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गोविंद सागर झील से पकड़ी नौ मीट्रिक टन मछली
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बिलासपुर। हिमाचल के जलाशयों में शुमार गोविंद सागर झील में मछली का रिकार्ड उत्पादन दर्ज किया गया है। शासन स्तर से 16 अगस्त तक कोविड-19 के प्रतिबंध लगाने के बाद मछुआरों ने 9.3 मीट्रिक टन पकड़कर रिकार्ड कायम किया है। इनके अलावा कोलडैम, चमेरा, पौंग जलाश्य सहित रणजीत सागर से 10 मीट्रिक टन मछली का उत्पादन हुआ है।
बता दें कि इस कार्य में कुल 12 हजार से अधिक मछुआरे मछली आखेट में लगाए गए थे। इनमें वर्तमान में प्रदेश में 5 जलाशयों में गोविंद सागर, पौंग, चमेरा, कोलडैम एवं रणजीत सागर में 5300 से अधिक मछुआरे मछली पकड़ने का कार्य कर रहे हैं। जबकि प्रदेश के सामान्य जलों, ट्राऊट जलाशयों में 6 हजार से अधिक मछुआरे फेंकवा जाल के साथ मछली पकड़ने के कार्य में लगे हैं।
आंकड़ों के अनुसार मछली आखेट पर दो माह के प्रतिबंध के बाद 16 अगस्त को गोविंद सागर जलाशय से 9.03 टन, कोलडैम से 264 किलो, पौंग जलाश्य में 7.2 टन तथा चमेरा व रणजीत सागर से 2.1 टन मछली पकड़ी गई। निदेशक एवं प्रारक्षी मत्स्य सतपाल मेहता ने बताया कि इतने विशाल मानव निर्मित जलाशयों की सघन निगरानी करना विभाग के लिए चुनौती से कम नहीं है। परंतु मत्स्य विभाग इस चुनौती के समाधान के लिए प्रतिवर्ष सामान्य जलों में दो माह के लिए मछली पकड़ने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाता है। क्योंकि इस अवधि के दौरान अधिकतर महत्वपूर्ण प्रजातियों की मछलियां प्राकृतिक प्रजनन करती हैं। जिससे इन जलों में स्वत मछली बीज संग्रहण हो जाता है।
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उन्होंने बताया कि इस बार विभाग द्वारा 16 जून से 15 अगस्त तक मछली आखेट बंद सीजन का कार्यान्वयन किया गया। उन्होंने बताया कि इस बार विभाग ने 35 लाख के करीब 70 एमएम आकार से अधिक का मत्स्य बीज इन जलाशयों में संग्रहित किया था। दो माह के बंद के बाद बढ़े मत्स्य उत्पादन से विभाग के साथ-साथ मछुआरों का मनोबल भी बढ़ा है।
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बता दें कि इस कार्य में कुल 12 हजार से अधिक मछुआरे मछली आखेट में लगाए गए थे। इनमें वर्तमान में प्रदेश में 5 जलाशयों में गोविंद सागर, पौंग, चमेरा, कोलडैम एवं रणजीत सागर में 5300 से अधिक मछुआरे मछली पकड़ने का कार्य कर रहे हैं। जबकि प्रदेश के सामान्य जलों, ट्राऊट जलाशयों में 6 हजार से अधिक मछुआरे फेंकवा जाल के साथ मछली पकड़ने के कार्य में लगे हैं।
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आंकड़ों के अनुसार मछली आखेट पर दो माह के प्रतिबंध के बाद 16 अगस्त को गोविंद सागर जलाशय से 9.03 टन, कोलडैम से 264 किलो, पौंग जलाश्य में 7.2 टन तथा चमेरा व रणजीत सागर से 2.1 टन मछली पकड़ी गई। निदेशक एवं प्रारक्षी मत्स्य सतपाल मेहता ने बताया कि इतने विशाल मानव निर्मित जलाशयों की सघन निगरानी करना विभाग के लिए चुनौती से कम नहीं है। परंतु मत्स्य विभाग इस चुनौती के समाधान के लिए प्रतिवर्ष सामान्य जलों में दो माह के लिए मछली पकड़ने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाता है। क्योंकि इस अवधि के दौरान अधिकतर महत्वपूर्ण प्रजातियों की मछलियां प्राकृतिक प्रजनन करती हैं। जिससे इन जलों में स्वत मछली बीज संग्रहण हो जाता है।
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उन्होंने बताया कि इस बार विभाग द्वारा 16 जून से 15 अगस्त तक मछली आखेट बंद सीजन का कार्यान्वयन किया गया। उन्होंने बताया कि इस बार विभाग ने 35 लाख के करीब 70 एमएम आकार से अधिक का मत्स्य बीज इन जलाशयों में संग्रहित किया था। दो माह के बंद के बाद बढ़े मत्स्य उत्पादन से विभाग के साथ-साथ मछुआरों का मनोबल भी बढ़ा है।