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Bilaspur News: प्रतिवादी की मौत के बाद वारिसों को मुकदमे में शामिल करने के आदेश
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घुमारवीं अदालत ने देरी माफ कर दोनों आवेदन किए मंजूर, 30 दिसंबर को होगी अगली सुनवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। घुमारवीं स्थित वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश की अदालत ने मुकदमे के दौरान दिवंगत हुए प्रतिवादी के कानूनी वारिसों को पक्षकार बनाने की अनुमति दे दी है। अदालत ने आवेदन दाखिल करने में हुई देरी को माफ करते हुए दोनों आवेदन मंजूर कर लिए। मामले की अगली सुनवाई 30 दिसंबर 2026 को होगी।
वादी के अनुसार, प्रतिवादी का 11 मार्च 2024 को निधन हो गया था। इसकी जानकारी वादी को 21 जुलाई 2024 को अपने अधिवक्ता से चर्चा के दौरान मिली। इसके बाद 22 जुलाई 2024 को मृत्यु प्रमाणपत्र प्राप्त कर कानूनी वारिसों को मुकदमे में शामिल करने के लिए आवेदन दायर किया गया। वादी ने आवेदन दाखिल करने में हुई देरी को माफ करने की मांग की थी।
प्रतिवादी पक्ष ने आवेदन का विरोध करते हुए दलील दी कि निधन की जानकारी सार्वजनिक होती है और कानून की जानकारी न होना देरी का उचित आधार नहीं है। प्रतिवादी पक्ष ने यह भी बताया कि दिवंगत प्रतिवादी ने 12 दिसंबर 2019 को पंजीकृत वसीयत की थी। इसी आधार पर आवेदन को समय सीमा से बाहर बताते हुए खारिज करने की मांग की गई।
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दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद अदालत ने माना कि मुकदमे के उचित निपटारे के लिए दिवंगत प्रतिवादी के कानूनी वारिसों को पक्षकार बनाना आवश्यक है। इसके बाद अदालत ने देरी माफ करते हुए वारिसों को रिकॉर्ड पर लाने की अर्जी मंजूर कर ली। अब कानूनी वारिसों को नोटिस जारी किए जाएंगे और मामले की सुनवाई 30 दिसंबर 2026 को होगी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। घुमारवीं स्थित वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश की अदालत ने मुकदमे के दौरान दिवंगत हुए प्रतिवादी के कानूनी वारिसों को पक्षकार बनाने की अनुमति दे दी है। अदालत ने आवेदन दाखिल करने में हुई देरी को माफ करते हुए दोनों आवेदन मंजूर कर लिए। मामले की अगली सुनवाई 30 दिसंबर 2026 को होगी।
वादी के अनुसार, प्रतिवादी का 11 मार्च 2024 को निधन हो गया था। इसकी जानकारी वादी को 21 जुलाई 2024 को अपने अधिवक्ता से चर्चा के दौरान मिली। इसके बाद 22 जुलाई 2024 को मृत्यु प्रमाणपत्र प्राप्त कर कानूनी वारिसों को मुकदमे में शामिल करने के लिए आवेदन दायर किया गया। वादी ने आवेदन दाखिल करने में हुई देरी को माफ करने की मांग की थी।
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प्रतिवादी पक्ष ने आवेदन का विरोध करते हुए दलील दी कि निधन की जानकारी सार्वजनिक होती है और कानून की जानकारी न होना देरी का उचित आधार नहीं है। प्रतिवादी पक्ष ने यह भी बताया कि दिवंगत प्रतिवादी ने 12 दिसंबर 2019 को पंजीकृत वसीयत की थी। इसी आधार पर आवेदन को समय सीमा से बाहर बताते हुए खारिज करने की मांग की गई।
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दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद अदालत ने माना कि मुकदमे के उचित निपटारे के लिए दिवंगत प्रतिवादी के कानूनी वारिसों को पक्षकार बनाना आवश्यक है। इसके बाद अदालत ने देरी माफ करते हुए वारिसों को रिकॉर्ड पर लाने की अर्जी मंजूर कर ली। अब कानूनी वारिसों को नोटिस जारी किए जाएंगे और मामले की सुनवाई 30 दिसंबर 2026 को होगी।