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नौणी-भराड़ीघाट फोरलेन : केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने वन विभाग से मांगी रिपोर्ट

Thu, 17 Jul 2025 11:11 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Thu, 17 Jul 2025 11:11 PM IST
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Nauni-Bharadighat four lane: Union Environment Ministry sought report from Forest Department
बिना बुर्जियों के जारी कर दी है एनओसी, विवादों में आया फोरलेन
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सीमांकन की प्रक्रिया अधूरी, ग्रामीणों की जमीन गई पर अधिकार तय नहीं
लोगों की शिकायत के बाद वन विभाग ने शुरू की कार्रवाई


संवाद न्यूज एजेंसी

बिलासपुर। नौणी से भराड़ीघाट तक बन रही शिमला-मटौर फोरलेन परियोजना विवादों में आ गई है। इस बार मसला उस मूल प्रक्रिया को लेकर है, जो किसी भी अधिग्रहण से पहले जरूरी होती है सीमांकन यानी बुर्जियों की स्थापना। केंद्रीय मंत्रालय ने वन विभाग से इस बारे में रिपोर्ट मांगी है। इसमें विभाग को बताना होगा कि जिस भूमि का अधिग्रहण हुआ वहां पर बुर्जियां लगी हैं या नहीं।
इस फोरलेन परियोजना को लेकर फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति ने केंद्र सरकार को शिकायत भेजी थी। शिकायत में लिखा था कि नौणी से भराड़ीघाट तक बनने वाली इस परियोजना के दोनों ओर न तो बुर्जियां लगाई गईं और न ही तकनीकी तौर पर राइट ऑफ वे के आधार पर सीमांकन किया गया, फिर भी फोरलेन के लिए एनओसी जारी कर दी गई। शिकायत में कहा गया है कि नियमानुसार सड़क निर्माण से पहले भूमि का सीमांकन किया जाना जरूरी है। इसके तहत तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा बुर्जियां लगाई जाती हैं, जिनमें पिलर-टू-पिलर दूरी, बैक व फ्रंट बियरिंग जैसे बिंदु दर्ज होते हैं। इन्हीं के आधार पर यह तय होता है कि किसकी कितनी भूमि सड़क में जा रही है। लेकिन इस प्रोजेक्ट में न तो बुर्जियां लगाने के निशान दिए गए, न सीमांकन दिखाया गया और न ही ग्रामीणों को सूचित किया गया। लोगों की जमीन सड़क में चली गई, पर उन्हें अपनी जमीन के सीमांकन का ही पता नहीं है। शिकायत पर कार्रवाई करते हुए पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने प्रदेश सरकार को पत्र भेजा है। इस पत्र पर कार्रवाई करते हुए नोडल अधिकारी-सह अपर प्रधान मुख्य अरण्यपाल ने बिलासपुर वन सर्कल को निर्देश दिए हैं कि शिकायत के अनुसार, हाल की गाइडलाइंस, नियम और अधिनियमों के तहत कार्रवाई कर रिपोर्ट भेजी जाए। मंत्रालय ने इसकी पुष्टि पत्र संख्या 14-2/आईआरओ/एमआईएससी/2024 में की है।
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इनसेट
बुर्जियों की अनदेखी ही विवाद की जड़
परियोजना में बुर्जियों की स्थापना नहीं होना ही पूरे विवाद का मुख्य कारण है। बिना इनके स्पष्ट हुए यह तय नहीं हो सकता कि किस किसान की जमीन गई है, कितने पेड़ कटने हैं, और कौन-कौन से ढांचे प्रभावित हो रहे हैं। शिकायत में यह भी कहा गया है कि पेड़ों की गिनती, उनके मूल्यांकन, संरचनाओं की पहचान नियमों के अनुसार नहीं की गई है।
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