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भागवत कथा श्रवण से मिलती है मोक्ष की प्राप्ति : सुशील
Wed, 01 Apr 2026 11:17 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Wed, 01 Apr 2026 11:17 PM IST
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बरठीं क्षेत्र के शिव मंदिर बडग़ांव में आयोजित श्रीमद् भागवत के दौरान कलश यात्रा में शामिल होते ल
शिव मंदिर बड़गांव में चल रही है श्रीमद्भागवत कथा
संवाद न्यूज एजेंसी
बरठीं( बिलासपुर)। बरठीं क्षेत्र के शिव मंदिर बड़गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान कथा व्यास पंडित सुशील शर्मा ने कहा कि जीवन के अंतिम क्षणों में भी यदि व्यक्ति भगवान की शरण में आ जाए तो मोक्ष की प्राप्ति संभव है। उन्होंने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने से मनुष्य को न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि जीवन में सकारात्मक परिवर्तन भी आता है।
कथा के दौरान पंडित शर्मा ने राजा परीक्षित की कथा सुनाते हुए कहा कि उन्होंने भूलवश एक ध्यानमग्न ऋषि के गले में मृत सर्प डाल दिया था, जिससे क्रोधित होकर ऋषि पुत्र श्रृंगी ने उन्हें सात दिन के भीतर तक्षक नाग के डसने से मृत्यु का श्राप दे दिया। अपनी गलती का अहसास होने पर राजा परीक्षित ने क्रोध नहीं किया, बल्कि राजपाट त्याग कर गंगा तट पर बैठकर मृत्यु की प्रतीक्षा करने लगे। इस दौरान महर्षि शुकदेव ने उन्हें सात दिनों तक श्रीमद्भागवत सुनाई। सातवें दिन तक्षक नाग के डसने से उनकी मृत्यु हो गई, लेकिन कथा श्रवण के प्रभाव से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई। भागवत कथा का पूरा लाभ वक्ता और श्रोता दोनों की मन स्थिति पर निर्भर करता है। यदि दोनों की भावना शुद्ध और निस्वार्थ हो तो कथा का फल पूर्ण रूप से प्राप्त होता है। इससे पूर्व जल देवता के पूजन के साथ कलश यात्रा निकाली गई, जो शिव मंदिर पज्याल जख तक पहुंची। इस शोभायात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया। भागवत कथा का समापन 7 अप्रैल को होगा। इस दिन हवन यज्ञ और भंडारे का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर शिव मंदिर कमेटी के प्रधान सुनीत सिंह, बीना देवी, मस्तराम, हरकेश, गौतम, रणवीर सिंह, सुशील कुमार, मनसाराम, मंजू बाला, सावित्री देवी, नीना देवी, सुमन देवी, बबीता, कुसुम भारती, सुषमा केसरी और अंबिका सहित अन्य ग्रामीण उपस्थित रहे।
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बरठीं( बिलासपुर)। बरठीं क्षेत्र के शिव मंदिर बड़गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान कथा व्यास पंडित सुशील शर्मा ने कहा कि जीवन के अंतिम क्षणों में भी यदि व्यक्ति भगवान की शरण में आ जाए तो मोक्ष की प्राप्ति संभव है। उन्होंने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने से मनुष्य को न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि जीवन में सकारात्मक परिवर्तन भी आता है।
कथा के दौरान पंडित शर्मा ने राजा परीक्षित की कथा सुनाते हुए कहा कि उन्होंने भूलवश एक ध्यानमग्न ऋषि के गले में मृत सर्प डाल दिया था, जिससे क्रोधित होकर ऋषि पुत्र श्रृंगी ने उन्हें सात दिन के भीतर तक्षक नाग के डसने से मृत्यु का श्राप दे दिया। अपनी गलती का अहसास होने पर राजा परीक्षित ने क्रोध नहीं किया, बल्कि राजपाट त्याग कर गंगा तट पर बैठकर मृत्यु की प्रतीक्षा करने लगे। इस दौरान महर्षि शुकदेव ने उन्हें सात दिनों तक श्रीमद्भागवत सुनाई। सातवें दिन तक्षक नाग के डसने से उनकी मृत्यु हो गई, लेकिन कथा श्रवण के प्रभाव से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई। भागवत कथा का पूरा लाभ वक्ता और श्रोता दोनों की मन स्थिति पर निर्भर करता है। यदि दोनों की भावना शुद्ध और निस्वार्थ हो तो कथा का फल पूर्ण रूप से प्राप्त होता है। इससे पूर्व जल देवता के पूजन के साथ कलश यात्रा निकाली गई, जो शिव मंदिर पज्याल जख तक पहुंची। इस शोभायात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया। भागवत कथा का समापन 7 अप्रैल को होगा। इस दिन हवन यज्ञ और भंडारे का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर शिव मंदिर कमेटी के प्रधान सुनीत सिंह, बीना देवी, मस्तराम, हरकेश, गौतम, रणवीर सिंह, सुशील कुमार, मनसाराम, मंजू बाला, सावित्री देवी, नीना देवी, सुमन देवी, बबीता, कुसुम भारती, सुषमा केसरी और अंबिका सहित अन्य ग्रामीण उपस्थित रहे।
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