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Bilaspur News: जिले में मक्की की बिजाई शुरू, हाल ही में हुई बारिश बनी किसानों के लिए वरदान
Sat, 07 Jun 2025 11:54 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Sat, 07 Jun 2025 11:54 PM IST
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कृषि विभाग ने 15 जून तक बुआई पूरी करने की दी सलाह
जिले के 80 फीसदी किसान खेती के लिए बारिश पर हैं निर्भर
27 हजार हेक्टेयर में 55 हजार किसान परिवार करते हैं मक्की की खेती
संवाद न्यूज एजेंसी
जुखाला(बिलासपुर)। जिले में हाल ही में हुई मानसूनी बारिश किसानों के लिए राहत की फुहार बनकर आई है। बारिश के बाद जिलेभर में मक्की की बिजाई का काम जोरों पर चल रहा है। खेतों में नमी की उपलब्धता से किसानों ने समय पर बुवाई शुरू कर दी है और अब वे फसल की अच्छी पैदावार की उम्मीद कर रहे हैं।
जिले में करीब 55 हजार किसान परिवार खेतीबाड़ी से जुड़े हैं। जिले में लगभग 34 हजार हेक्टेयर भूमि पर खेती होती है, जिसमें से 27 हजार हेक्टेयर भूमि पर मक्की की खेती की जाती है। आंकड़े बताते हैं कि जिले के 80 फीसदी किसान खेती के लिए वर्षा जल पर निर्भर हैं। ऐसे में समय पर बारिश न केवल खेती के लिए जरूरी होती है बल्कि किसानों की आजीविका भी इससे जुड़ी होती है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि मक्की की बिजाई कतारों में करें, पौधों के बीच उचित दूरी बनाए रखें और पौधों के बड़े होने पर खेतों में जल निकासी का समुचित प्रबंध करें। इन तकनीकी उपायों से न केवल फसल की सेहत बेहतर रहती है, बल्कि उपज में भी वृद्धि होती है। जिले के जुखाला, घुमारवीं, तलाई और आसपास के क्षेत्रों में मक्की की बिजाई का कार्य पूरे जोरों पर है। किसानों की मेहनत और समय पर हुई बारिश इस बार जिले में अच्छी मक्की की फसल की उम्मीद जगा रही है। जिला कृषि उप-निदेशक प्रेम ठाकुर ने बताया कि बारिश के बाद भूमि में नमी की स्थिति मक्की की बिजाई के लिए पूरी तरह अनुकूल है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे 15 जून तक मक्की की बुवाई का कार्य पूरा कर लें ताकि अच्छी गुणवत्ता और उत्पादन प्राप्त किया जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान में प्रचलित हाइब्रिड बीज 90 से 110 दिनों के भीतर पक जाते हैं।
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जिले के 80 फीसदी किसान खेती के लिए बारिश पर हैं निर्भर
27 हजार हेक्टेयर में 55 हजार किसान परिवार करते हैं मक्की की खेती
संवाद न्यूज एजेंसी
जुखाला(बिलासपुर)। जिले में हाल ही में हुई मानसूनी बारिश किसानों के लिए राहत की फुहार बनकर आई है। बारिश के बाद जिलेभर में मक्की की बिजाई का काम जोरों पर चल रहा है। खेतों में नमी की उपलब्धता से किसानों ने समय पर बुवाई शुरू कर दी है और अब वे फसल की अच्छी पैदावार की उम्मीद कर रहे हैं।
जिले में करीब 55 हजार किसान परिवार खेतीबाड़ी से जुड़े हैं। जिले में लगभग 34 हजार हेक्टेयर भूमि पर खेती होती है, जिसमें से 27 हजार हेक्टेयर भूमि पर मक्की की खेती की जाती है। आंकड़े बताते हैं कि जिले के 80 फीसदी किसान खेती के लिए वर्षा जल पर निर्भर हैं। ऐसे में समय पर बारिश न केवल खेती के लिए जरूरी होती है बल्कि किसानों की आजीविका भी इससे जुड़ी होती है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि मक्की की बिजाई कतारों में करें, पौधों के बीच उचित दूरी बनाए रखें और पौधों के बड़े होने पर खेतों में जल निकासी का समुचित प्रबंध करें। इन तकनीकी उपायों से न केवल फसल की सेहत बेहतर रहती है, बल्कि उपज में भी वृद्धि होती है। जिले के जुखाला, घुमारवीं, तलाई और आसपास के क्षेत्रों में मक्की की बिजाई का कार्य पूरे जोरों पर है। किसानों की मेहनत और समय पर हुई बारिश इस बार जिले में अच्छी मक्की की फसल की उम्मीद जगा रही है। जिला कृषि उप-निदेशक प्रेम ठाकुर ने बताया कि बारिश के बाद भूमि में नमी की स्थिति मक्की की बिजाई के लिए पूरी तरह अनुकूल है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे 15 जून तक मक्की की बुवाई का कार्य पूरा कर लें ताकि अच्छी गुणवत्ता और उत्पादन प्राप्त किया जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान में प्रचलित हाइब्रिड बीज 90 से 110 दिनों के भीतर पक जाते हैं।
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