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पांच बीघा में शताबरी की खेती करने पर मिलेगी 19 हजार की सब्सिडी
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बिलासपुर। आयुष मंत्रालय भारत सरकार और आरसीएफसी जोगिंदर नगर के सौजन्य से बिलासपुर के घुमारवीं में औषधीय पौधों की नर्सरी तैयार कराई गई है। इस पौधशाला में संस्था ने शतावरी के एक लाख औषधीय पौधे तैयार किए हैं। इनमें सहजन के 25,000 पौधे, हाइब्रिड पीकेएमआई-1 और पीकेएमआई-2, गिलोय के 1000 सहित अन्य कई प्रकार के पौधे शामिल हैं। इन पौधों पर विभाग द्वारा किसानों को सब्सिडी भी उपलब्ध कराई जा रही है।
शीतिकंठ कल्याण एवं संस्था गलासी घुमारवीं के सचिव विकास कुमार शर्मा ने बताया कि संस्था पिछले चार वर्षों से पर्यावरण सुरक्षा एवं किसान आर्थिक कल्याण के लिए कार्यरत है। इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए संस्था ने इस बार औषधीय गुण रखने वाले पौधे तैयार किए। यह पौधे किसानों को कम मूल्य पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। जिससे कि किसान अपनी व्यर्थ पढ़ी हुई कृषि योग्य भूमि को इस्तेमाल करके पर्यावरण सुरक्षा एवं औषधीय खेती को अपनाकर अपनी आर्थिकी सुदृढ़ कर सकते हैं।
शर्मा ने कहा कि यह सब पौधे इसी वर्ष किसानों के बीच वितरित किए जाएंगे। इससे पहले संस्था हिमाचल प्रदेश वन विभाग एवं भारतीय कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के सहयोग से 25000 औषधीय पौधे निशुल्क वितरित कर चुकी है।
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उन्होंने कहा कि संस्था किसानों को पौधों के साथ सब्सिडी भी उपलब्ध करवा रही है। कहा कि अगर कोई किसान 5 बीघा में शतावरी की खेती करता है तो उसे विभाग की तरफ से और मंत्रालय की तरफ से 19,000 रुपये की सब्सिडी भी उपलब्ध कराई जा रही है। इसलिए, किसानों से यह अपील की जाती है कि ज्यादा से ज्यादा औषधीय पौधों की खेती अपनाकर पर्यावरण सुरक्षा एवं अपनी आर्थिकी को सुदृढ़ करने में सहयोग करें। यह पौधे संस्था द्वारा संचालित पौधशाला से प्राप्त किए जा सकते हैं।
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शीतिकंठ कल्याण एवं संस्था गलासी घुमारवीं के सचिव विकास कुमार शर्मा ने बताया कि संस्था पिछले चार वर्षों से पर्यावरण सुरक्षा एवं किसान आर्थिक कल्याण के लिए कार्यरत है। इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए संस्था ने इस बार औषधीय गुण रखने वाले पौधे तैयार किए। यह पौधे किसानों को कम मूल्य पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। जिससे कि किसान अपनी व्यर्थ पढ़ी हुई कृषि योग्य भूमि को इस्तेमाल करके पर्यावरण सुरक्षा एवं औषधीय खेती को अपनाकर अपनी आर्थिकी सुदृढ़ कर सकते हैं।
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शर्मा ने कहा कि यह सब पौधे इसी वर्ष किसानों के बीच वितरित किए जाएंगे। इससे पहले संस्था हिमाचल प्रदेश वन विभाग एवं भारतीय कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के सहयोग से 25000 औषधीय पौधे निशुल्क वितरित कर चुकी है।
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उन्होंने कहा कि संस्था किसानों को पौधों के साथ सब्सिडी भी उपलब्ध करवा रही है। कहा कि अगर कोई किसान 5 बीघा में शतावरी की खेती करता है तो उसे विभाग की तरफ से और मंत्रालय की तरफ से 19,000 रुपये की सब्सिडी भी उपलब्ध कराई जा रही है। इसलिए, किसानों से यह अपील की जाती है कि ज्यादा से ज्यादा औषधीय पौधों की खेती अपनाकर पर्यावरण सुरक्षा एवं अपनी आर्थिकी को सुदृढ़ करने में सहयोग करें। यह पौधे संस्था द्वारा संचालित पौधशाला से प्राप्त किए जा सकते हैं।