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Bilaspur News: मशरूम उत्पादन बना सकता है किसानों को आत्मनिर्भर

Fri, 20 Feb 2026 11:41 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Fri, 20 Feb 2026 11:41 PM IST
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Mushroom production can make farmers self-reliant
कृषि विज्ञान केंद्र बरठीं में मशरूम उत्पादन पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में मौजूद किसान। स
कम लागत में 50 हजार तक कमाई संभव
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बरठीं के कृषि विज्ञान केंद्र में प्रशिक्षण शिविर
100 से अधिक किसानों को एग्री-बिजनेस के गुर सिखाए
प्रशिक्षण के बाद किसानों को मुफ्त मशरूम किट, बीज, स्प्रे पंप बांटे

संवाद न्यूज एजेंसी
बरठीं (बिलासपुर)। किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र बरठीं में मशरूम उत्पादन पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम हुआ। यह कार्यक्रम भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद खुंब अनुसंधान निदेशालय चंबाघाट सोलन के सहयोग से आशीर्वाद संस्था शिमला की ओर से अनुसूचित जाति उप योजना के तहत आयोजित किया गया, जिसमें क्षेत्र के 100 से अधिक किसानों ने भाग लिया।

कार्यक्रम में भारतीय खुंब अनुसंधान केंद्र चंबाघाट के निदेशक डॉ. बीएल अत्री ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करते हुए कहा कि मशरूम उत्पादन किसानों के लिए तेजी से बढ़ता हुआ एग्री-बिजनेस है, जिससे कम समय में अच्छी आय प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने प्रशिक्षित किसानों से आह्वान किया कि वे अपने क्षेत्रों में अन्य किसानों और बागवानों को भी इस व्यवसाय के लिए प्रेरित करें, ताकि सामूहिक स्तर पर आय बढ़ाई जा सके। बताया कि हिमाचल प्रदेश की जलवायु मशरूम उत्पादन के लिए बेहद अनुकूल है और किसान इसका लाभ उठाकर स्वरोजगार के नए अवसर पैदा कर सकते हैं। मशरूम की खेती कम जगह और कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाला व्यवसाय है। एक छोटे 10×10 फुट के कमरे से भी किसान 30 से 50 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर सकते हैं, जबकि इसकी फसल 25 से 30 दिनों में तैयार हो जाती है। प्रशिक्षण के दौरान किसानों को बताया गया कि मशरूम बैग्स में उगाए जाते हैं, जिनके लिए गेहूं या धान के भूसे का उपयोग होता है। ताजा मशरूम बेचने के अलावा इसका पाउडर, अचार और अन्य वैल्यू एडेड उत्पाद बनाकर भी अधिक लाभ कमाया जा सकता है।
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उन्होंने कहा कि कम लागत और तेज उत्पादन के कारण यह व्यवसाय किसानों को आत्मनिर्भर बनाने का प्रभावी माध्यम बन सकता है। आशीर्वाद संस्था के प्रधान राजपाल खजूरिया ने बताया कि संस्था समय-समय पर इस प्रकार के प्रशिक्षण और जागरूकता शिविर चलाती है। ताकि सरकार की योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सके। कार्यक्रम के अंत में किसानों को मुफ्त मशरूम किट, बीज और स्प्रे पंप वितरित किए गए। इस अवसर पर प्रिंसिपल साइंटिस्ट श्वेत कमल, तकनीकी अधिकारी जीतराम चौहान, कृषि विज्ञान केंद्र बरठीं के वैज्ञानिक डॉ. गौरव, करण चंदेल, भूपेंद्र गुलेरिया, राम सिंह, मस्तराम, उपेंद्र, नरेंद्र, बलविंदर, राम प्रकाश, धर्म सिंह सहित अन्य किसान मौजूद रहे।
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