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Bilaspur News: लोक निर्माण विभाग का हॉर्टिकल्चर सब-डिविजन नादौन शिफ्ट करने पर सियासत तेज

Mon, 03 Aug 2026 10:41 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 03 Aug 2026 10:41 PM IST
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Politics heats up over the shifting of the Public Works Department's horticulture sub-division to Nadaun.
विधायक त्रिलोक जमवाल ने सरकार पर साधा निशाना, कहा-फैसला वापस नहीं हुआ तो करेंगे आंदोलन
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। लोक निर्माण विभाग के हॉर्टिकल्चर सब-डिविजन को बिलासपुर से नादौन स्थानांतरित किए जाने के फैसले पर सदर विधायक त्रिलोक जमवाल ने प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार जनहित में नए संस्थान खोलने के बजाय लगातार संस्थानों को बंद करने और उन्हें दूसरे जिलों में स्थानांतरित करने का काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि बिलासपुर से हॉर्टिकल्चर सब-डिविजन को मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र नादौन भेजने का निर्णय जिले के साथ अन्याय है और इसे तत्काल वापस लिया जाना चाहिए। कहा कि कांग्रेस सरकार के साढ़े तीन वर्षों के कार्यकाल में भाजपा सरकार की ओर से खोले गए अनेक संस्थानों पर ताले लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि एम्स बिलासपुर को ध्यान में रखकर खोला गया जल शक्ति विभाग का डिविजन कार्यालय, हरलोग उप-तहसील, गर्ल्स आईटीआई, 28 प्राथमिक एवं मिडल स्कूल सहित कई संस्थान बंद किए जा चुके हैं। इसके अलावा कृषि विभाग के कई एक्सटेंशन सेंटर भी बंद कर दिए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 1971 से बिलासपुर में संचालित एमएंडपी सर्कल को भी हमीरपुर स्थानांतरित कर दिया गया। वहीं, बिलासपुर के गर्ल्स स्कूल को बंद करने का फैसला भी सरकार ने लिया था, जिसे भाजपा और अभिभावकों के विरोध के बाद वापस लेना पड़ा।
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उन्होंने कहा कि 29 जुलाई को जारी अधिसूचना के माध्यम से वर्ष 1988 से बिलासपुर में संचालित लोक निर्माण विभाग के हॉर्टिकल्चर सब-डिविजन को नादौन स्थानांतरित कर दिया गया है। इस सब-डिविजन में एसडीओ और जेई समेत कुल 41 स्वीकृत पद हैं, जिनमें वर्तमान में 27 कर्मचारी कार्यरत हैं। इसके अधीन कोठीपुरा, सुंगल, बनेर और गंभरोला नर्सरियों का संचालन होता है, जहां तैयार पौधों की आपूर्ति ऊना, नूरपुर, डलहौजी, धर्मपुर, देहरा और हमीरपुर सर्कल तक की जाती है।
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त्रिलोक जमवाल ने कहा कि नादौन में फिलहाल नर्सरियां विकसित करने के लिए भूमि उपलब्ध नहीं है। नई नर्सरियां तैयार करने में तीन से चार वर्ष का समय लगता है, जबकि सब-डिविजन के लिए नया आधारभूत ढांचा तैयार करने पर करोड़ों रुपये खर्च होंगे। उन्होंने कहा कि एक ओर प्रदेश सरकार आर्थिक तंगी का हवाला देती है, वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र को लाभ पहुंचाने के लिए बिलासपुर के संस्थानों को वहां स्थानांतरित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को यह फैसला तुरंत वापस लेना चाहिए। यदि ऐसा नहीं किया गया तो बिलासपुर की जनता अपने अधिकारों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने के लिए मजबूर होगी।
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