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Bilaspur News: जमीन विवाद में अहम दस्तावेज पेश करने की मिली अनुमति
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अदालत ने जमाबंदी और बंटवारे से जुड़े इंतकाल की प्रमाणित प्रति रिकॉर्ड पर लेने को दी मंजूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जमीन से जुड़े एक सिविल मुकदमे में अदालत ने प्रतिवादी पक्ष को जमीन के बंटवारे से जुड़े दो महत्वपूर्ण दस्तावेज रिकॉर्ड पर पेश करने की अनुमति दी है। वरिष्ठ सिविल जज घुमारवीं की अदालत ने वर्ष 2014-15 की जमाबंदी और बंटवारे से संबंधित इंतकाल संख्या 2470 की प्रमाणित प्रति पेश करने की अनुमति दी। प्रतिवादी पक्ष ने अदालत में आवेदन देकर कहा था कि मुकदमे की तैयारी के दौरान इन दस्तावेजों का महत्व सामने आया। दोनों दस्तावेज राजस्व विभाग की ओर से तैयार किए गए हैं। इनमें जमाबंदी में लाल स्याही से जमीन के बंटवारे का उल्लेख किया गया है। प्रतिवादी पक्ष का कहना था कि इन दस्तावेजों से मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने में मदद मिलेगी और इन्हें रिकॉर्ड पर लेना जरूरी है। वादी पक्ष ने इस आवेदन का विरोध किया। उसकी ओर से कहा गया कि जमीन के बंटवारे की प्रक्रिया को एक सह-हिस्सेदार ने अपील में चुनौती दी है। यह अपील कलेक्टर, उपमंडल घुमारवीं के समक्ष लंबित है। ऐसे में बंटवारे की प्रक्रिया अभी अंतिम नहीं हुई है। वादी पक्ष ने यह भी कहा कि मुकदमे के इस चरण में दस्तावेज पेश करने का कोई उचित कारण नहीं बताया गया है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि ये दस्तावेज मामले में चल रहे असली विवाद को समझने और उसका फैसला करने के लिए जरूरी हैं। अदालत ने यह भी माना कि दस्तावेज रिकॉर्ड पर आने से वादी पक्ष को कोई नुकसान नहीं होगा, क्योंकि उसे इन दस्तावेजों से जुड़े गवाहों से सवाल-जवाब करने का पूरा मौका मिलेगा। अदालत ने प्रतिवादी पक्ष की अर्जी मंजूर करते हुए दोनों दस्तावेज रिकॉर्ड पर पेश करने की अनुमति दे दी। मामले की अगली सुनवाई 27 अक्तूबर 2026 को होगी। इस दिन प्रतिवादी पक्ष की गवाही होगी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जमीन से जुड़े एक सिविल मुकदमे में अदालत ने प्रतिवादी पक्ष को जमीन के बंटवारे से जुड़े दो महत्वपूर्ण दस्तावेज रिकॉर्ड पर पेश करने की अनुमति दी है। वरिष्ठ सिविल जज घुमारवीं की अदालत ने वर्ष 2014-15 की जमाबंदी और बंटवारे से संबंधित इंतकाल संख्या 2470 की प्रमाणित प्रति पेश करने की अनुमति दी। प्रतिवादी पक्ष ने अदालत में आवेदन देकर कहा था कि मुकदमे की तैयारी के दौरान इन दस्तावेजों का महत्व सामने आया। दोनों दस्तावेज राजस्व विभाग की ओर से तैयार किए गए हैं। इनमें जमाबंदी में लाल स्याही से जमीन के बंटवारे का उल्लेख किया गया है। प्रतिवादी पक्ष का कहना था कि इन दस्तावेजों से मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने में मदद मिलेगी और इन्हें रिकॉर्ड पर लेना जरूरी है। वादी पक्ष ने इस आवेदन का विरोध किया। उसकी ओर से कहा गया कि जमीन के बंटवारे की प्रक्रिया को एक सह-हिस्सेदार ने अपील में चुनौती दी है। यह अपील कलेक्टर, उपमंडल घुमारवीं के समक्ष लंबित है। ऐसे में बंटवारे की प्रक्रिया अभी अंतिम नहीं हुई है। वादी पक्ष ने यह भी कहा कि मुकदमे के इस चरण में दस्तावेज पेश करने का कोई उचित कारण नहीं बताया गया है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि ये दस्तावेज मामले में चल रहे असली विवाद को समझने और उसका फैसला करने के लिए जरूरी हैं। अदालत ने यह भी माना कि दस्तावेज रिकॉर्ड पर आने से वादी पक्ष को कोई नुकसान नहीं होगा, क्योंकि उसे इन दस्तावेजों से जुड़े गवाहों से सवाल-जवाब करने का पूरा मौका मिलेगा। अदालत ने प्रतिवादी पक्ष की अर्जी मंजूर करते हुए दोनों दस्तावेज रिकॉर्ड पर पेश करने की अनुमति दे दी। मामले की अगली सुनवाई 27 अक्तूबर 2026 को होगी। इस दिन प्रतिवादी पक्ष की गवाही होगी।