{"_id":"691f1627747be3c8b1012c35","slug":"now-claims-before-may-24-2025-will-not-be-rejected-bilaspur-news-c-92-1-ssml1001-148734-2025-11-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bilaspur News: अब 24 मई 2025 से पहले के क्लेम नहीं होंगे खारिज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bilaspur News: अब 24 मई 2025 से पहले के क्लेम नहीं होंगे खारिज
Thu, 20 Nov 2025 11:50 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Thu, 20 Nov 2025 11:50 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हाई कोर्ट की फटकार के बाद राहत:
श्रम कल्याण अधिकारियों की गलत व्याख्या से भटकते रहे कामगार
अधिसूचना का गलत मतलब निकाल कर रोक दिए थे क्लेम, अब बोर्ड सचिव ने दिए नए निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण श्रम कल्याण बोर्ड में पंजीकृत हजारों मजदूरों को बड़ी राहत मिली है। उच्च न्यायालय की सख्त टिप्पणियों के बाद बोर्ड सचिव ने साफ कर दिया है कि 24 मई 2025 से पहले के सभी क्लेम स्वीकार किए जाएंगे।
अब इन क्लेमों पर नई अधिसूचना लागू नहीं होगी और कामगारों को परेशान करने पर अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। श्रम एवं रोजगार विभाग ने 24 मई 2025 को अधिसूचना जारी करते हुए स्पष्ट किया था कि घटनाक्रम या लाभ की अवधि समाप्त होने के छह माह के भीतर क्लेम लगाया जाए। लेकिन श्रम कल्याण अधिकारियों ने इसका गलत अर्थ निकालते हुए 24 मई 2025 से पहले के हजारों क्लेम लेने ही बंद कर दिए। इससे कामगारों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा और कई मजदूरों को मजबूर होकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। हाईकोर्ट ने पूछा कि पुराने क्लेम क्यों रोके? मजदूरों को जागरूक क्यों नहीं किया? 8 सितंबर 2025 को हाई कोर्ट ने बोर्ड सचिव से सख्त लहजे में पूछा था कि अधिसूचना लागू करने से पहले मजदूरों को जागरूक क्यों नहीं किया गया? 24 मई 2025 से पहले के क्लेमों पर रोक लगाने का आदेश किस आधार पर था? 17 नवंबर को जारी पत्र में बोर्ड सचिव ने सभी श्रम कल्याण अधिकारियों को निर्देश दिया है कि 24 मई 2025 से पहले के सभी क्लेम बिना रोक-टोक स्वीकार किए जाएं। अधिसूचना पूर्व प्रभाव से लागू नहीं होगी। मजदूरों को अनावश्यक रूप से तंग न किया जाए, ताकि उन्हें अदालतों में न जाना पड़े।
इंटक अध्यक्ष रूप सिंह ठाकुर, उपाध्यक्ष धर्म सिंह सहगल और महासचिव जगतार सिंह बैंस ने संयुक्त बयान में कहा कि श्रम कल्याण अधिकारियों के पास कानूनी समझ कमजोर है और इन्हीं की गलतियों के कारण मजदूर भटक रहे हैं। श्रम कल्याण अधिकारियों को श्रम अधिकारियों के अधीन लाया जाए, ताकि कानूनी प्रक्रियाएं सही ढंग से चल सके। इंटक इन अधिकारियों की कार्यप्रणाली की सूची मुख्यमंत्री को भेजेगा। कोर्ट केसों में खर्च की गई राशि भी श्रम कल्याण अधिकारियों से वसूली जाए। इंटक पदाधिकारियों ने कहा कि सरकार को इस मामले में कड़े कदम उठाने होंगे ताकि मजदूरों को उनका हक समय पर मिले और श्रम कल्याण बोर्ड की कार्यप्रणाली पारदर्शी हो।
विज्ञापन
विज्ञापन
श्रम कल्याण अधिकारियों की गलत व्याख्या से भटकते रहे कामगार
अधिसूचना का गलत मतलब निकाल कर रोक दिए थे क्लेम, अब बोर्ड सचिव ने दिए नए निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण श्रम कल्याण बोर्ड में पंजीकृत हजारों मजदूरों को बड़ी राहत मिली है। उच्च न्यायालय की सख्त टिप्पणियों के बाद बोर्ड सचिव ने साफ कर दिया है कि 24 मई 2025 से पहले के सभी क्लेम स्वीकार किए जाएंगे।
अब इन क्लेमों पर नई अधिसूचना लागू नहीं होगी और कामगारों को परेशान करने पर अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। श्रम एवं रोजगार विभाग ने 24 मई 2025 को अधिसूचना जारी करते हुए स्पष्ट किया था कि घटनाक्रम या लाभ की अवधि समाप्त होने के छह माह के भीतर क्लेम लगाया जाए। लेकिन श्रम कल्याण अधिकारियों ने इसका गलत अर्थ निकालते हुए 24 मई 2025 से पहले के हजारों क्लेम लेने ही बंद कर दिए। इससे कामगारों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा और कई मजदूरों को मजबूर होकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। हाईकोर्ट ने पूछा कि पुराने क्लेम क्यों रोके? मजदूरों को जागरूक क्यों नहीं किया? 8 सितंबर 2025 को हाई कोर्ट ने बोर्ड सचिव से सख्त लहजे में पूछा था कि अधिसूचना लागू करने से पहले मजदूरों को जागरूक क्यों नहीं किया गया? 24 मई 2025 से पहले के क्लेमों पर रोक लगाने का आदेश किस आधार पर था? 17 नवंबर को जारी पत्र में बोर्ड सचिव ने सभी श्रम कल्याण अधिकारियों को निर्देश दिया है कि 24 मई 2025 से पहले के सभी क्लेम बिना रोक-टोक स्वीकार किए जाएं। अधिसूचना पूर्व प्रभाव से लागू नहीं होगी। मजदूरों को अनावश्यक रूप से तंग न किया जाए, ताकि उन्हें अदालतों में न जाना पड़े।
विज्ञापन
इंटक अध्यक्ष रूप सिंह ठाकुर, उपाध्यक्ष धर्म सिंह सहगल और महासचिव जगतार सिंह बैंस ने संयुक्त बयान में कहा कि श्रम कल्याण अधिकारियों के पास कानूनी समझ कमजोर है और इन्हीं की गलतियों के कारण मजदूर भटक रहे हैं। श्रम कल्याण अधिकारियों को श्रम अधिकारियों के अधीन लाया जाए, ताकि कानूनी प्रक्रियाएं सही ढंग से चल सके। इंटक इन अधिकारियों की कार्यप्रणाली की सूची मुख्यमंत्री को भेजेगा। कोर्ट केसों में खर्च की गई राशि भी श्रम कल्याण अधिकारियों से वसूली जाए। इंटक पदाधिकारियों ने कहा कि सरकार को इस मामले में कड़े कदम उठाने होंगे ताकि मजदूरों को उनका हक समय पर मिले और श्रम कल्याण बोर्ड की कार्यप्रणाली पारदर्शी हो।
विज्ञापन