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Bilaspur News: पर्यवेक्षक हिना कावरे ने घुमारवीं में कार्यकर्ताओं से ली फीडबैक
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जिलाध्यक्ष चयन पर कार्यकर्ताओं ने रखी एकजुटता की शर्त
बोले-संगठन में निस्वार्थ, समर्पित भावना से काम करने वाला बने अध्यक्ष
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं (बिलासपुर)। कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान के तहत बुधवार को घुमारवीं में एआईसीसी पर्यवेक्षक हिना कावरे ने कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों की नब्ज टटोली। बैठक में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और नेता पहुंचे, जिससे स्पष्ट हो गया कि संगठन के भीतर जिलाध्यक्ष पद पर चर्चा इस समय चरम पर है।
बैठक के दौरान हिना कावरे ने पहले सामूहिक रूप से सभी कार्यकर्ताओं को संबोधित किया और उसके बाद एक-एक कर उनसे व्यक्तिगत संवाद भी किया। इस संवाद में कार्यकर्ताओं ने खुलकर अपनी राय रखी और जिलाध्यक्ष पद को लेकर व्यापक सहमति जताई। बताया जा रहा है कि अधिकांश कार्यकर्ताओं ने एकमत से कहा कि केवल वही व्यक्ति जिलाध्यक्ष बनाया जाए जो संगठन के लिए लंबे समय से निस्वार्थ और समर्पित भावना से काम कर रहा हो। साथ ही यह भी शर्त रखी कि नया अध्यक्ष गुटबाजी से दूर रहने वाला, सभी नेता-कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चलने वाला और संगठन में किसी को नीचा दिखाने वाली राजनीति से परे रहने वाला व्यक्ति होना चाहिए। कार्यकर्ताओं की इस मांग ने जिले में चल रही खींचतान और गुटीय राजनीति पर प्रत्यक्ष रूप से सवाल खड़ा कर दिया है। लंबे समय से बिलासपुर कांग्रेस में कई गुट सक्रिय हैं और जिलाध्यक्ष पद की दावेदारी बढ़ने के साथ यह खींचतान और गहरी होती जा रही है। घुमारवीं बैठक में कार्यकर्ताओं की ओर से की गई एकजुटता और संगठन सर्वोपरि की मांग ने स्पष्ट कर दिया है कि कार्यकर्ताओं की प्राथमिकता गुटीय शक्ति से अधिक संगठनात्मक स्थिरता है।
बैठक में कांग्रेस नेता विवेक कुमार, पूर्व जिलाध्यक्ष अंजना धीमान, चंपा ठाकुर, राजीव शर्मा, जागीर सिंह मेहता, ज्ञान चंद, दिनेश कुमार सहित कई वरिष्ठ कांग्रेस पदाधिकारी मौजूद रहे। सभी नेताओं ने अपने सुझाव दिए और संगठन को मजबूत करने की दिशा में सामूहिक सोच का समर्थन किया। कई नेताओं ने यह भी कहा कि नया जिलाध्यक्ष ऐसा होना चाहिए जो जिले के सभी क्षेत्रों को समान रूप से प्रतिनिधित्व दे सके और 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए संगठन को एक नए ढांचे में तैयार कर सके। हिना कावरे इन प्रतिक्रिया के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार करेंगी और इसे पार्टी हाईकमान के समक्ष सौंपेंगी।
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बताते चलें कि बिलासपुर कांग्रेस उस मोड़ पर खड़ी है जहां गुटबाजी को खत्म करना और नए जिलाध्यक्ष पर सर्वसम्मति बनाना संगठन के लिए सबसे अहम चुनौती है।
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बोले-संगठन में निस्वार्थ, समर्पित भावना से काम करने वाला बने अध्यक्ष
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं (बिलासपुर)। कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान के तहत बुधवार को घुमारवीं में एआईसीसी पर्यवेक्षक हिना कावरे ने कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों की नब्ज टटोली। बैठक में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और नेता पहुंचे, जिससे स्पष्ट हो गया कि संगठन के भीतर जिलाध्यक्ष पद पर चर्चा इस समय चरम पर है।
बैठक के दौरान हिना कावरे ने पहले सामूहिक रूप से सभी कार्यकर्ताओं को संबोधित किया और उसके बाद एक-एक कर उनसे व्यक्तिगत संवाद भी किया। इस संवाद में कार्यकर्ताओं ने खुलकर अपनी राय रखी और जिलाध्यक्ष पद को लेकर व्यापक सहमति जताई। बताया जा रहा है कि अधिकांश कार्यकर्ताओं ने एकमत से कहा कि केवल वही व्यक्ति जिलाध्यक्ष बनाया जाए जो संगठन के लिए लंबे समय से निस्वार्थ और समर्पित भावना से काम कर रहा हो। साथ ही यह भी शर्त रखी कि नया अध्यक्ष गुटबाजी से दूर रहने वाला, सभी नेता-कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चलने वाला और संगठन में किसी को नीचा दिखाने वाली राजनीति से परे रहने वाला व्यक्ति होना चाहिए। कार्यकर्ताओं की इस मांग ने जिले में चल रही खींचतान और गुटीय राजनीति पर प्रत्यक्ष रूप से सवाल खड़ा कर दिया है। लंबे समय से बिलासपुर कांग्रेस में कई गुट सक्रिय हैं और जिलाध्यक्ष पद की दावेदारी बढ़ने के साथ यह खींचतान और गहरी होती जा रही है। घुमारवीं बैठक में कार्यकर्ताओं की ओर से की गई एकजुटता और संगठन सर्वोपरि की मांग ने स्पष्ट कर दिया है कि कार्यकर्ताओं की प्राथमिकता गुटीय शक्ति से अधिक संगठनात्मक स्थिरता है।
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बैठक में कांग्रेस नेता विवेक कुमार, पूर्व जिलाध्यक्ष अंजना धीमान, चंपा ठाकुर, राजीव शर्मा, जागीर सिंह मेहता, ज्ञान चंद, दिनेश कुमार सहित कई वरिष्ठ कांग्रेस पदाधिकारी मौजूद रहे। सभी नेताओं ने अपने सुझाव दिए और संगठन को मजबूत करने की दिशा में सामूहिक सोच का समर्थन किया। कई नेताओं ने यह भी कहा कि नया जिलाध्यक्ष ऐसा होना चाहिए जो जिले के सभी क्षेत्रों को समान रूप से प्रतिनिधित्व दे सके और 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए संगठन को एक नए ढांचे में तैयार कर सके। हिना कावरे इन प्रतिक्रिया के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार करेंगी और इसे पार्टी हाईकमान के समक्ष सौंपेंगी।
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बताते चलें कि बिलासपुर कांग्रेस उस मोड़ पर खड़ी है जहां गुटबाजी को खत्म करना और नए जिलाध्यक्ष पर सर्वसम्मति बनाना संगठन के लिए सबसे अहम चुनौती है।