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एम्स में कोरोना के बाद मेडिसिन ओपीडी में बढ़े मरीज
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। बिलासपुर के कोठीपुरा में निर्माणाधीन अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में कोरोना की तीसरी लहर के बाद मेडिसिन ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ गई है। हालात ये हैं कि हर दिन 35 से 40 मरीजों की जांच होने के बाद भी लोगों को 7 से 10 दिन पहले जांच करवाने के लिए पंजीकरण करवाना पड़ रहा है।
इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि जिला अस्पताल में पिछले 10 माह से मेडिसिन विशेषज्ञ का पद खाली चला है। इस कारण लोग एम्स का रु ख करते हैं। पूरी तरह शुरू होने से पहले ही कोठीपुरा एम्स जिला ही नहीं प्रदेश की जनता के लिए वरदान साबित हो रहा है।
ओपीडी में जांच करवाने के लिए प्रदेश भर से लोग एम्स के विशेषज्ञों के पास पहुंच रहे हैं, लेकिन मेडिसिन ओपीडी में मरीजों की भीड़ लगी रहती है। एम्स में की मेडिसिन ओपीडी में हर दिन केवल 35 मरीजों की जांच होती है, लेकिन इसके बावजूद चिकित्सक आपात स्थिति में आने वाले मरीजों समेत करीब 40 लोगों की जांच करते हैं, लेकिन कोरोना की तीसरी लहर के बाद एकाएक जनरल मेडिसिन के मरीजों के पंजीकरण की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। लोगों को मेडिसिन ओपीडी में जांच करवाने के लिए 7 से 10 दिन पहले अपना पंजीकरण करवाना पड़ रहा है।
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मंगलवार और वीरवार को नेफ्रोलॉजी ओपीडी में भी मरीजों की भीड़ लगी रहती है। विशेषज्ञ का ओपीडी में बैठने का समय दोपहर 2 से 4 बजे तक का है, लेकिन वो तब तक ओपीडी नहीं छोड़ते हैं जब तक ओपीडी के बाहर मरीजों की लाइन लगी रहती है।
वहीं हर दिन इस विभाग में 20 मरीजों की जांच होती है। इसके अलावा आर्थो ओपीडी में हर दिन 35, ईएनटी में 25 मरीजों की जांच होती है। लेकिन मेडिसिन और नेफ्रो को छोड़कर सभी ओपीडी का पंजीकरण स्पॉट पर ही हो रहा है।
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बिलासपुर। बिलासपुर के कोठीपुरा में निर्माणाधीन अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में कोरोना की तीसरी लहर के बाद मेडिसिन ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ गई है। हालात ये हैं कि हर दिन 35 से 40 मरीजों की जांच होने के बाद भी लोगों को 7 से 10 दिन पहले जांच करवाने के लिए पंजीकरण करवाना पड़ रहा है।
इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि जिला अस्पताल में पिछले 10 माह से मेडिसिन विशेषज्ञ का पद खाली चला है। इस कारण लोग एम्स का रु ख करते हैं। पूरी तरह शुरू होने से पहले ही कोठीपुरा एम्स जिला ही नहीं प्रदेश की जनता के लिए वरदान साबित हो रहा है।
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ओपीडी में जांच करवाने के लिए प्रदेश भर से लोग एम्स के विशेषज्ञों के पास पहुंच रहे हैं, लेकिन मेडिसिन ओपीडी में मरीजों की भीड़ लगी रहती है। एम्स में की मेडिसिन ओपीडी में हर दिन केवल 35 मरीजों की जांच होती है, लेकिन इसके बावजूद चिकित्सक आपात स्थिति में आने वाले मरीजों समेत करीब 40 लोगों की जांच करते हैं, लेकिन कोरोना की तीसरी लहर के बाद एकाएक जनरल मेडिसिन के मरीजों के पंजीकरण की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। लोगों को मेडिसिन ओपीडी में जांच करवाने के लिए 7 से 10 दिन पहले अपना पंजीकरण करवाना पड़ रहा है।
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मंगलवार और वीरवार को नेफ्रोलॉजी ओपीडी में भी मरीजों की भीड़ लगी रहती है। विशेषज्ञ का ओपीडी में बैठने का समय दोपहर 2 से 4 बजे तक का है, लेकिन वो तब तक ओपीडी नहीं छोड़ते हैं जब तक ओपीडी के बाहर मरीजों की लाइन लगी रहती है।
वहीं हर दिन इस विभाग में 20 मरीजों की जांच होती है। इसके अलावा आर्थो ओपीडी में हर दिन 35, ईएनटी में 25 मरीजों की जांच होती है। लेकिन मेडिसिन और नेफ्रो को छोड़कर सभी ओपीडी का पंजीकरण स्पॉट पर ही हो रहा है।