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रेल लाइन निर्माण में लगे वर्करों को तीन महीने से वेतन नहीं
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स्वारघाट (बिलासपुर)। प्रदेश की महत्वाकांक्षी रेल परियोजना भानुपल्ली-बिलासपुर रेलवे लाइन के निर्माण कार्य में लगे दर्जनों मजदूरों को तीन माह से वेतन का भुगतान नहीं हुआ है। इस कारण मजदूरों ने संघर्ष का रास्ता अपना लिया है। मजदूरों ने रेलवे विभाग से दस दिन के भीतर उनकी समस्याओं का समाधान करने की मांग की है। ऐसा न होने पर सभी मजदूर एटक यूनियन के बैनर तले इकट्ठे होकर काम बंद करवाने और संघर्ष का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
इस संबंध में मजदूरों ने भानुपल्ली-बिलासपुर रेलवे निर्माण वर्कर यूनियन का गठन कर लिया है। एटक यूनियन से संबंधित भानुपल्ली-बिलासपुर रेलवे निर्माण वर्कर यूनियन की कांगूवाली कोट में बैठक हुई। यूनियन के प्रधान प्रदीप कुमार, वरिष्ठ उपप्रधान मांगू राम, उपप्रधान रामपाल, महासचिव बिट्टू राम, सचिव पोला सिंह, कोषाध्यक्ष कुलविंद्र सिंह, प्रेस सचिव दिनेश कुमार, कानूनी सलाहकार अधिवक्ता सुरेश चौधरी ने बैठक में बताया कि उपरोक्त परियोजना में रेलवे विभाग ने निर्माण कार्य का जिम्मा कंपनी को सौंपा है, लेकिन कंपनी की ओर स यह कार्य आगे ठेकेदारों को सौंपा है, जो कि श्रम कानूनों की सरेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं और मजदूरों का शोषण कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि कांगूवाली कोट में कार्यरत करीब 50 से 55 मजदूरों को ठेकेदार की ओर से तीन माह से वेतन का भुगतान नहीं किया जा रहा है। इससे मजदूरों को कमरतोड़ महंगाई में अपने परिवार का पालन पोषण करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है तो वहीं ठेकेदारों की ओर से मजदूरों से सुबह आठ से शाम आठ बजे तक कार्य करवाया जा रहा है, जबकि इसकी एवज में किसी तरह का ओवरटाइम भत्ता भी नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मजदूरों का ईपीएफ भी नहीं काटा जा रहा है। यूनियन ने दस दिन के भीतर मजदूरों के वेतन का भुगतान करने का आग्रह किया है अन्यथा मजदूर निर्माण कार्य को ठप करने के लिए मजबूर होंगे।
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इस संबंध में मजदूरों ने भानुपल्ली-बिलासपुर रेलवे निर्माण वर्कर यूनियन का गठन कर लिया है। एटक यूनियन से संबंधित भानुपल्ली-बिलासपुर रेलवे निर्माण वर्कर यूनियन की कांगूवाली कोट में बैठक हुई। यूनियन के प्रधान प्रदीप कुमार, वरिष्ठ उपप्रधान मांगू राम, उपप्रधान रामपाल, महासचिव बिट्टू राम, सचिव पोला सिंह, कोषाध्यक्ष कुलविंद्र सिंह, प्रेस सचिव दिनेश कुमार, कानूनी सलाहकार अधिवक्ता सुरेश चौधरी ने बैठक में बताया कि उपरोक्त परियोजना में रेलवे विभाग ने निर्माण कार्य का जिम्मा कंपनी को सौंपा है, लेकिन कंपनी की ओर स यह कार्य आगे ठेकेदारों को सौंपा है, जो कि श्रम कानूनों की सरेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं और मजदूरों का शोषण कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि कांगूवाली कोट में कार्यरत करीब 50 से 55 मजदूरों को ठेकेदार की ओर से तीन माह से वेतन का भुगतान नहीं किया जा रहा है। इससे मजदूरों को कमरतोड़ महंगाई में अपने परिवार का पालन पोषण करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है तो वहीं ठेकेदारों की ओर से मजदूरों से सुबह आठ से शाम आठ बजे तक कार्य करवाया जा रहा है, जबकि इसकी एवज में किसी तरह का ओवरटाइम भत्ता भी नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मजदूरों का ईपीएफ भी नहीं काटा जा रहा है। यूनियन ने दस दिन के भीतर मजदूरों के वेतन का भुगतान करने का आग्रह किया है अन्यथा मजदूर निर्माण कार्य को ठप करने के लिए मजबूर होंगे।
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