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सभी केंद्रों के ध्यानार्थ :: सचित्र... बारिश के लिए माता के चरणों में रखी भगवान वीरभद्र की पिंडी
Thu, 05 Dec 2024 11:58 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Thu, 05 Dec 2024 11:58 PM IST
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मां नयनादेवी जी में पुजारियों ने विशेष पूजा-अर्चना की और माता रानी से जल्द बारिश की प्रार्थना की
संवाद न्यूज एजेंसी
श्री नयना देवी जी (बिलासपुर)। हिमाचल में दो माह से चल रहे सूखे से राहत और बारिश की कामना के लिए प्रसिद्ध शक्तिपीठ श्री नयना देवी जी में भगवान वीरभद्र की पिंडी को माता के चरणों में स्थापित किया गया। यह परंपरा कई सालों से चली आ रही है। मान्यता है कि ऐसा बारिश की प्रार्थना के लिए किया जाता है।
मंदिर के पुजारियों के अनुसार जब भी प्रदेश में लंबे समय तक बारिश नहीं होती और सूखे जैसे हालात पैदा हो जाते हैं, तब मंदिर में भगवान वीरभद्र की पिंडी को विशेष रूप से माता के चरणों में रखा जाता है। इसका उद्देश्य है कि देवी मां और भगवान वीरभद्र की कृपा से बारिश का आगमन हो और सूखा खत्म हो। पुजारियों ने बताया कि यह परंपरा उनके बुजुर्गों की ओर से शुरू की गई थी। जब भी बारिश काफी समय तक नहीं होती थी, तब वे भगवान वीरभद्र की पिंडी को मंदिर की परिक्रमा करवा बाहर माता के चरणों में रख देते थे। मान्यता है कि इसके कुछ दिन बाद बारिश का सिलसिला शुरू हो जाता था। परंपरा को आज भी उसी विश्वास के साथ जारी रखा जा रहा है।
माता रानी बारिश का आशीर्वाद दें
वीरवार को भी पुजारियों ने विशेष पूजा-अर्चना की और माता रानी से प्रार्थना की कि वह जल्द ही बारिश का आशीर्वाद दें। मंदिर के पुजारी प्रवेश शर्मा और सुमित शर्मा ने कहा कि हर वर्ष जब सूखा बढ़ता है और पानी की कमी महसूस होती है तो यह धार्मिक परंपरा क्षेत्रवासियों के लिए उम्मीद की किरण बन जाती है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
श्री नयना देवी जी (बिलासपुर)। हिमाचल में दो माह से चल रहे सूखे से राहत और बारिश की कामना के लिए प्रसिद्ध शक्तिपीठ श्री नयना देवी जी में भगवान वीरभद्र की पिंडी को माता के चरणों में स्थापित किया गया। यह परंपरा कई सालों से चली आ रही है। मान्यता है कि ऐसा बारिश की प्रार्थना के लिए किया जाता है।
मंदिर के पुजारियों के अनुसार जब भी प्रदेश में लंबे समय तक बारिश नहीं होती और सूखे जैसे हालात पैदा हो जाते हैं, तब मंदिर में भगवान वीरभद्र की पिंडी को विशेष रूप से माता के चरणों में रखा जाता है। इसका उद्देश्य है कि देवी मां और भगवान वीरभद्र की कृपा से बारिश का आगमन हो और सूखा खत्म हो। पुजारियों ने बताया कि यह परंपरा उनके बुजुर्गों की ओर से शुरू की गई थी। जब भी बारिश काफी समय तक नहीं होती थी, तब वे भगवान वीरभद्र की पिंडी को मंदिर की परिक्रमा करवा बाहर माता के चरणों में रख देते थे। मान्यता है कि इसके कुछ दिन बाद बारिश का सिलसिला शुरू हो जाता था। परंपरा को आज भी उसी विश्वास के साथ जारी रखा जा रहा है।
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माता रानी बारिश का आशीर्वाद दें
वीरवार को भी पुजारियों ने विशेष पूजा-अर्चना की और माता रानी से प्रार्थना की कि वह जल्द ही बारिश का आशीर्वाद दें। मंदिर के पुजारी प्रवेश शर्मा और सुमित शर्मा ने कहा कि हर वर्ष जब सूखा बढ़ता है और पानी की कमी महसूस होती है तो यह धार्मिक परंपरा क्षेत्रवासियों के लिए उम्मीद की किरण बन जाती है।
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