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लोनिवि कनिष्ठ अभियंता संघ ने विभाग में उच्चाधिकारियों को सेवा विस्तार देने को लेकर किया रोष जाहिर
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बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग कनिष्ठ अभियंता संघ के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सीता राम ठाकुर, जिला अध्यक्ष राजीव कुमार, महासचिव अनूप गौतम व कोषाध्यक्ष दिनेश गुप्ता ने लोनिवि विभाग में उच्चाधिकारियों को सेवानिवृत्ति के बाद और सेवा विस्तार देने को लेकर रोष जाहिर किया है।
उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार अपने निर्णयों के माध्यम से सेवा विस्तार पर कड़ा रुख अपनाते हुए ऐसी फाइलों को वापस मंगवा रही है जिन पर माननीयों की कृपा दृष्टि बनी है, वहीं दूसरी तरफ सरकार पिछले दरवाजे से सेवा विस्तार देने की तैयारी कर रही है।
सीताराम ने कहा कि एक ऐसा ही मामला जिला ऊना से सामने आ रहा है जहां एक सहायक अभियंता को करीब 36 वर्ष की नौकरी करने के बाद सेवा विस्तार दिया जा रहा है जो कि किसी भी लिहाज से तर्कसंगत नहीं है। कहा कि यह प्रदेश के उन बेरोजगार शिक्षित प्रशिक्षित बेरोजगारों के साथ धोखा है जो लाखों रुपये खर्च कर डिग्रियां हाथ में लिए नौकरी की तलाश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की बेईमानी के खिलाफ कनिष्ठ अभियंता संघ अब शांत नहीं बैठेगा तथा सरकार के इन निर्णयों का डटकर हर मंच पर विरोध करेगा।
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पदाधिकारियों का कहना है कि सेवानिवृत्त हो रहे अधिकारियों को किन मजबूरियों के तहत सेवा विस्तार दिया जा रहा है, यह उनकी समझ से परे है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के निर्णयों पर सरकार को अंकुश लगाना चाहिए। इस प्रकार के सेवाविस्तारों को पूरे प्रदेश में एक स्वर में विरोध करना चाहिए। राजीव कुमार ने बताया कि दशकों से पदोन्नति की राह देख रहे कनिष्ठ अभियंता, सहायक अभियंता, अधिशाषी अभियंता, अधीक्षक अभियंता तथा मुख्य अभियंता प्रभावित हो रहे है।
उन्होंने बताया कि संघ के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य सचिव को 19 दिसंबर 2017 के उच्च न्यायालय के उस निर्णय से भी अवगत करवाया था जिसमें कहा गया है कि केवल उन्हीं परिस्थितियों में सेवा विस्तार दिया जा सकता है जब विभाग से संबंधित पद के लिए योग्य अधिकारियों की कमी हो या निचली पंक्ति में बैठे अधिकारी की ऊंचे पद के लिए योग्यता न हो।
उन्होंने बताया कि इस निर्णय के बाद सरकार ने 8 फरवरी 2018 को अधिसूचना भी जारी की है। कनिष्ठ अभियंता संघ ने आरोप लगाया है कि सरकार की ओर से लोक निर्माण विभाग में उच्च न्यायालय के आदेशों की धज्जियां उड़ाई जा रही है। संघ प्रधान ने आशंका व्यक्त की है कि अभी सरकार कुछ और सेवानिवृत्त हो रहे अधिकारियों को भी इस प्रकार का अनुचित लाभ देने की योजना चला रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से इस मामले में व्यक्तिगत हस्तक्षेप कर न्याय की मांग की है।
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उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार अपने निर्णयों के माध्यम से सेवा विस्तार पर कड़ा रुख अपनाते हुए ऐसी फाइलों को वापस मंगवा रही है जिन पर माननीयों की कृपा दृष्टि बनी है, वहीं दूसरी तरफ सरकार पिछले दरवाजे से सेवा विस्तार देने की तैयारी कर रही है।
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सीताराम ने कहा कि एक ऐसा ही मामला जिला ऊना से सामने आ रहा है जहां एक सहायक अभियंता को करीब 36 वर्ष की नौकरी करने के बाद सेवा विस्तार दिया जा रहा है जो कि किसी भी लिहाज से तर्कसंगत नहीं है। कहा कि यह प्रदेश के उन बेरोजगार शिक्षित प्रशिक्षित बेरोजगारों के साथ धोखा है जो लाखों रुपये खर्च कर डिग्रियां हाथ में लिए नौकरी की तलाश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की बेईमानी के खिलाफ कनिष्ठ अभियंता संघ अब शांत नहीं बैठेगा तथा सरकार के इन निर्णयों का डटकर हर मंच पर विरोध करेगा।
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पदाधिकारियों का कहना है कि सेवानिवृत्त हो रहे अधिकारियों को किन मजबूरियों के तहत सेवा विस्तार दिया जा रहा है, यह उनकी समझ से परे है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के निर्णयों पर सरकार को अंकुश लगाना चाहिए। इस प्रकार के सेवाविस्तारों को पूरे प्रदेश में एक स्वर में विरोध करना चाहिए। राजीव कुमार ने बताया कि दशकों से पदोन्नति की राह देख रहे कनिष्ठ अभियंता, सहायक अभियंता, अधिशाषी अभियंता, अधीक्षक अभियंता तथा मुख्य अभियंता प्रभावित हो रहे है।
उन्होंने बताया कि संघ के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य सचिव को 19 दिसंबर 2017 के उच्च न्यायालय के उस निर्णय से भी अवगत करवाया था जिसमें कहा गया है कि केवल उन्हीं परिस्थितियों में सेवा विस्तार दिया जा सकता है जब विभाग से संबंधित पद के लिए योग्य अधिकारियों की कमी हो या निचली पंक्ति में बैठे अधिकारी की ऊंचे पद के लिए योग्यता न हो।
उन्होंने बताया कि इस निर्णय के बाद सरकार ने 8 फरवरी 2018 को अधिसूचना भी जारी की है। कनिष्ठ अभियंता संघ ने आरोप लगाया है कि सरकार की ओर से लोक निर्माण विभाग में उच्च न्यायालय के आदेशों की धज्जियां उड़ाई जा रही है। संघ प्रधान ने आशंका व्यक्त की है कि अभी सरकार कुछ और सेवानिवृत्त हो रहे अधिकारियों को भी इस प्रकार का अनुचित लाभ देने की योजना चला रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से इस मामले में व्यक्तिगत हस्तक्षेप कर न्याय की मांग की है।