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जब तक मांगों को नहीं माना तक नहीं चलेगी निजी बसें
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घुमारवीं(बिलासपुर)। प्राइवेट बस यूनियन के पूर्व जिला प्रधान अनिल कुमार मिंटू ने कहा कि जब तक सरकार प्राइवेट बस ऑपरेटरों की मांगों को नहीं मानती, तब तक बिलासपुर के साथ-साथ प्रदेश में कोई भी निजी ऑपरेटर अपनी बसों को नहीं चलाएगा। कोरोना के कारण लगे लॉकडाउन और कर्फ्यू के कारण करीब तीन महीने से निजी बसें खड़ी है। बैंकों की देनदारी बढ़ चुकी है तथा खड़ी बसों के कलपुर्जे भी जबाव दे चुके हैं। ऐसे में मुसीबत के मारे निजी बस ऑपरेटरों की समस्याओं की सुनवाई अगर सरकार नहीं करेगी तो बेबस ऑपरेटर कहां जाएंगे।
उन्होंने कहा कि रविवार को हिमाचल प्रदेश निजी बस ऑपरेटर संघ की एक बैठक वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से प्रदेश अध्यक्ष राजेश पराशर की अध्यक्षता में हुई। जिसमें सर्वसम्मति से यही निर्णय लिया गया कि जब तक प्रदेश सरकार उनकी जायज मांगों को नहीं मानती है, तब तक वे अपनी बसों को सड़कों पर नहीं ला पाएंगे। उन्होंने कहा कि अभी बिलासपुर में भी तीन चार ऑपरेटरों ने बसों को चलाने का प्रयास किया, लेकिन एक दो दिन में ही परिणाम सामने आ गए। सड़क या स्टेशन पर कोरोना के खौफ से कोई सवारी नहीं है। कहा कि बिलासपुर एचआरटीसी ने उत्तेजित होकर कई बस रूट ओपन कर दिए, लेकिन जब सवारियां नहीं मिली तो अधिकांश रूट बंद करने पड़े और चालक परिचालकों को घर भेजना पड़ा। दिन में लाखों कमाने वाला बिलासपुर बस डिपो हजारों में सिमट कर रह गया है। कहा कि मूलभूत सुविधाओं से लेस जब एचआरटीसी का यह हाल है तो प्राइवेट बस ऑपरेटरों को इस भट्टी में झोंकना जोखिम भरा है। उन्होंने कहा कि इसलिए सरकार को चाहिए कि वह निजी बस ऑपरेटरों की पदाधिकारियों के साथ सकारात्मक निर्णय ले तथा कोई न कोई रास्ता निकाले।
यदि कोविड-19 की सोशल डिस्टेंसिंग और अन्य गाइड लाइन को पूरा करना है तो निजी बस ऑपरेटर उस गाइडलाइन को पूरा करने के लिए तैयार हैं। जिसमें कि 60 प्रतिशत सवारियों के साथ बसें चलानी हैं, लेकिन जो 40 प्रतिशत सीटें बचती हैं। उसका किराया सब्सिडी के रूप में सरकार वहन करे तथा न्यूनतम किराये में वृद्धि करके कम से कम 10 किया जाए। इसके अतिरिक्त कोविड-19 के चलते पहले 5 किमी,10, 5 से 10 किमी तक 20 और 10 से 15 किलोमीटर तक 30 किराया निर्धारित करें। अतिरिक्त सामान्य किराएं में कम से कम 50 प्रतिशत की वृद्धि करें तभी हिमाचल प्रदेश की निजी बस ऑपरेटर अपनी बसों को चलाने में सक्षम होंगे तथा हिमाचल पथ परिवहन निगम की बसें भी तब फायदे में चल सकती है।
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उन्होंने कहा कि रविवार को हिमाचल प्रदेश निजी बस ऑपरेटर संघ की एक बैठक वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से प्रदेश अध्यक्ष राजेश पराशर की अध्यक्षता में हुई। जिसमें सर्वसम्मति से यही निर्णय लिया गया कि जब तक प्रदेश सरकार उनकी जायज मांगों को नहीं मानती है, तब तक वे अपनी बसों को सड़कों पर नहीं ला पाएंगे। उन्होंने कहा कि अभी बिलासपुर में भी तीन चार ऑपरेटरों ने बसों को चलाने का प्रयास किया, लेकिन एक दो दिन में ही परिणाम सामने आ गए। सड़क या स्टेशन पर कोरोना के खौफ से कोई सवारी नहीं है। कहा कि बिलासपुर एचआरटीसी ने उत्तेजित होकर कई बस रूट ओपन कर दिए, लेकिन जब सवारियां नहीं मिली तो अधिकांश रूट बंद करने पड़े और चालक परिचालकों को घर भेजना पड़ा। दिन में लाखों कमाने वाला बिलासपुर बस डिपो हजारों में सिमट कर रह गया है। कहा कि मूलभूत सुविधाओं से लेस जब एचआरटीसी का यह हाल है तो प्राइवेट बस ऑपरेटरों को इस भट्टी में झोंकना जोखिम भरा है। उन्होंने कहा कि इसलिए सरकार को चाहिए कि वह निजी बस ऑपरेटरों की पदाधिकारियों के साथ सकारात्मक निर्णय ले तथा कोई न कोई रास्ता निकाले।
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यदि कोविड-19 की सोशल डिस्टेंसिंग और अन्य गाइड लाइन को पूरा करना है तो निजी बस ऑपरेटर उस गाइडलाइन को पूरा करने के लिए तैयार हैं। जिसमें कि 60 प्रतिशत सवारियों के साथ बसें चलानी हैं, लेकिन जो 40 प्रतिशत सीटें बचती हैं। उसका किराया सब्सिडी के रूप में सरकार वहन करे तथा न्यूनतम किराये में वृद्धि करके कम से कम 10 किया जाए। इसके अतिरिक्त कोविड-19 के चलते पहले 5 किमी,10, 5 से 10 किमी तक 20 और 10 से 15 किलोमीटर तक 30 किराया निर्धारित करें। अतिरिक्त सामान्य किराएं में कम से कम 50 प्रतिशत की वृद्धि करें तभी हिमाचल प्रदेश की निजी बस ऑपरेटर अपनी बसों को चलाने में सक्षम होंगे तथा हिमाचल पथ परिवहन निगम की बसें भी तब फायदे में चल सकती है।
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