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मंगरोट हाईवे विवाद : व्यक्ति ने लगाया अधिशासी अभियंता पर रिश्वत मांगने का आरोप
Thu, 10 Aug 2023 11:31 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Thu, 10 Aug 2023 11:31 PM IST
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बिलासपुर। शिमला-धर्मशाला राष्ट्रीय मार्ग पर मंगरोट में भूमि विवाद अब रिश्वत मांगने के आरोप तक पहुंच गया है। मार्ग की भूमि पर अपना दावा करने वाले व्यक्ति ने लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता पर जमीन के बदले में मिलने वाले मुआवजे से 10 फीसदी कमीशन रिश्वत के रूप में मांगने का आरोप लगाया है। उधर, अधिशासी अभियंता ने आरोपों को झूठा बताते हुए कहा है कि वह व्यक्ति पर मानहानि का मुकदमा करेंगे।
मुख्यमंत्री संकल्प सेवा पर मंगरोट की सीता शर्मा की ओर से शिकायत दी गई है। सीता शर्मा के बेटे राजनकांत हाईवे की भूमि पर अपना दावा करते हैं। शिकायत में बताया है कि मंगरोट में सीता शर्मा के नाम 15 बिस्वा भूमि है, जिसमें से 8 बिस्वा भूमि पर लोक निर्माण विभाग ने सड़क बनाई है। इसको छोड़ने के लिए विभाग को पत्र भी लिखा था, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। मजबूरन एक अगस्त को हाईवे की भूमि पर सीमा शर्मा के बेटे राजनकांत को कब्जा करना पड़ा। कब्जा करने के बाद विभागीय अधिकारी आए और उन्हें वार्ता के लिए बुलाया। दो अगस्त को हुई वार्ता विफल रही। तीन अगस्त को फिर से हाईवे की भूमि पर पत्थर आदि लगाकर कब्जा कर लिया। इसके बाद लोक निर्माण विभाग बिलासपुर डिवीजन के अधिशासी अभियंता मनोहर लाल वहां आए। उन्होंने बिलासपुर शहर में उसे खोखा लगाने के लिए जमीन देने का आश्वासन दिया, जिस पर सड़क से कब्जा छोड़ दिया। मनोहर शर्मा ने राजनकांत को बुलाया और कहा कि दोबारा हाईवे की निशानदेही कराएंगे। निशानदेही में जितनी भी भूमि उसकी पाई जाएगी, उसका मुआवजा वह अदालत से ले सकता है। यदि अदालत नहीं जाना है तो मुआवजे का 10 फीसदी उसे देना पड़ेगा। जब 10 प्रतिशत देने से मना किया तो उन्होंने धमकाया कि इस बार में मनमर्जी से निशानदेही कराएंगे। जो थोड़ी बहुत जमीन है भी वह भी नहीं बचेगी। उधर, अधिशासी अभियंता मनोहर शर्मा ने बताया कि यह आरोप झूठे हैं। व्यक्ति के साथ वार्ता सभी के सामने हुई है। व्यक्ति की ओर से लगाए गए झूठे आरोपों से मान सम्मान को ठेस पहुंची है। व्यक्ति के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया जाएगा।
यह है मामला
पिछले साल दिसंबर में उच्च न्यायालय के आदेश पर मंगरोट में राजमार्ग के किनारे से राजन कांत शर्मा के खोखे को हटाया गया था। राजनकांत शर्मा ने तब राजमार्ग उसकी भूमि से होकर गुजरने का दावा कर उस पर खोखा खोला था। जिसे हटाने के लिए प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। राजनकांत ने मार्च में फिर से सड़क पर खोखा लगा दिया। तब प्रशासनिक अधिकारियों के निशानदेही करने के आश्वासन पर राजनकांत ने खोखा हटाया था। इसके बाद निशानदेही की गई, जिसमें राजमार्ग की आठ बिस्वा भूमि राजनकांत की मां सीता शर्मा के नाम निकली थी।
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मुख्यमंत्री संकल्प सेवा पर मंगरोट की सीता शर्मा की ओर से शिकायत दी गई है। सीता शर्मा के बेटे राजनकांत हाईवे की भूमि पर अपना दावा करते हैं। शिकायत में बताया है कि मंगरोट में सीता शर्मा के नाम 15 बिस्वा भूमि है, जिसमें से 8 बिस्वा भूमि पर लोक निर्माण विभाग ने सड़क बनाई है। इसको छोड़ने के लिए विभाग को पत्र भी लिखा था, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। मजबूरन एक अगस्त को हाईवे की भूमि पर सीमा शर्मा के बेटे राजनकांत को कब्जा करना पड़ा। कब्जा करने के बाद विभागीय अधिकारी आए और उन्हें वार्ता के लिए बुलाया। दो अगस्त को हुई वार्ता विफल रही। तीन अगस्त को फिर से हाईवे की भूमि पर पत्थर आदि लगाकर कब्जा कर लिया। इसके बाद लोक निर्माण विभाग बिलासपुर डिवीजन के अधिशासी अभियंता मनोहर लाल वहां आए। उन्होंने बिलासपुर शहर में उसे खोखा लगाने के लिए जमीन देने का आश्वासन दिया, जिस पर सड़क से कब्जा छोड़ दिया। मनोहर शर्मा ने राजनकांत को बुलाया और कहा कि दोबारा हाईवे की निशानदेही कराएंगे। निशानदेही में जितनी भी भूमि उसकी पाई जाएगी, उसका मुआवजा वह अदालत से ले सकता है। यदि अदालत नहीं जाना है तो मुआवजे का 10 फीसदी उसे देना पड़ेगा। जब 10 प्रतिशत देने से मना किया तो उन्होंने धमकाया कि इस बार में मनमर्जी से निशानदेही कराएंगे। जो थोड़ी बहुत जमीन है भी वह भी नहीं बचेगी। उधर, अधिशासी अभियंता मनोहर शर्मा ने बताया कि यह आरोप झूठे हैं। व्यक्ति के साथ वार्ता सभी के सामने हुई है। व्यक्ति की ओर से लगाए गए झूठे आरोपों से मान सम्मान को ठेस पहुंची है। व्यक्ति के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया जाएगा।
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यह है मामला
पिछले साल दिसंबर में उच्च न्यायालय के आदेश पर मंगरोट में राजमार्ग के किनारे से राजन कांत शर्मा के खोखे को हटाया गया था। राजनकांत शर्मा ने तब राजमार्ग उसकी भूमि से होकर गुजरने का दावा कर उस पर खोखा खोला था। जिसे हटाने के लिए प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। राजनकांत ने मार्च में फिर से सड़क पर खोखा लगा दिया। तब प्रशासनिक अधिकारियों के निशानदेही करने के आश्वासन पर राजनकांत ने खोखा हटाया था। इसके बाद निशानदेही की गई, जिसमें राजमार्ग की आठ बिस्वा भूमि राजनकांत की मां सीता शर्मा के नाम निकली थी।
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