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Bilaspur News: हर बीमारी में एम्स बिलासपुर रेफर हो रहे मरीज, दो-तीन महीने के रिकॉर्ड का होगा ऑडिट

Tue, 22 Sep 2026 12:10 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 22 Sep 2026 12:10 AM IST
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Patients with various ailments are being referred to AIIMS Bilaspur; records from the past two to three months will be audited.
स्वास्थ्य विभाग घुमारवीं-बिलासपुर समेत जिले के प्रमुख अस्पतालों के रेफरल रजिस्टर की होगी समीक्षा
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दिशा की बैठक में उठा था छोटे-मोटे मामलों को भी एम्स भेजने का मुद्दा
हर रेफरल की जांच होगी, मरीज को भेजना वास्तव में जरूरी था या नहीं, यह भी देखा जाएगा
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिले के अस्पतालों से छोटे-मोटे मामलों में भी मरीजों को एम्स बिलासपुर रेफर किए जाने से बढ़ रहे दबाव को कम करने के लिए स्वास्थ्य विभाग अब रेफरल व्यवस्था की समीक्षा करेगा। दिशा की बैठक में भी एम्स के लिए हो रहे रेफरल का मुद्दा उठा था। इसके बाद जिले के प्रमुख अस्पतालों में रखे रेफरल रजिस्टर में दर्ज पिछले दो-तीन महीने के मामलों का ऑडिट करने की तैयारी है। इसमें प्रत्येक रेफरल की जांच कर यह देखा जाएगा कि मरीज को एम्स भेजना वास्तव में जरूरी था या नहीं।
जिले के हर बड़े अस्पताल में रेफरल रजिस्टर रखे गए हैं। इनमें दर्ज करीब दो-तीन महीने के मामलों के डेटा की समीक्षा की जाएगी। संबंधित अस्पतालों के साथ बैठक कर यह देखा जाएगा कि किस मरीज को किस कारण से एम्स रेफर किया गया और उस मरीज को उच्च संस्थान भेजने की जरूरत थी या नहीं। समीक्षा के आधार पर रेफरल व्यवस्था में आवश्यक सुधार किए जाएंगे। जिले के प्रमुख अस्पतालों से होने वाले रेफरल की समीक्षा में घुमारवीं और बिलासपुर समेत अन्य स्वास्थ्य संस्थानों के मामले शामिल होंगे। सीएचसी और पीएचसी स्तर से भी मरीज एम्स भेजे जा रहे हैं। विभाग यह देखेगा कि स्थानीय स्तर पर उपचार की सुविधा होने के बावजूद किन मामलों में मरीजों को एम्स रेफर किया गया। गंभीर और विशेषज्ञ उपचार की जरूरत वाले मरीजों को समय पर उच्च संस्थान तक पहुंचाने के साथ अनावश्यक रेफरल कम करना समीक्षा का अहम हिस्सा रहेगा। स्वास्थ्य विभाग पहले चरण में करीब दो-तीन महीने का रेफरल डेटा खंगालेगा। रजिस्टर में दर्ज मरीज की बीमारी, रेफरल का कारण और संबंधित स्वास्थ्य संस्थान की जानकारी के आधार पर मामलों की समीक्षा होगी। इसके बाद संबंधित अस्पतालों के साथ बैठक में रेफरल की जरूरत पर चर्चा की जाएगी। इससे यह पता चल सकेगा कि किस स्वास्थ्य संस्थान से कितने मरीज एम्स भेजे जा रहे हैं और किन तरह के मामलों में रेफरल अधिक हो रहा है। आपात स्थिति में रेफरल प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए आपात सेतु का इस्तेमाल भी किया जा रहा है। इसके माध्यम से स्थानीय अस्पताल से मरीज को एम्स रेफर करने पर मरीज से संबंधित जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध हो सकेगी। इससे एम्स की टीम को मरीज के पहुंचने से पहले ही उसके केस की जानकारी मिल जाएगी। मरीज की स्थिति के अनुसार संबंधित चिकित्सक और टीम पहले से तैयारी कर सकेंगे। खासकर गंभीर मामलों में इससे मरीज के एम्स पहुंचने के बाद उपचार शुरू करने में लगने वाला समय कम करने में मदद मिल सकती है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से रेफरल व्यवस्था की समीक्षा के साथ आपात मामलों में सूचना के बेहतर आदान-प्रदान पर भी जोर दिया जा रहा है।
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कोट
अस्पतालों में रखे रेफरल रजिस्टर में दर्ज करीब दो-तीन महीने के मामलों की समीक्षा की जाएगी। बैठक में यह देखा जाएगा कि मरीज को एम्स रेफर करना वास्तव में जरूरी था या नहीं। आपात स्थिति में आपात सेतु के माध्यम से मरीज की जानकारी पहले ही एम्स तक पहुंचने से वहां की टीम उसके पहुंचने से पहले तैयारी कर सकेगी।
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डॉ. शशि दत्त शर्मा, सीएमओ बिलासपुर
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