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Bilaspur News: दो गांवाें के लोगों ने चंदा इकट्ठा कर, खुद की तीन किमी सड़क की मरम्मत
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- ग्राम पंचायत दधोल के गांव जसवानी, छंदोह का है मामला
-16 साल पहले गांव के लिए शुरू हुआ था कच्ची सड़क का निर्माण
-काम अधर में लटकने के बाद आज तक नहीं ली किसी ने सुध
-दोनों गांवों के 200 परिवारों को करना पड़ता है परेशानी का सामना
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं(बिलासपुर)। उपमंडल घुमारवीं की ग्राम पंचायत दधोल के दो गांवों के लोगों ने चंदा इकट्ठा कर, श्रमदान करके खुद ही कई साल पहले अपना अस्तित्व खो चुकी तीन किलोमीटर लंबी सड़क को छोटे वाहनों के चलने लायक बना दिया।
सड़क बेशक अभी भी कच्ची हो, लेकिन गांव वालों के हौसले पक्के हैं। उन्हें उम्मीद है कि कोई तो सरकार ऐसी आएगी जो उनकी इतने लंबे समय से चली आ रही एक पक्की सड़क की मांग पर विचार करेगी। उपमंडल घुमारवीं की ग्राम पंचायत दधोल के गांव जसवानी, छंदोह को आजादी के 76 वर्ष बीत जाने के बाद भी एक अदद पक्की सड़क नसीब नहीं हुई है। हालांकि करीब 16 वर्ष पहले इन दो गांवों के करीब 200 परिवारों के लिए मनरेगा के तहत तीन किलोमीटर लंबी कच्ची सड़क का निर्माण शुरू किया था, लेकिन काम अधर में ही रह गया। उसके बाद आज तक इतने वर्ष बीत जाने के बाद किसी ने उसे सड़क की सुध नहीं ली और सड़क की हालत ऐसी हो गई कि इस पर गाड़ी तो क्या लोगों का पैदल चल पाना मुश्किल था। स्थानीय लोगों का कहना है कि कितनी ही सरकारें इन बीते वर्षों में आईं और गईं लेकिन किसी ने भी इस सड़क की सुध लेना मुनासिब नहीं समझा। कई साल से गांव वाले इस सड़क को पक्का करने की मांग करते रहे, लेकिन सड़क को पक्का करना तो दूर 16 साल में पैदल चलने लायक भी नहीं बना पाए।
राष्ट्रीय राजमार्ग 103 पर निहारी से छंदोह, जसवानी के लिए जाने वाली इस सड़क पर इतने गड्ढे पड़ गए थे कि इस पर पैदल चलना भी नामुमकिन था। लोगों को सबसे बड़ी मुश्किल यह थी कि गांव में अगर कोई बीमार हो जाए तो उसे पालकी या फिर पलंग पर बिठाकर सड़क तक लाना पड़ता था। तब जाकर उसे अस्पताल पहुंचाया जाता, लेकिन आखिर में गांव वालों ने चंदा इकट्ठा कर जेसीबी मंगवा कर इस सड़क पर पड़े पत्थरों तथा चट्टानों को काटकर खुद श्रमदान करके इसे समतल किया। इसे चलने, यातायात के काबिल बना दिया। स्थानीय लोगों परमजीत रिंटू, विपिन, मदन, तरसेम सिंह आदि का कहना है कि चुनाव के समय नेता बड़ी-बड़ी बातें करके वादे तो कर जाते हैं, लेकिन सरकार बनते ही सब कुछ भूल जाते हैं और आखिर में गांव के लोगों के हिस्से सिर्फ आश्वासन ही आते हैं।
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इस संबंध में घुमारवीं विधायक राजेश धर्माणी ने कहा कि इन गांवों की सड़क निर्माण के लिए बजट का प्रावधान किया जा रहा है। प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जल्द ही बजट जारी करवा दिया जाएगा।
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-16 साल पहले गांव के लिए शुरू हुआ था कच्ची सड़क का निर्माण
-काम अधर में लटकने के बाद आज तक नहीं ली किसी ने सुध
-दोनों गांवों के 200 परिवारों को करना पड़ता है परेशानी का सामना
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं(बिलासपुर)। उपमंडल घुमारवीं की ग्राम पंचायत दधोल के दो गांवों के लोगों ने चंदा इकट्ठा कर, श्रमदान करके खुद ही कई साल पहले अपना अस्तित्व खो चुकी तीन किलोमीटर लंबी सड़क को छोटे वाहनों के चलने लायक बना दिया।
सड़क बेशक अभी भी कच्ची हो, लेकिन गांव वालों के हौसले पक्के हैं। उन्हें उम्मीद है कि कोई तो सरकार ऐसी आएगी जो उनकी इतने लंबे समय से चली आ रही एक पक्की सड़क की मांग पर विचार करेगी। उपमंडल घुमारवीं की ग्राम पंचायत दधोल के गांव जसवानी, छंदोह को आजादी के 76 वर्ष बीत जाने के बाद भी एक अदद पक्की सड़क नसीब नहीं हुई है। हालांकि करीब 16 वर्ष पहले इन दो गांवों के करीब 200 परिवारों के लिए मनरेगा के तहत तीन किलोमीटर लंबी कच्ची सड़क का निर्माण शुरू किया था, लेकिन काम अधर में ही रह गया। उसके बाद आज तक इतने वर्ष बीत जाने के बाद किसी ने उसे सड़क की सुध नहीं ली और सड़क की हालत ऐसी हो गई कि इस पर गाड़ी तो क्या लोगों का पैदल चल पाना मुश्किल था। स्थानीय लोगों का कहना है कि कितनी ही सरकारें इन बीते वर्षों में आईं और गईं लेकिन किसी ने भी इस सड़क की सुध लेना मुनासिब नहीं समझा। कई साल से गांव वाले इस सड़क को पक्का करने की मांग करते रहे, लेकिन सड़क को पक्का करना तो दूर 16 साल में पैदल चलने लायक भी नहीं बना पाए।
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राष्ट्रीय राजमार्ग 103 पर निहारी से छंदोह, जसवानी के लिए जाने वाली इस सड़क पर इतने गड्ढे पड़ गए थे कि इस पर पैदल चलना भी नामुमकिन था। लोगों को सबसे बड़ी मुश्किल यह थी कि गांव में अगर कोई बीमार हो जाए तो उसे पालकी या फिर पलंग पर बिठाकर सड़क तक लाना पड़ता था। तब जाकर उसे अस्पताल पहुंचाया जाता, लेकिन आखिर में गांव वालों ने चंदा इकट्ठा कर जेसीबी मंगवा कर इस सड़क पर पड़े पत्थरों तथा चट्टानों को काटकर खुद श्रमदान करके इसे समतल किया। इसे चलने, यातायात के काबिल बना दिया। स्थानीय लोगों परमजीत रिंटू, विपिन, मदन, तरसेम सिंह आदि का कहना है कि चुनाव के समय नेता बड़ी-बड़ी बातें करके वादे तो कर जाते हैं, लेकिन सरकार बनते ही सब कुछ भूल जाते हैं और आखिर में गांव के लोगों के हिस्से सिर्फ आश्वासन ही आते हैं।
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इस संबंध में घुमारवीं विधायक राजेश धर्माणी ने कहा कि इन गांवों की सड़क निर्माण के लिए बजट का प्रावधान किया जा रहा है। प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जल्द ही बजट जारी करवा दिया जाएगा।