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Bilaspur News: महिलाओं को अधिकारों के बारे में किया जागरूक
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- घुमारवीं में आयोजित हुआ विधान से समाधान कार्यक्रम
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं (बिलासपुर)। विधिक सेवा प्राधिकरण दीवानी न्यायालय घुमारवीं के तत्वावधान में विधान से समाधान कार्यक्रम का आयोजन विकास खंड घुमारवीं के सभागार में किया गया। कार्यक्रम का आयोजन लीगल सर्विसेज कमेटी की अध्यक्ष मोनिका सोंबल की अध्यक्षता में हुआ।
कार्यक्रम में विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से नामित मनोरमा चौहान और रिसोर्स पर्सन सर्वमंगला गर्ग ने महिलाओं से संबंधित कानून के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी दी। इस मौके पर सीनियर सिविल जज मोनिका सोंबल ने कहा कि कानून के अनुसार यदि किसी महिला का पति या उसके पति का कोई भी रिश्तेदार उस महिला के साथ क्रूरता (मारपीट करना, परेशान करना) करता है या मानसिक रूप से व किसी भी अन्य प्रकार से परेशान करता है। उस व्यक्ति पर घरेलू हिंसा के लिए भारतीय न्याय संहिता 85 के तहत मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाती है। इस कानून का उद्देश्य किसी ऐसी स्त्री की रक्षा करना, जिसको उसके पति और उसके रिश्तेदारों द्वारा किसी भी प्रकार से प्रताड़ित किया जाता है। इसके साथ ही टेली लॉ के बारे में भी जानकारी दी गई। मनोरमा चौहान ने कहा कि महिलाएं स्वावलंबी होने की दिशा में तेजी से अग्रसर हैं। महिलाओं के कल्याण के लिए सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। मातृ शक्ति हर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही है। साथ ही में उन्होंने बताया कि समान पारिश्रमिक अधिनियम 1976 भारत का एक महत्वपूर्ण श्रम कानून है। यह कानून पुरुषों और महिलाओं को समान काम के लिए समान वेतन देने का प्रावधान करता है। इस कानून के तहत नियोक्ताओं को लिंग की परवाह किए बिना समान वेतन देना जरूरी है। इस कानून का उद्देश्य कार्यस्थलों में लैंगिक समानता सुनिश्चित करना और महिलाओं के अधिकारों को बढ़ाना है।
सुपरवाइजर सर्वमंगला गर्ग ने एसिड अटैक, दुष्कर्म, अपहरण, कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न, घरेलू हिंसा के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। अपराधों पर दोषियों को किस धारा के साथ कौन-कौन सी सजा हो सकती है यह भी बताया गया। इस अवसर पर मनोज चंदेल, करम चंद, अर्जुन कुमार, अक्षय कुमार और अनिल कुमार मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं (बिलासपुर)। विधिक सेवा प्राधिकरण दीवानी न्यायालय घुमारवीं के तत्वावधान में विधान से समाधान कार्यक्रम का आयोजन विकास खंड घुमारवीं के सभागार में किया गया। कार्यक्रम का आयोजन लीगल सर्विसेज कमेटी की अध्यक्ष मोनिका सोंबल की अध्यक्षता में हुआ।
कार्यक्रम में विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से नामित मनोरमा चौहान और रिसोर्स पर्सन सर्वमंगला गर्ग ने महिलाओं से संबंधित कानून के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी दी। इस मौके पर सीनियर सिविल जज मोनिका सोंबल ने कहा कि कानून के अनुसार यदि किसी महिला का पति या उसके पति का कोई भी रिश्तेदार उस महिला के साथ क्रूरता (मारपीट करना, परेशान करना) करता है या मानसिक रूप से व किसी भी अन्य प्रकार से परेशान करता है। उस व्यक्ति पर घरेलू हिंसा के लिए भारतीय न्याय संहिता 85 के तहत मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाती है। इस कानून का उद्देश्य किसी ऐसी स्त्री की रक्षा करना, जिसको उसके पति और उसके रिश्तेदारों द्वारा किसी भी प्रकार से प्रताड़ित किया जाता है। इसके साथ ही टेली लॉ के बारे में भी जानकारी दी गई। मनोरमा चौहान ने कहा कि महिलाएं स्वावलंबी होने की दिशा में तेजी से अग्रसर हैं। महिलाओं के कल्याण के लिए सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। मातृ शक्ति हर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही है। साथ ही में उन्होंने बताया कि समान पारिश्रमिक अधिनियम 1976 भारत का एक महत्वपूर्ण श्रम कानून है। यह कानून पुरुषों और महिलाओं को समान काम के लिए समान वेतन देने का प्रावधान करता है। इस कानून के तहत नियोक्ताओं को लिंग की परवाह किए बिना समान वेतन देना जरूरी है। इस कानून का उद्देश्य कार्यस्थलों में लैंगिक समानता सुनिश्चित करना और महिलाओं के अधिकारों को बढ़ाना है।
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सुपरवाइजर सर्वमंगला गर्ग ने एसिड अटैक, दुष्कर्म, अपहरण, कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न, घरेलू हिंसा के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। अपराधों पर दोषियों को किस धारा के साथ कौन-कौन सी सजा हो सकती है यह भी बताया गया। इस अवसर पर मनोज चंदेल, करम चंद, अर्जुन कुमार, अक्षय कुमार और अनिल कुमार मौजूद रहे।
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