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निजी क्लीनिकों व अस्पतालों को प्रोमोट करने का साधन बना जिला अस्पताल

Mon, 20 Dec 2021 11:15 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 20 Dec 2021 11:15 PM IST
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no ultra sound facility in district hospital bilaspur woman and others people facing  problen
no ultra sound facility in district hospital bilaspur woman and others people facing problen
बिलासपुर। जिला अस्पताल बिलासपुर में एक साल से रेडियोलॉजिस्ट का पद खाली है। अल्ट्रासाउंड की सुविधा ठप पड़ी है। अल्ट्रासाउंड के लिए जिला अस्पताल आने वाले मरीजों को निजी क्लीनिकों या अस्पतालों की दौड़ लगानी पड़ रही है।
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कोरोना काल में कुछ समय के लिए एम्स के रेडियोलॉजिस्ट ने जिला अस्पताल में ड्यूटी दी थी। लेकिन, एम्स की ओपीडी शुरू होने के बाद इस अस्थायी व्यवस्था पर भी विराम लग गया। जिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट से जुड़ी सेवाएं फिर से भगवान भरोसे हो गई है। हालात यह है कि आर्थिक रूप से कमजोर लोग भी अल्ट्रासाउंड के लिए निजी क्लीनिकों में भारी भरकम फीस देने को मजबूर हैं।
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निजी क्लीनिक मनमाने रेट वसूल रहे हैं। इन हालातों में जिला अस्पताल ही बिलासपुर में निजी क्लीनिकों व अस्पतालों को बढ़ावा देता दिख रहा है। हमारे संवाददाता ने जिला अस्पताल का दौरा कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। पेश है लाइव रिपोर्ट।
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दिन: सोमवार। समय: सुबह 10. 05। अस्पताल की ओपीडी में पर्ची बनवाने के लिए लंबी लाइन लगी है। पर्ची बनाने वाले मरीज नियमानुसार कोरोना टेस्ट की जांच के लिए जा रहे हैं। समय: 10.50 पर कोरोना टेस्ट के लिए महिलाएं व अन्य लोग लाइनों में लगे हैं। इधर टेस्ट की प्रक्रिया जारी थी तो उधर गायनी ओपीडी के बाहर 11 बजे तक भीड़ बढ़ गई। ओपीडी के बाहर बैठे सुरक्षा कर्मी ने महिलाओं को लाइनों में लगाकर अपनी बारी का इंतजार करने को कहा। 11:56 मिनट पर करीब 60 महिलाएं लाइनों में खड़ी थीं। दोपहर 12 बजे तक लाइनों में लगी गर्भवती महिलाओं व अन्य मरीजों की संख्या 80 तक पहुंच गई। करीब एक बजे के बाद मरीजों की संख्या में कमी आई।
इस दौरान अल्ट्रासाउंड के लिए आए मरीज इधर-उधर दौड़ते दिखे। गर्भवती महिलाएं भी निजी क्लीनिक में अल्ट्रासाउंड के लिए जाती रहीं। निजी क्लिनिकों का नजारा यह दिखा कि कई मरीजों को कल की डेट देकर बैरंग लौटा दिया गया। टोकन संख्या पूरी हो जाने का हवाला देते हुए उन्हें अब अगले दिन ही अल्ट्रासाउंड होने की बात कही गई।
इनसेट
उपचार कराने आई ज्योति के अनुसार उन्हें 25 किलोमीटर दूर से अस्पताल आना पड़ता है। वो 4 बार अस्पताल आ चुकी हैं। 2 बार अल्ट्रासाउंड करवाया। जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की कोई सुविधा नहीं है। चेकअप के बाद जब अल्ट्रासाउंड करवाने की बारी आती है तो अस्पताल से ऑटो करके निजी क्लीनिक जाना पड़ता। निजी क्लीनिक ज्यादा पैसे वसूलते हैं। उन्होंने बताया कि पहली बार उन्होंने अल्ट्रासाउंड का 1000 और दूसरी बार 2500 रुपये दिया है। उन्होंने बताया कि सोमवार सुबह 10 बजे वह अस्पताल आई गई थीं। 12:45 बजे तक भी उनकी बारी नहीं आई है।
इस बार भी अल्ट्रासाउंड के लिए कहा है। अब निजी क्लिनिक को 2500 रुपये फीस के देने पड़ेंगे। कहा कि सरकारी अस्पताल में भी उपचार कराने के लिए इतने पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं तो इससे अच्छा निजी अस्पताल जाना बेहतर होगा। सुबह से शाम तक इंतजार करना पड़ा, अब बिना अल्ट्रासाउंड करवाए वापस जाना पड़ रहा है।
इनसेट
जिला अस्पताल में निजी क्लीनिकों की ओर से गर्भवती महिलाओं के लिए अल्ट्रासाउंड को लेकर बोर्ड लगाया है। जिसमें लिखा गया है कि गर्भवती महिलाओं के लिए लेवल वन का अल्ट्रासाउंड फ्री में होता है। निजी क्लीनिकों के यह बोर्ड अपने आप में सवाल खड़े कर रहे हैं। साफ है कि जिला अस्पताल में ही निजी क्लिनिकों को बढ़ावा देने का काम हो रहा है।

इनसेट
जिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट व एमडी का पद खाली रहना कई सवाल पैदा करता है। इन्हीं दो विभागों में सबसे ज्यादा स्वास्थ्य सेवाओं का दबाव है। जिला अस्पताल में एमडी और रेडियोलॉजिस्ट के पद खाली होने का सीधा फायदा निजी अस्पतालों को मिल रहा है। अगर जिला अस्पताल में सेवाएं बेहतर होंगी तो आमजन को निजी अस्पतालों का रुख नहीं करना पड़ेगा और इनकी मनमानी पर लगाम लगेगी।
कुलदीप ठाकुर, समाजसेवी
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