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Bilaspur News: सड़क हादसे के घायल को 5.39 लाख मुआवजा देने का आदेश

Wed, 07 Oct 2026 11:55 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 07 Oct 2026 11:55 PM IST
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Order to pay Rs 5.39 lakh compensation to the injured in the road accident
बीमा कंपनी 45 दिन में 7.5 प्रतिशत ब्याज समेत जमा करेगी राशि
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-बाद में ट्रक मालिक से वसूलेगी,हादसे के समय ट्रक के पास नहीं था वैध परमिट
-व्यक्ति की जांघ, कंधे, श्रोणि की हड्डियों में हुए थे गंभीर फ्रैक्चर, 12 माह की आय का नुकसान भी माना

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। पुलाचड़ में वर्ष 2019 में हुए सड़क हादसे में घायल व्यक्ति को मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण-द्वितीय, बिलासपुर ने 5 लाख 39 हजार 290 रुपये मुआवजा देने के आदेश दिए हैं। अधिकरण ने बीमा कंपनी को मुआवजे की राशि पर 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित 45 दिन के भीतर जमा करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, हादसे के समय ट्रक के पास वैध परमिट नहीं होने के कारण बीमा कंपनी को मुआवजे की राशि ट्रक मालिक से वसूलने का अधिकार भी दिया गया है। अधिकरण के पीठासीन अधिकारी ने यह फैसला सुनाया।
मामले के अनुसार 25 अप्रैल 2019 को शाम करीब 6:15 बजे पंजाब निवासी परमवीर अपने दोस्तों के साथ टैक्सी में मनाली से पंजाब लौट रहा था। बिलासपुर जिले के पुलाचड़ के पास टैक्सी सड़क के कच्चे हिस्से में खड़ी की गई थी। इसी दौरान परमवीर लघुशंका के लिए सड़क के कच्चे हिस्से में गया। तभी पीछे से तेज गति से आए ट्रक नंबर एचपी-64ए-1989 ने उसे टक्कर मार दी। हादसे के बाद ट्रक चालक मौके से चला गया। परमवीर को उसके साथियों ने पहले नालागढ़ स्थित ईएसआई अस्पताल पहुंचाया। वहां से उसे पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया गया।
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हादसे के दिन ही स्वारघाट थाने में ट्रक चालक के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। दुर्घटना में परमवीर की जांघ की हड्डी, बाएं कंधे की हड्डी और श्रोणि की हड्डियों में गंभीर फ्रैक्चर हुए थे। घायल ने अधिकरण में दावा किया था कि गंभीर चोटों और लंबे उपचार के कारण वह काम नहीं कर पाया। इलाज, दवाइयों, आने-जाने, परिचर और विशेष आहार पर भी खर्च हुआ। उसने इन नुकसानों के लिए 50 लाख रुपये मुआवजे की मांग की थी।
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ट्रक मालिक और चालक ने दावे का विरोध करते हुए हादसे के लिए घायल को जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना था कि ट्रक के ब्रेक अचानक खराब हो गए थे और घायल सड़क पर आ गया था। अधिकरण ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। फैसले में कहा गया कि घायल के अचानक सड़क पर आने के दावे के समर्थन में कोई स्वतंत्र गवाह या विश्वसनीय साक्ष्य पेश नहीं किया गया। वहीं, ब्रेक फेल होने के दावे को साबित करने के लिए कोई यांत्रिक जांच रिपोर्ट, मरम्मत का रिकॉर्ड या मैकेनिक की गवाही भी प्रस्तुत नहीं की गई। घायल और उसके साथ यात्रा कर रहे प्रत्यक्षदर्शी की गवाही से साबित हुआ कि ट्रक पीछे से आया और सड़क के कच्चे हिस्से में खड़े घायल को टक्कर मारी।
अधिकरण ने घायल की मासिक आय 20 हजार रुपये आंकी। उसके नियोक्ता की गवाही, रोजगार प्रमाणपत्र और आयकर रिटर्न से आय की पुष्टि हुई। चोटों की गंभीरता और स्वस्थ होने में लगने वाले समय को देखते हुए अधिकरण ने 12 महीने की आय का नुकसान माना। इस मद में 2 लाख 40 हजार रुपये दिए गए। हालांकि, स्थायी दिव्यांगता का प्रमाणपत्र या भविष्य में कमाई की क्षमता घटने का कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं किया गया। इसलिए भविष्य की आय के नुकसान के लिए अलग से मुआवजा नहीं दिया गया।
अधिकरण ने चिकित्सा खर्च के लिए 46,290 रुपये, 12 महीने की आय के नुकसान के लिए 2.40 लाख रुपये, दर्द और पीड़ा के लिए 70 हजार रुपये, परिचर के खर्च के लिए 75 हजार रुपये, विशेष आहार के लिए 40 हजार रुपये, आने-जाने के खर्च के लिए 18 हजार रुपये और उपचार के दौरान सामान्य सुविधाओं से वंचित रहने के लिए 50 हजार रुपये मंजूर किए। इस तरह कुल मुआवजा 5 लाख 39 हजार 290 रुपये तय किया गया। बीमा कंपनी ने दावा किया था कि हादसे के समय ट्रक वैध परमिट के बिना चलाया जा रहा था।
अधिकरण ने पाया कि ट्रक का पंजीकरण प्रमाणपत्र, फिटनेस प्रमाणपत्र, चालक का लाइसेंस और बीमा पॉलिसी हादसे की तारीख पर वैध थे। हालांकि, ट्रक मालिक को अवसर दिए जाने के बावजूद 25 अप्रैल 2019 को प्रभावी परमिट पेश नहीं किया गया। ऐसे में अधिकरण ने माना कि वाहन का संचालन वैध परमिट के बिना किया जा रहा था और यह मोटर वाहन कानून तथा बीमा पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन था।

अधिकरण ने स्पष्ट किया कि परमिट नहीं होने के कारण हादसे में घायल तीसरे पक्ष को मुआवजे से वंचित नहीं किया जा सकता। इसलिए इंश्योरेंस कंपनी को मुआवजे की पूरी राशि 7.5 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज सहित 45 दिन के भीतर जमा करने के आदेश दिए गए हैं। भुगतान के बाद बीमा कंपनी को यह रकम ट्रक की मालिक से कानून के अनुसार वसूलने का अधिकार होगा।
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