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Bilaspur News: मिशन दृष्टि शुरू, 50 बच्चों की आंखें जांचीं, दो में मिली समस्या

Tue, 01 Sep 2026 11:15 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 01 Sep 2026 11:15 PM IST
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'Mission Drishti' launched; eyes of 50 children examined, issues found in two.
मिशन दृष्टि बिलासपुर के तहत रौड़ा स्कूल में बच्चे की आंखे जांचते विशेषज्ञ। स्रोत: डीपीआरओ
अतिरिक्त उपायुक्त रुपिंदर कौर ने प्राथमिक पाठशाला रौड़ा से किया अभियान का शुभारंभ
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जिले के स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में होगी तीन से आठ साल के बच्चों की स्क्रीनिंग

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। बच्चों में दृष्टि संबंधी समस्याओं की समय पर पहचान और उपचार सुनिश्चित करने के लिए उपायुक्त राहुल कुमार की महत्वाकांक्षी पहल मिशन दृष्टि बिलासपुर का सोमवार को राजकीय प्राथमिक पाठशाला रौड़ा से विधिवत शुभारंभ हुआ। अतिरिक्त उपायुक्त रुपिंदर कौर ने अभियान की शुरुआत की।
पहले दिन स्वास्थ्य विभाग की टीम ने रौड़ा प्राथमिक पाठशाला और संबंधित आंगनबाड़ी केंद्र के 50 बच्चों की आंखों की जांच की। इनमें आंगनबाड़ी केंद्र के 12 बच्चों में कोई दृष्टि दोष नहीं मिला, जबकि प्राथमिक पाठशाला के 38 बच्चों में से दो में दृष्टि संबंधी समस्या सामने आई। अतिरिक्त उपायुक्त ने कहा कि कम उम्र में बच्चों की आंखों की समस्या का समय पर पता न चलने से उनकी पढ़ाई, सीखने की क्षमता और समग्र विकास प्रभावित हो सकता है। छोटे बच्चे अक्सर अपनी दृष्टि संबंधी परेशानी बता नहीं पाते। ऐसे में नियमित स्क्रीनिंग के माध्यम से समस्या की शुरुआती स्तर पर पहचान बेहद जरूरी है। समय पर उपचार और चश्मे की मदद से बच्चों की दृष्टि को बेहतर किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि मिशन के तहत 1 सितंबर 2026 से जिले के स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में तीन से आठ वर्ष की आयु के बच्चों की स्क्रीनिंग की जाएगी। प्रारंभिक जांच में स्नेलन चार्ट से विजन टेस्ट होगा। दृष्टि दोष पाए जाने पर ऑटो-रिफ्रैक्टर मशीन से आगे की जांच की जाएगी। इसके बाद जरूरत के अनुसार बच्चों को नेत्र रोग विशेषज्ञ के पास भेजा जाएगा और चश्मे की आवश्यकता होने पर चश्मा उपलब्ध करवाने की व्यवस्था की जाएगी। मुख्य चिकित्सा अधिकारी शशि दत्त शर्मा ने बताया कि अभियान को प्रभावी बनाने के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरकेबीएस) की टीमों को शामिल किया गया है। ये टीमें स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में जाकर बच्चों की स्क्रीनिंग करेंगी। वर्तमान में विभाग के पास एक ऑटो-रिफ्रैक्टर मशीन है। प्रशासन की ओर से अतिरिक्त मशीनें खरीदने की प्रक्रिया जारी है। योजना के अनुसार मशीनें उपलब्ध होने के बाद प्रत्येक ब्लॉक को एक-एक मशीन दी जाएगी। जब तक अतिरिक्त मशीनें उपलब्ध नहीं होतीं, तब तक मौजूदा मशीन को 15-15 दिन की शिफ्ट में अलग-अलग ब्लॉकों में भेजकर स्क्रीनिंग की जाएगी। मशीन के संचालन के लिए संबंधित टीमों को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। सदर ब्लॉक की आरकेबीएस टीम को प्रशिक्षण पहले ही दिया जा चुका है।
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पायलट चरण में भी सामने आए थे कई मामले

अधिकारियों के अनुसार मिशन के पायलट चरण में प्राथमिक विद्यालय डियारा और आंगनबाड़ी केंद्र और डीएवी स्कूल चंगर में बच्चों की स्क्रीनिंग की गई थी। डियारा में जांच किए गए 52 बच्चों में 11 बच्चों में दृष्टि संबंधी दोष पाया गया। वहीं, डीएवी स्कूल चंगर में करीब 100 बच्चों की जांच में लगभग 20 बच्चों में दृष्टि संबंधी समस्या या रिफ्रैक्टिव एरर के संकेत मिले। इन परिणामों ने कम उम्र में नियमित नेत्र जांच की आवश्यकता को स्पष्ट किया है।
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