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Bilaspur News: बेला-घुमारवीं बस सेवा पर उठे सवाल, आधे रास्ते में उतारे जा रहे यात्री
Tue, 02 Jun 2026 11:25 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Tue, 02 Jun 2026 11:25 PM IST
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लेठवीं में उतरने को मजबूर ग्रामीण, छात्रों, कर्मचारियों और मरीजों की बढ़ी परेशानी
लंझता समेत आधा दर्जन से अधिक गांवों की बड़ी आबादी प्रतिदिन इसी बस सेवा पर निर्भर
संवाद न्यूज एजेंसी
भराड़ी(बिलासपुर)। भराड़ी उप-तहसील के अंतर्गत लंझता, बेला, ठंडोडा सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर लोगों में भारी रोष है। क्षेत्र की जीवनरेखा मानी जाने वाली बेला-घुमारवीं बस सेवा के निर्धारित रूट पर संचालित न होने से ग्रामीणों को रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि बस को बीच रास्ते में ही अन्य गांवों की ओर मोड़ दिया जाता है, जिसके चलते यात्रियों को लेठवीं में उतर कर दूसरे वाहनों के सहारे अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार बेला, लंझता समेत आधा दर्जन से अधिक गांवों की बड़ी आबादी प्रतिदिन इसी बस सेवा पर निर्भर रहती है। सुबह बेला से घुमारवीं के लिए चलने वाली यह बस क्षेत्र के विद्यार्थियों, नौकरीपेशा लोगों, व्यापारियों, बुजुर्गों और मरीजों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक परिवहन साधन है। लेकिन पिछले कई दिनों से बस को निर्धारित रूट पर चलाने के बजाय अन्य गांवों के साथ जोड़ दिया गया है, जिससे यात्रियों को बीच रास्ते में उतरना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में निजी बसों की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में सरकारी बस सेवा ही लोगों का एकमात्र सहारा है। बस के सीधे घुमारवीं न जाने से लोगों को मजबूरी में टैक्सी या निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे उनकी जेब पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि रोजाना आने-जाने पर सैकड़ों रुपये अतिरिक्त खर्च हो रहे हैं, जो सामान्य परिवारों के लिए परेशानी का कारण बन गया है।
ग्रामीणों ने बताया कि बुजुर्गों और बीमार लोगों की परेशानी और अधिक बढ़ गई है। इलाज के लिए घुमारवीं जाने वाले मरीजों को बस बदलने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। कई बार उन्हें निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ता है, जिससे आर्थिक बोझ और बढ़ जाता है। नवनिर्वाचित प्रधान शशिपाल सहित मनोज, नंदलाल, जगदीश, प्रकाश, कर्ण, राजेंद्र, अरविंद और राजेश ने विभाग से मांग की है कि बेला-घुमारवीं बस सेवा को उसके मूल रूट पर नियमित रूप से संचालित किया जाए ताकि लोगों को राहत मिल सके। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समस्या का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो ग्रामीण आंदोलन करने पर मजबूर होंगे। उधर, बस अड्डा इंचार्ज जयपाल ने बताया कि कभी-कभी बस खराब होने या अतिरिक्त रूटों पर बसें भेजने जैसी परिस्थितियों में इस बस को अन्य गांवों की ओर मोड़ना पड़ता है। हालांकि उन्होंने कहा कि भविष्य में प्रयास किया जाएगा कि बेला-घुमारवीं बस सेवा को उसके निर्धारित रूट पर ही संचालित रखा जाए, ताकि यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
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लंझता समेत आधा दर्जन से अधिक गांवों की बड़ी आबादी प्रतिदिन इसी बस सेवा पर निर्भर
संवाद न्यूज एजेंसी
भराड़ी(बिलासपुर)। भराड़ी उप-तहसील के अंतर्गत लंझता, बेला, ठंडोडा सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर लोगों में भारी रोष है। क्षेत्र की जीवनरेखा मानी जाने वाली बेला-घुमारवीं बस सेवा के निर्धारित रूट पर संचालित न होने से ग्रामीणों को रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि बस को बीच रास्ते में ही अन्य गांवों की ओर मोड़ दिया जाता है, जिसके चलते यात्रियों को लेठवीं में उतर कर दूसरे वाहनों के सहारे अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार बेला, लंझता समेत आधा दर्जन से अधिक गांवों की बड़ी आबादी प्रतिदिन इसी बस सेवा पर निर्भर रहती है। सुबह बेला से घुमारवीं के लिए चलने वाली यह बस क्षेत्र के विद्यार्थियों, नौकरीपेशा लोगों, व्यापारियों, बुजुर्गों और मरीजों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक परिवहन साधन है। लेकिन पिछले कई दिनों से बस को निर्धारित रूट पर चलाने के बजाय अन्य गांवों के साथ जोड़ दिया गया है, जिससे यात्रियों को बीच रास्ते में उतरना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में निजी बसों की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में सरकारी बस सेवा ही लोगों का एकमात्र सहारा है। बस के सीधे घुमारवीं न जाने से लोगों को मजबूरी में टैक्सी या निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे उनकी जेब पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि रोजाना आने-जाने पर सैकड़ों रुपये अतिरिक्त खर्च हो रहे हैं, जो सामान्य परिवारों के लिए परेशानी का कारण बन गया है।
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ग्रामीणों ने बताया कि बुजुर्गों और बीमार लोगों की परेशानी और अधिक बढ़ गई है। इलाज के लिए घुमारवीं जाने वाले मरीजों को बस बदलने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। कई बार उन्हें निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ता है, जिससे आर्थिक बोझ और बढ़ जाता है। नवनिर्वाचित प्रधान शशिपाल सहित मनोज, नंदलाल, जगदीश, प्रकाश, कर्ण, राजेंद्र, अरविंद और राजेश ने विभाग से मांग की है कि बेला-घुमारवीं बस सेवा को उसके मूल रूट पर नियमित रूप से संचालित किया जाए ताकि लोगों को राहत मिल सके। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समस्या का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो ग्रामीण आंदोलन करने पर मजबूर होंगे। उधर, बस अड्डा इंचार्ज जयपाल ने बताया कि कभी-कभी बस खराब होने या अतिरिक्त रूटों पर बसें भेजने जैसी परिस्थितियों में इस बस को अन्य गांवों की ओर मोड़ना पड़ता है। हालांकि उन्होंने कहा कि भविष्य में प्रयास किया जाएगा कि बेला-घुमारवीं बस सेवा को उसके निर्धारित रूट पर ही संचालित रखा जाए, ताकि यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
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