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Bilaspur News: भजवाणी पुल निर्माण कार्य शुरू न होने से जनता में रोष

Mon, 13 Apr 2026 11:39 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Mon, 13 Apr 2026 11:39 PM IST
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Public anger due to non-start of Bhajwani bridge construction work
सतलुज नदी पर प्रस्तावित 310 मीटर लंबा पुल
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निर्माण के लिए है 10 से घटाकर किया 8 करोड़ बजट

तीन विधानसभा क्षेत्रों के 35 पंचायतों के लोग होने हैं लाभान्वित



संवाद न्यूज एजेंसी

झंडूता (बिलासपुर)। सतलुज नदी पर बहुप्रतीक्षित भजवाणी पुल का निर्माण कार्य अब तक शुरू नहीं हो पाया है। 14 जुलाई 2025 को इसके लिए स्वीकृति पत्र जारी हो चुका था, लेकिन मौके पर कोई गतिविधियां नहीं चल रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान में नदी का जलस्तर काफी कम है। यही अवधि पुल निर्माण के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है, क्योंकि पिलर निर्माण कार्य इस समय अपेक्षाकृत आसान होता है। इसके बावजूद निर्माण कार्य शुरू न होना क्षेत्रवासियों के लिए चिंता का विषय बन गया है।


जानकारी के अनुसार पुल निर्माण के लिए सीआरएफ फंड से राशि स्वीकृत हो चुकी है। इसके अलावा, निर्माण स्थल की भूमि भी विभाग के नाम स्थानांतरित कर दी गई है। प्रस्तावित पुल 310 मीटर लंबा होगा और इसके बन जाने से तीन विधानसभा क्षेत्रों के 35 पंचायतों के लोगों को आवागमन में बड़ी सुविधा मिलेगी। भजवाणी पुल पुनर्निर्माण समिति के अध्यक्ष एवं औहर के पूर्व प्रधान देशराज शर्मा ने बताया कि गत वर्ष पुल के लिए 10 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया था, जबकि इस वर्ष इसे घटाकर 8 करोड़ रुपये कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार जानबूझकर पुल निर्माण के कार्य को लंबित रख रही है। देशराज शर्मा का कहना है कि तकनीकी शिक्षा मंत्री से पुल का शिलान्यास अब तक नहीं करवाया गया। कहा कि मंत्री अपने विधानसभा क्षेत्र में नई योजनाओं को लागू करने में सफल नहीं रहे और केंद्र से स्वीकृत योजनाओं को आगे बढ़ाने में रुचि नहीं दिखाई जा रही। चेतावनी दी कि यदि पुल निर्माण कार्य शीघ्र शुरू नहीं कराया गया तो क्षेत्र के लोग मिलकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल जनहित और आवागमन की सुविधा सुनिश्चित कराने के लिए किया जाएगा। स्थानीय लोग पुल निर्माण की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उनका कहना है कि पुल बन जाने से रोजमर्रा की जीवन सुविधाएं आसान होंगी। बच्चों की स्कूल आवागमन, किसानों के लिए फसल परिवहन और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच अब पहले से अधिक आसान हो जाएगी।
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