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खुद मैदान से बाहर, अब धर्मपत्नियां लड़ेंगी चुनाव
संजय भारद्वाज/ अमर उजाला, बिलासपुर।
Updated Thu, 10 Dec 2015 09:10 PM IST
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पंचायत चुनाव में आरक्षण ने कई दिग्गज नेताओं का खेल बिगाड़ दिया है। ग्राम पंचायत के वार्ड पंच से प्रधान, बीडीसी और जिला परिषद तक आरक्षण का ऐसा चाबुक चला है कि दिग्गज मैदान में उतरने से पहले ही सियासत के खेल से आउट हो गए हैं।
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ऐसे नेता अब चुनावी मैदान में अपनी धर्मपत्नियों उतारने की भी रणनीति बना रहे हैं। जिला परिषद, पंचायत समिति हो या फिर पंचायत प्रधान का पद। आरक्षण का पेंच ऐसा फंसा कि कई नेताओं की उम्मीदें धरी की धरी रह गईं।
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आरक्षण रोस्टर जारी होते ही कई नेताओं के चुनाव लड़ने की उम्मीदों पर पानी फिर गया। अब जिला परिषद बिलासपुर की बात करें तो यहां कुल 14 में से नौ सीटें आरक्षित हैं।
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इसके तहत चुनावी मैदान में उतरने का मन बना चुके कई नेता पहले ही आउट हो गए हैं। बीडीसी की भी यही स्थिति है। जबकि ग्राम पंचायतों के प्रधान पद रिजर्व होने से कई प्रधान चुनाव नहीं लड़ सकेंगे।
आरक्षण की वजह से चुनाव नहीं लड़ने वाले नेता अब चुनावी मैदान में या तो अपनी पत्नियों को उतार रहे हैं। जबकि जिप और बीडीसी के चाहवान अपना वार्ड बदलने के बारे में भी सोच रहे हैं।
जिला परिषद को लें तो यहां निवर्तमान अध्यक्ष कुलदीप ठाकुर, उपाध्यक्ष अनूप महाजन, बसंत राम संधू के वार्ड आरक्षित हैं। ऐसे में इन नेताओं को अब चुनावी मैदान में उतरना है तो दूसरे वार्ड का रुख करना होगा।
यही स्थिति पंचायत समिति के वार्डों की भी है। हालांकि किसी ने भी अपने पत्ते नहीं खोले हैं। लेकिन, कयास लगाए जा रहे हैं कि वार्ड रिजर्व होने के बाद कई अपने वार्ड बदलेंगे तो कई सियासत के मैदान में अपनी पत्नियों को उतारेंगे। जिप अध्यक्ष कुलदीप ठाकुर ने भी अपनी पत्नी को मैदान में उतारने की तैयारी कर ली है।
जबकि बसंत राम संधू की भी ऐसी ही योजना है। उधर, बीडीसी के विभिन्न पद आरक्षित होने से चुनावी चौसर से पुराने चेहरे गायब हो गए हैं। झंडूता भाजपा द्वारा घोषित पार्टी समर्थित उम्मीदवारों में महज एक ही उम्मीदवार रिपीट हुआ है। जबकि अन्य नए चेहरे हैं। ग्राम पंचायतों में प्रधान पदों पर भी ऐसी ही स्थिति बनी है।
76 पंचायतों में महिला बनेंगी प्रधान
जनपद बिलासपुर की ग्राम पंचायतों में आधी दुनिया का बोलबाला रहेगा। पंचायत चुनावों में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण मिलने से कुल 76 पंचायतों की बागडोर महिला प्रतिनिधि संभालेगी।
जहां पहले पुरुष थे वहां अब महिलाएं मैदान में होंगी। ऐसे में कई पूर्व प्रधान अपनी धर्मपत्नियों को मैदान में उतारने की तैयारी में है। पंचायत चुनाव आरक्षण रोस्टर के अनुसार 151 ग्राम पंचायतों में से कुल 92 पंचायतें आरक्षित हुई हैं। इनमें 50 फीसदी महिलाओं के अलावा अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग को पंचायत चुनावों में उम्मीदवार बनने का मौका मिलेगा।
बीडीसी में भी है यही स्थिति
पंचायत चुनाव के लिए जारी किए गए आरक्षण रोस्टर में पंचायत समिति के विभिन्न वार्डों में बड़ा उलटफेर हुआ है। पंचायत समिति के कुल 97 वार्डों में से 65 वार्ड महिला, अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित हैं। ऐसे में बीडीसी में भी कई पुराने नेता चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। इन हालातों में कई नेता अपनी पत्नियों को मैदान में उतारने की तैयारी कर रहे हैं।