{"_id":"618d61ea498d1231ef3b863a","slug":"panic-of-leopard-in-the-residential-areas-of-bharari-bilaspur-news-sml389947183","type":"story","status":"publish","title_hn":"रिहायशी इलाकों में बाघ की मौजूदगी से लोगों में बना डर का माहौल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रिहायशी इलाकों में बाघ की मौजूदगी से लोगों में बना डर का माहौल
विज्ञापन
भराड़ी (बिलासपुर)। जिले की भराड़ी उपतहसील में जंगली जानवरों का रिहायशी इलाकों में रुख करना चिंता का विषय बनता जा रहा है। क्षेत्र में आय दिन जंगली जानवर सड़कों या गांवों में देखे जा सकते हैं। वहीं, शिमला में रिहायशी बस्ती के समीप बच्चे को तेंदुए के उठाकर ले जाने की घटना के बाद लोगों में खूंखार जानवर की मौजूदगी का डर सताने लगा है।
लोगों का कहना है कि जंगली जानवरों का रिहायशी इलाकों में रुख करना अवैध शिकार और जंगलों का कटान है। लगातार तेंदुए जैसे बड़े जानवर अब रिहायशी इलाकों में देखने को मिल रहे हैं, जिससे लोगों में भय का माहौल बनता जा रहा है। हाल ही में शिमला के समीप रिहायशी बस्ती के समीप भी बच्चे को तेंदुआ की ओर से उठाकर ले जाने की घटना से यह बात साफ जाहिर हो चुकी है कि जंगलों से अब जंगली जानवर शिकार की तलाश में आबादी की ओर बढ़ रहे हैं। बता दें कि चार वर्ष पहले दधोल क्षेत्र में राह चलते व्यक्ति को तेंदुए ने मार डाला था। उसके बाद इस खूंखार तेंदुए को आदमखोर घोषित कर मारा गिराया गया था। यही नहीं, भराड़ी क्षेत्र के तहत भी बच्चे को तेंदुआ उठाकर ले गया था। उस समय भी शूटरों की टीम और वन विभाग ने तेंदुए को पकड़ने के लिए महीने तक दिन-रात प्रयास किए थे। बीते दिनों भी भराड़ी क्षेत्र के समीप बड़साय गांव में पालतू बकरी को तेंदुए ने मार डाला। यही नहीं, घर जा रहे कुछ युवकों ने बीच सड़क में तेंदुओ को देखा। तेंदुए ने 500 मीटर तक युवाओं की गाड़ी का पीछा किया गया।
केसर सिंह ने कहा कि जंगल के एक तरफ बसे गांव में जंगली जानवरों की मौजूदगी बड़े हादसे को अंजाम दे रही है। विभाग को जल्द इसके लिए कारगर कदम उठाने चाहिए। काशी राम ने कहा कि आजकल सर्दी के दिनों में शाम को अंधेरा जल्द हो जाता है। घर पहुंचने के लिए पैदल रास्ते से जंगल के बीच से होकर जाना पड़ता है। तेंदुए जैसे खूंखार जानवर से भय का माहौल बना हुआ है। विभाग को पिंजरे लगाकर क्षेत्र की जनता को राहत दिलानी चाहिए।
विज्ञापन
संजय ने कहा कि बीते चार वर्ष पहले तेंदुए ने क्षेत्र में लगातार हमले किए थे। उस समय शूटरों की टीम ने तेंदुए को मारा था। अब तेंदुए की रिहायशी क्षेत्रों में मौजूदगी से एक बार फिर डर का माहौल बना हुआ है। विभाग को कारगर कदम उठा कर लोगों को तेंदुए के डर से निजात दिलाने के प्रयास करने चाहिए।
विज्ञापन
लोगों का कहना है कि जंगली जानवरों का रिहायशी इलाकों में रुख करना अवैध शिकार और जंगलों का कटान है। लगातार तेंदुए जैसे बड़े जानवर अब रिहायशी इलाकों में देखने को मिल रहे हैं, जिससे लोगों में भय का माहौल बनता जा रहा है। हाल ही में शिमला के समीप रिहायशी बस्ती के समीप भी बच्चे को तेंदुआ की ओर से उठाकर ले जाने की घटना से यह बात साफ जाहिर हो चुकी है कि जंगलों से अब जंगली जानवर शिकार की तलाश में आबादी की ओर बढ़ रहे हैं। बता दें कि चार वर्ष पहले दधोल क्षेत्र में राह चलते व्यक्ति को तेंदुए ने मार डाला था। उसके बाद इस खूंखार तेंदुए को आदमखोर घोषित कर मारा गिराया गया था। यही नहीं, भराड़ी क्षेत्र के तहत भी बच्चे को तेंदुआ उठाकर ले गया था। उस समय भी शूटरों की टीम और वन विभाग ने तेंदुए को पकड़ने के लिए महीने तक दिन-रात प्रयास किए थे। बीते दिनों भी भराड़ी क्षेत्र के समीप बड़साय गांव में पालतू बकरी को तेंदुए ने मार डाला। यही नहीं, घर जा रहे कुछ युवकों ने बीच सड़क में तेंदुओ को देखा। तेंदुए ने 500 मीटर तक युवाओं की गाड़ी का पीछा किया गया।
विज्ञापन
केसर सिंह ने कहा कि जंगल के एक तरफ बसे गांव में जंगली जानवरों की मौजूदगी बड़े हादसे को अंजाम दे रही है। विभाग को जल्द इसके लिए कारगर कदम उठाने चाहिए। काशी राम ने कहा कि आजकल सर्दी के दिनों में शाम को अंधेरा जल्द हो जाता है। घर पहुंचने के लिए पैदल रास्ते से जंगल के बीच से होकर जाना पड़ता है। तेंदुए जैसे खूंखार जानवर से भय का माहौल बना हुआ है। विभाग को पिंजरे लगाकर क्षेत्र की जनता को राहत दिलानी चाहिए।
विज्ञापन
संजय ने कहा कि बीते चार वर्ष पहले तेंदुए ने क्षेत्र में लगातार हमले किए थे। उस समय शूटरों की टीम ने तेंदुए को मारा था। अब तेंदुए की रिहायशी क्षेत्रों में मौजूदगी से एक बार फिर डर का माहौल बना हुआ है। विभाग को कारगर कदम उठा कर लोगों को तेंदुए के डर से निजात दिलाने के प्रयास करने चाहिए।