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Bilaspur News: निजी होटल के पास प्रस्तावित फुटब्रिज का विरोध, स्कूल के समीप बनाने की मांग
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कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन। संवाद
धराड़सानी में प्रस्तावित स्थान को लेकर ग्रामीणों का विरोध, 100 मीटर आगे शिफ्ट करने की अपील
कहा-जहां अधिक आवाजाही, वहीं मिले सुरक्षा सुविधा
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन परियोजना के तहत मौजा धराड़सानी में प्रस्तावित फुटब्रिज के निर्माण स्थल को लेकर ग्रामीणों ने विरोध जताया है। फुटब्रिज ऐसे स्थान पर प्रस्तावित किया जा रहा है, जहां इसका लाभ सीमित लोगों को मिलेगा। यदि इसे मिडल स्कूल के समीप बनाया जाए तो स्कूल आने-जाने वाले विद्यार्थियों के साथ-साथ पूरे गांव और आसपास के लोगों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सकेगी।
फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के सदस्यों और का कहना है कि वर्तमान में फुटब्रिज एक निजी होटल के पास प्रस्तावित है। उनके अनुसार वहां केवल कुछ मकान हैं और फुटब्रिज बनने से आम लोगों को अपेक्षित लाभ नहीं मिलेगा। जिस स्थान पर मिडल स्कूल स्थित है, वहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में विद्यार्थी, अभिभावक और ग्रामीण सड़क पार करते हैं। ऐसे में फुटब्रिज की सबसे अधिक आवश्यकता वहीं है। ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रस्तावित फुटब्रिज को मौजूदा स्थान से करीब 100 मीटर आगे डमली पंचायत की ओर, मिडल स्कूल के समीप स्थानांतरित किया जाए। उन्होंंने कहा कि फोरलेन परियोजना के तहत जन सुविधाओं का निर्धारण स्थानीय आवश्यकताओं के आधार पर होना चाहिए। उनका कहना है कि जिस स्थान पर लोगों की आवाजाही अधिक है, वहां सुरक्षा संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराना परियोजना का उद्देश्य होना चाहिए। ग्रामीणों ने मौजा पलथी का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी पहले इसी तरह की स्थिति बनी थी। उनके अनुसार सर्वे लगभग 100 मीटर पीछे किया गया था, लेकिन निर्माण एक मकान के सामने कर दिया गया। उनका कहना है कि अब मौजा धराड़सानी में भी उसी प्रकार की प्रक्रिया दोहराई जा रही है, जिससे लोगों में असंतोष है।
फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के महासचिव मदन लाल शर्मा ने प्रशासन से मांग की है कि फुटब्रिज के प्रस्तावित स्थान का दोबारा निरीक्षण कराया जाए और स्थानीय लोगों, पंचायत प्रतिनिधियों तथा स्कूल प्रबंधन की राय लेकर अंतिम निर्णय लिया जाए। समिति का कहना है कि परियोजना का उद्देश्य केवल निर्माण करना नहीं, बल्कि ऐसी सुविधाएं उपलब्ध कराना होना चाहिए जिनका लाभ अधिक से अधिक लोगों को मिले। समिति ने बताया कि कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन परियोजना में फुटब्रिज, अंडरपास, फुटपाथ और यू-टर्न जैसे जनहित के मुद्दों को लेकर न्यायालय में पहले से जनहित याचिका लंबित है। समिति के अनुसार याचिका में नौ फुटब्रिजों के निर्माण की पुष्टि हो चुकी है, जबकि अन्य मांगों पर सुनवाई जारी है। समिति ने उम्मीद जताई कि प्रशासन और संबंधित एजेंसियां स्थानीय लोगों की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उचित निर्णय लेंगी।
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कहा-जहां अधिक आवाजाही, वहीं मिले सुरक्षा सुविधा
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन परियोजना के तहत मौजा धराड़सानी में प्रस्तावित फुटब्रिज के निर्माण स्थल को लेकर ग्रामीणों ने विरोध जताया है। फुटब्रिज ऐसे स्थान पर प्रस्तावित किया जा रहा है, जहां इसका लाभ सीमित लोगों को मिलेगा। यदि इसे मिडल स्कूल के समीप बनाया जाए तो स्कूल आने-जाने वाले विद्यार्थियों के साथ-साथ पूरे गांव और आसपास के लोगों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सकेगी।
फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के सदस्यों और का कहना है कि वर्तमान में फुटब्रिज एक निजी होटल के पास प्रस्तावित है। उनके अनुसार वहां केवल कुछ मकान हैं और फुटब्रिज बनने से आम लोगों को अपेक्षित लाभ नहीं मिलेगा। जिस स्थान पर मिडल स्कूल स्थित है, वहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में विद्यार्थी, अभिभावक और ग्रामीण सड़क पार करते हैं। ऐसे में फुटब्रिज की सबसे अधिक आवश्यकता वहीं है। ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रस्तावित फुटब्रिज को मौजूदा स्थान से करीब 100 मीटर आगे डमली पंचायत की ओर, मिडल स्कूल के समीप स्थानांतरित किया जाए। उन्होंंने कहा कि फोरलेन परियोजना के तहत जन सुविधाओं का निर्धारण स्थानीय आवश्यकताओं के आधार पर होना चाहिए। उनका कहना है कि जिस स्थान पर लोगों की आवाजाही अधिक है, वहां सुरक्षा संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराना परियोजना का उद्देश्य होना चाहिए। ग्रामीणों ने मौजा पलथी का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी पहले इसी तरह की स्थिति बनी थी। उनके अनुसार सर्वे लगभग 100 मीटर पीछे किया गया था, लेकिन निर्माण एक मकान के सामने कर दिया गया। उनका कहना है कि अब मौजा धराड़सानी में भी उसी प्रकार की प्रक्रिया दोहराई जा रही है, जिससे लोगों में असंतोष है।
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फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के महासचिव मदन लाल शर्मा ने प्रशासन से मांग की है कि फुटब्रिज के प्रस्तावित स्थान का दोबारा निरीक्षण कराया जाए और स्थानीय लोगों, पंचायत प्रतिनिधियों तथा स्कूल प्रबंधन की राय लेकर अंतिम निर्णय लिया जाए। समिति का कहना है कि परियोजना का उद्देश्य केवल निर्माण करना नहीं, बल्कि ऐसी सुविधाएं उपलब्ध कराना होना चाहिए जिनका लाभ अधिक से अधिक लोगों को मिले। समिति ने बताया कि कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन परियोजना में फुटब्रिज, अंडरपास, फुटपाथ और यू-टर्न जैसे जनहित के मुद्दों को लेकर न्यायालय में पहले से जनहित याचिका लंबित है। समिति के अनुसार याचिका में नौ फुटब्रिजों के निर्माण की पुष्टि हो चुकी है, जबकि अन्य मांगों पर सुनवाई जारी है। समिति ने उम्मीद जताई कि प्रशासन और संबंधित एजेंसियां स्थानीय लोगों की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उचित निर्णय लेंगी।
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