फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Bilaspur News ›   Protest continues by wearing black badges on doctors

Bilaspur News: चिकित्सकों का काले बिल्ले लगाकर विरोध-प्रदर्शन जारी

Fri, 19 Jan 2024 07:03 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 19 Jan 2024 07:03 PM IST
विज्ञापन
Protest continues by wearing black badges on doctors
-अनुबंध पर नियुक्त चिकित्सकों को पूरे देश में मिल रहा सबसे कम वेतन
विज्ञापन

- विभाग चिकित्सकों की वरिष्ठता सूची बनाने में असमर्थ : डॉ. विकास

संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं(बिलासपुर)। जिले के सभी राजकीय अस्पतालों में शुक्रवार को भी चिकित्सकों ने काले बिल्ले लगाकर विरोध प्रदर्शन जारी रखा। यह चिकित्सकों के विरोध प्रदर्शन का दूसरा दिन था।

चिकित्सकों का कहना है कि प्रदेश में अनुबंध पर नियुक्त चिकित्सकों को पूरे देश में सबसे कम वेतन दिया जा रहा है। जबकि मुख्यमंत्री ने हिमाचल चिकित्सा अधिकारी संघ के पदाधिकारियों को आश्वासन दिया था कि चिकित्सकों की आगामी भर्ती में उनके वेतन के साथ एनपीए को भी जोड़ा जाएगा। लेकिन अभी तक उनके वादें पूरे नहीं हुए हैं। अन्य विभागों की तुलना में चिकित्सकों की प्रमोशन के बहुत ही कम पद स्वीकृत हैं। इस संदर्भ में उन्हें केंद्र सरकार की तर्ज पर डायनेमिक कॅरियर प्रोग्रेशन स्कीम दी जाए जोकि अन्य राज्यों में जैसे कि बिहार, मध्य प्रदेश में केंद्र सरकार की तर्ज पर लागू की गई है। प्रमोशन की बात करें तो स्वास्थ्य विभाग में कई साल से खंड चिकित्सा अधिकारियों, मुख्य चिकित्सा अधिकारियों, वरिष्ठ मेडिकल सुपरीटेंडेंट, डिप्टी डायरेक्टर और डायरेक्टर ऑफ हेल्थ सर्विसेज के पद वरिष्ठता एवं योग्यता के आधार पर नहीं भरे गए हैं। संघ के महासचिव डॉ. विकास ठाकुर ने कहा कि विभाग कई साल से चिकित्सकों की वरिष्ठता सूची बनाने में असमर्थ रहा है, जिसके चलते समय अनुसार प्रमोशन नहीं हो रही है। रेगुलर प्रमोशन न होने के कारण सेवानिवृत्ति मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को सेवा विस्तार दिया जा रहा है। ऐसा करने से अन्य चिकित्सकों का कई साल के इंतजार के बाद पदोन्नति का हक भी छीना जा रहा है। कई स्वास्थ्य संस्थान बिना किसी चिकित्सक के चल रहे हैं और वहां अन्य स्वास्थ्य संस्थानों से डेपुटेशन लगाई जा रही है। इस कारण जनता को स्वास्थ्य की स्थाई सुविधा प्राप्त नहीं हो रही है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग में अभी तक विभिन्न मेडिकल कॉलेज से उत्तीर्ण हुए एमबीबीएस छात्रों में किसी एक को भी अब तक कोई रोजगार प्राप्त नहीं हुआ है। इसके अलावा कई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में केवल दो ही चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं जबकि इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड की तहत 10 चिकित्सकों के पदों के साथ अन्य कर्मचारियों के पदों को भी स्वीकृति होनी चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed