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विधानसभा सत्र में विपक्ष की भूमिका रही नकारात्मक : सांख्यान
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बोले, विपक्ष जनहित के मुद्दों को उठाने में असफल रहा
नेता प्रतिपक्ष और भाजपा के अन्य विधायक बंटे नजर आए
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। प्रदेश कांग्रेस के मीडिया कोऑर्डिनेटर संदीप सांख्यान ने कहा है कि विधानसभा के मानसून सत्र में विपक्ष की भूमिका नकारात्मक रही है। विपक्ष जनहित के मुद्दों को उठाने पर असफल रहा। इस दौरान पहली बार प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने मानसून सत्र को इसलिए लंबा किया था, ताकि प्रदेश हित को लेकर भाजपा कोई सकारात्मक चर्चा करता।
उन्होंने कहा कि विपक्ष की भूमिका केवल टांग खिंचाई की ही रही। विपक्ष को यह समझ नहीं आया कि सत्र को लंबा करने का उद्देश्य है कि प्रदेश हित में सत्ता पक्ष, विपक्ष में कोई ठोस चर्चा प्रदेश की योजनाओं पर हो सके। लेकिन विपक्ष मुख्यमंत्री की इस योजना को भुनाने में फ़िसड्डी साबित हुआ है।
उन्होंने कहा कि विपक्ष बार-बार वॉक आउट करता रहा। विपक्ष का यह दोहरा मापदंड साबित हुआ। इस बात से यह भी साबित हुआ कि भाजपा विपक्ष की भूमिका ही भूल गई है। विपक्ष ने बहुत से जनकल्याण के मुद्दों को उठाने में इसलिए परहेज किया कि कहीं पूर्व की भाजपा सरकार के समय हुई गड़बड़ियां सामने न आ जाएं। जब विपक्ष का सदन में कोई वश नहीं चला तो विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ ही बेवजह मोर्चा खोलकर अपनी फजीहत करवा ली।
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उन्होंने कहा कि इस बार सत्र में नेता प्रतिपक्ष और भाजपा के अन्य विधायक आपस में बंटे नजर आए। विधानसभा अध्यक्ष के मुद्दे पर अविश्वास प्रस्ताव लाना भी विपक्ष को भारी पड़ गया। सदन में नेता प्रतिपक्ष के घर के ऊपर ड्रोन का उड़ने वाले मुद्दे पर तो विपक्ष के नेता तो खुद ही घिर गए।
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नेता प्रतिपक्ष और भाजपा के अन्य विधायक बंटे नजर आए
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। प्रदेश कांग्रेस के मीडिया कोऑर्डिनेटर संदीप सांख्यान ने कहा है कि विधानसभा के मानसून सत्र में विपक्ष की भूमिका नकारात्मक रही है। विपक्ष जनहित के मुद्दों को उठाने पर असफल रहा। इस दौरान पहली बार प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने मानसून सत्र को इसलिए लंबा किया था, ताकि प्रदेश हित को लेकर भाजपा कोई सकारात्मक चर्चा करता।
उन्होंने कहा कि विपक्ष की भूमिका केवल टांग खिंचाई की ही रही। विपक्ष को यह समझ नहीं आया कि सत्र को लंबा करने का उद्देश्य है कि प्रदेश हित में सत्ता पक्ष, विपक्ष में कोई ठोस चर्चा प्रदेश की योजनाओं पर हो सके। लेकिन विपक्ष मुख्यमंत्री की इस योजना को भुनाने में फ़िसड्डी साबित हुआ है।
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उन्होंने कहा कि विपक्ष बार-बार वॉक आउट करता रहा। विपक्ष का यह दोहरा मापदंड साबित हुआ। इस बात से यह भी साबित हुआ कि भाजपा विपक्ष की भूमिका ही भूल गई है। विपक्ष ने बहुत से जनकल्याण के मुद्दों को उठाने में इसलिए परहेज किया कि कहीं पूर्व की भाजपा सरकार के समय हुई गड़बड़ियां सामने न आ जाएं। जब विपक्ष का सदन में कोई वश नहीं चला तो विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ ही बेवजह मोर्चा खोलकर अपनी फजीहत करवा ली।
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उन्होंने कहा कि इस बार सत्र में नेता प्रतिपक्ष और भाजपा के अन्य विधायक आपस में बंटे नजर आए। विधानसभा अध्यक्ष के मुद्दे पर अविश्वास प्रस्ताव लाना भी विपक्ष को भारी पड़ गया। सदन में नेता प्रतिपक्ष के घर के ऊपर ड्रोन का उड़ने वाले मुद्दे पर तो विपक्ष के नेता तो खुद ही घिर गए।