याम उपाध्याय ने कहा कि छोटी-मोटी दवाइयां दस से 50 रुपये तक की तो बाहर से लेनी पड़ सकती है। लेकिन कोई बड़ी बीमारी हो और ऑपरेशन करवाना हो तो चाहे उसका खर्चा हजारों से लाखों में क्यों न हो, इसका पूरा खर्च सरकार उठाएगी।
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उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत प्रदेश भर के स्कूली बच्चों का चिकित्सीय परीक्षण करने के लिए सरकार ने 256 चिकित्सकों की भर्ती की है। बिलासपुर जिला में आठ चिकित्सक इस कार्यक्रम के तहत नियुक्त किए गए हैं। इसके तहत दो चिकित्सक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बरठीं में तैनात हैं। चिकित्सक जिला की पाठशालाओं में बच्चों का स्वास्थ्य जांच कर उनके कार्ड बना रहे हैं।
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डॉक्टरों ने कहा, इलाज का खर्चा खुद उठाना होगा : रावमापा बड़गांव के लगभग 80 बच्चों का स्वास्थ्य जांचने के बाद उन्हें गंभीर बीमारी के चलते सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बरठीं और जिला अस्पताल रेफर किया गया। हैरान करने वाली बात तब हुई जब गांव के दो अभिभावक बच्चों को लेकर जिला अस्पताल गए। लेकिन वहां चिकित्सकों ने उनके कार्डों को अनदेखा करते हुए उपचार का खर्च परिजनों को स्वयं वहन करने की बात कही।
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इस पर बच्चों के अभिभावकों ने कहा कि वह गरीब हैं इसका खर्च नहीं उठा सकते, चिकित्सकों ने कहा कि तब आपको बच्चों का इलाज शिमला में करवाना होगा। ऐसे में अभिभावक बच्चों को बिना इलाज करवाए वापस लौटने को मजबूर हो गए।
बीएमओ झंडूता डॉ. घनश्याम उपाध्याय ने कहा कि छोटी-मोटी दवाइयां दस से 50 रुपये तक की तो बाहर से लेनी पड़ सकती है। लेकिन कोई बड़ी बीमारी हो और ऑपरेशन करवाना हो तो चाहे उसका खर्चा हजारों से लाखों में क्यों न हो, इसका पूरा खर्च सरकार उठाएगी।