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Bilaspur News: चेक बाउंस मामले में एक साल की कैद, 3.25 लाख रुपये मुआवजे के आदेश
Fri, 30 Oct 2026 12:06 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Fri, 30 Oct 2026 12:06 AM IST
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अदालत-1
ज्योति सहकारी समिति से लिया था दो लाख रुपये का ऋण, शिलाई अदालत ने सुनाया फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी विकास कपूर की अदालत ने चेक बाउंस मामले में प्रताप सिंह को एक साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी को ज्योति सहकारी समिति को 3.25 लाख रुपये मुआवजा देने के आदेश भी दिए हैं। मुआवजा न देने पर उसे दो महीने का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
समिति के अनुसार, प्रताप सिंह ने 24 अगस्त, 2022 को दो लाख रुपये का ऋण लिया था। किस्तें नियमित रूप से जमा न करने पर 31 जनवरी, 2024 तक ब्याज सहित बकाया राशि 2,52,545 रुपये हो गई। भुगतान के लिए जारी चेक बैंक खाते में पर्याप्त राशि न होने के कारण बाउंस हो गया। कानूनी नोटिस के बावजूद निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं किया गया।
सुनवाई के दौरान प्रताप सिंह ने ऋण लेने की बात स्वीकार की, लेकिन दावा किया कि वह तीन से चार किस्तें जमा कर चुका था और चेक सुरक्षा के तौर पर दिया गया था। हालांकि, वह अपने बचाव में कोई साक्ष्य पेश नहीं कर सका।
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अदालत ने चेक बाउंस और कानूनी नोटिस की तामील से जुड़े साक्ष्यों के आधार पर उसे परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।
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ज्योति सहकारी समिति से लिया था दो लाख रुपये का ऋण, शिलाई अदालत ने सुनाया फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी विकास कपूर की अदालत ने चेक बाउंस मामले में प्रताप सिंह को एक साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी को ज्योति सहकारी समिति को 3.25 लाख रुपये मुआवजा देने के आदेश भी दिए हैं। मुआवजा न देने पर उसे दो महीने का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
समिति के अनुसार, प्रताप सिंह ने 24 अगस्त, 2022 को दो लाख रुपये का ऋण लिया था। किस्तें नियमित रूप से जमा न करने पर 31 जनवरी, 2024 तक ब्याज सहित बकाया राशि 2,52,545 रुपये हो गई। भुगतान के लिए जारी चेक बैंक खाते में पर्याप्त राशि न होने के कारण बाउंस हो गया। कानूनी नोटिस के बावजूद निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं किया गया।
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सुनवाई के दौरान प्रताप सिंह ने ऋण लेने की बात स्वीकार की, लेकिन दावा किया कि वह तीन से चार किस्तें जमा कर चुका था और चेक सुरक्षा के तौर पर दिया गया था। हालांकि, वह अपने बचाव में कोई साक्ष्य पेश नहीं कर सका।
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अदालत ने चेक बाउंस और कानूनी नोटिस की तामील से जुड़े साक्ष्यों के आधार पर उसे परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।