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सदाचार से ही समाज और भगवान का प्रिय बनता है मनुष्य : आचार्य चमन
Fri, 01 Aug 2025 11:41 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Fri, 01 Aug 2025 11:41 PM IST
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श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर बिलासपुर में श्रीमद भागवत कथा का श्रवण करते श्रद्धालु। संवाद
भक्तिज्ञान, वैराग्य, योग और धर्म का कथा में दिया ज्ञान
श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर बिलासपुर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर बिलासपुर में सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा में आचार्य चमन शर्मा ने श्रोताओं को भावपूर्ण शैली में बताया कि कथा का मूल मंत्र सदाचार है, जो व्यक्ति सदाचार को अपने जीवन में अपनाता है, वह समाज और भगवान दोनों का प्रिय बनता है।
उन्होंने कहा कि कथा में भक्तिज्ञान, वैराग्य, ज्ञान योग, कर्म योग, समाज धर्म, स्त्रीधर्म और राजनीति जैसे अनेक महत्वपूर्ण विषय समाहित हैं। कहा कि श्रीमद् भागवत कथा का पाठ करने के लिए संकल्प लेना आवश्यक है। यह कथा अक्सर सामाजिक रूप में होती है ताकि लोगों में एकता व आपसी भाईचारा बढ़े। कथा न केवल मन को शांति प्रदान करती है बल्कि मोक्षदायिनी भी मानी जाती है। आचार्य ने श्रोताओं को बताया कि श्रीमद् भागवत कथा सबसे पहले भगवान नारायण ने ब्रह्मा जी को सुनाई थी। इसके बाद ब्रह्मा जी ने नारद जी को, नारद जी ने सनकादिक ऋषियों को और फिर सूत जी ने महाराज परीक्षित को यह कथा सुनाई। इसके पश्चात यह कथा पूरे संसार में प्रचलित हुई। उन्होंने कहा कि आज के समय में श्रीमद् भागवत कथा अत्यंत प्रासंगिक है और इसके श्रवण से मानवीय मूल्यों का उत्थान होता है। यह आयोजन संजीवन शर्मा और उनके भाई राजेश शर्मा द्वारा करवाया जा रहा है।
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श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर बिलासपुर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर बिलासपुर में सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा में आचार्य चमन शर्मा ने श्रोताओं को भावपूर्ण शैली में बताया कि कथा का मूल मंत्र सदाचार है, जो व्यक्ति सदाचार को अपने जीवन में अपनाता है, वह समाज और भगवान दोनों का प्रिय बनता है।
उन्होंने कहा कि कथा में भक्तिज्ञान, वैराग्य, ज्ञान योग, कर्म योग, समाज धर्म, स्त्रीधर्म और राजनीति जैसे अनेक महत्वपूर्ण विषय समाहित हैं। कहा कि श्रीमद् भागवत कथा का पाठ करने के लिए संकल्प लेना आवश्यक है। यह कथा अक्सर सामाजिक रूप में होती है ताकि लोगों में एकता व आपसी भाईचारा बढ़े। कथा न केवल मन को शांति प्रदान करती है बल्कि मोक्षदायिनी भी मानी जाती है। आचार्य ने श्रोताओं को बताया कि श्रीमद् भागवत कथा सबसे पहले भगवान नारायण ने ब्रह्मा जी को सुनाई थी। इसके बाद ब्रह्मा जी ने नारद जी को, नारद जी ने सनकादिक ऋषियों को और फिर सूत जी ने महाराज परीक्षित को यह कथा सुनाई। इसके पश्चात यह कथा पूरे संसार में प्रचलित हुई। उन्होंने कहा कि आज के समय में श्रीमद् भागवत कथा अत्यंत प्रासंगिक है और इसके श्रवण से मानवीय मूल्यों का उत्थान होता है। यह आयोजन संजीवन शर्मा और उनके भाई राजेश शर्मा द्वारा करवाया जा रहा है।
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