संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। बाबा विश्वकर्मा मंदिर में चल रही राम कथा में आचार्य नीरज शर्मा ने गुरु और शिष्य के पवित्र एवं आध्यात्मिक रिश्ते का वर्णन करते हुए शबरी और उनके गुरु मतंग ऋषि का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि सच्ची भक्ति, गुरु के प्रति श्रद्धा और निरंतर साधना से प्रभु की प्राप्ति संभव है।
आचार्य नीरज शर्मा ने बताया कि जब शबरी बाल अवस्था में मतंग ऋषि के आश्रम में रहती थीं, तब उनकी राम भक्ति से प्रसन्न होकर गुरु ने उन्हें आशीर्वाद दिया था कि एक दिन प्रभु श्रीराम स्वयं उनसे मिलने आएंगे। उन्होंने कहा कि मतंग ऋषि जब शबरी को गुरु मंत्र देते थे तो वह कुछ समय बाद उसे भूल जाती थीं। अगले दिन फिर गुरु के पास जाकर मंत्र दोबारा बताने का आग्रह करती थीं। कई प्रयासों के बाद भी जब शबरी मंत्र को याद नहीं रख पाईं तो मतंग ऋषि ने कहा कि जिस मंजीरे को वह प्रतिदिन बजाते हुए प्रभु का भजन करती हैं, वही उनके लिए गुरु मंत्र है। इसके बाद शबरी रोज मंजीरा-मंजीरा का जाप करने लगीं। आचार्य ने बताया कि उनकी सच्ची भक्ति में यही शब्द धीरे-धीरे राम-राम के भाव में बदल गया।