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गोबिंदसागर झील में साहसिक गतिविधियों को बीबीएमबी की एनओसी का इंतजार
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गोबिंद सागर झील पर बिलासपुर के मंडी भराड़ी में बना पुल। संवाद
- फोटो : BILASPUR
बिलासपुर। बिलासपुर की गोबिंदसागर झील में पिछले कई साल से साहसिक गतिविधियां शुरू करने के लिए बीबीएमबी की मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है। बिना मंजूरी के झील में किसी भी प्रकार की साहसिक गतिविधि के लिए पर्यटन विभाग में पंजीकरण संभव नहीं है। अगर बीबीएमबी की मंजूरी मिल जाती है तो बिलासपुर से बागछाल पुल तक झील में साहसिक वाटर स्पोर्ट्स के लिए बेहतर विकल्प सामने होगा।
कई साल से योजना बनाई जा रही है कि इस झील में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बोटिंग, जेटी, स्कूटर जेटी, स्टीमर, शिकारे, कायकिंग, कनोइंग, वाटर सर्फिंग व अन्य गतिविधियां औपचारिक रूप से शुरू की जाएंगी। लेकिन अभी तक यह योजना परवान नहीं चढ़ पाई है।
बिलासपुर से भाखड़ा बांध की दूरी करीब 90 किलोमीटर है। जबकि ऊना से भाखड़ा बांध की दूरी मात्र 10-15 किलोमीटर ही है। ऊना में इसी झील में साहसिक गतिविधियों के लिए बीबीएमबी ने एनओसी दे दी है और वहां साहसिक गतिविधियां शुरू भी हो गई हैं। लेकिन बिलासपुर को अभी तक मंजूरी न मिलने से यहां पर पर्यटन को विकसित ही नहीं किया जा सका है। बिलासपुर के लुहणू से बागछाल पुल तक भी अगर बीबीएमबी झील में साहसिक गतिविधियों के लिए साइट नोटिफाई कर देता है तो करीब 15 किलोमीटर तक इन गतिविधियों को शुरू किया जा सकता है।
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सबसे बड़ी बात यह होगी कि किरतपुर-नेरचौक फोरलेन बनने के बाद प्रदेश में पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी। ऐसे में अगर बिलासपुर में वाटर स्पोर्ट्स की गतिविधियों को शुरू किया जाता है तो यहां पर पर्यटक साहसिक गतिविधियों के लिए आकर्षित होंगे। प्रदेश के अंदर आने वाला पर्यटक सबसे पहले बिलासपुर में रुकेगा। यहां पर वोटिंग व अन्य गतिविधियों से जहां सरकार के राजस्व में बढ़ोत्तरी होगी वहीं स्थानीय लोगों का रोजगार भी मिलेगा।
पर्यटन विभाग के जन सूचना अधिकारी रितेश पटियाल ने बताया कि विभाग का कार्य सिर्फ झील में काम करने वालों का पंजीकरण करना है। जिला प्रशासन अगर साइट नोटिफाई करवाता है तो विभाग आगे की कार्रवाई करेगा। कहा कि बिलासुपर में एडवेंचर वाटर स्पोर्ट्स के लिए बेहतर संभावनाएं हैं।
झील में साइट को बीबीएमबी से नोटिफाई करवाने के लिए जल्द ही अधिकारियों से वार्ता करेंगे। कोशिश की जाएगी कि जिले में वाटर स्पोर्ट्स, पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए इस साइट को जल्द नोटिफाई करवाया जा सके।
पंकज राय, उपायुक्त बिलासपुर।
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कई साल से योजना बनाई जा रही है कि इस झील में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बोटिंग, जेटी, स्कूटर जेटी, स्टीमर, शिकारे, कायकिंग, कनोइंग, वाटर सर्फिंग व अन्य गतिविधियां औपचारिक रूप से शुरू की जाएंगी। लेकिन अभी तक यह योजना परवान नहीं चढ़ पाई है।
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बिलासपुर से भाखड़ा बांध की दूरी करीब 90 किलोमीटर है। जबकि ऊना से भाखड़ा बांध की दूरी मात्र 10-15 किलोमीटर ही है। ऊना में इसी झील में साहसिक गतिविधियों के लिए बीबीएमबी ने एनओसी दे दी है और वहां साहसिक गतिविधियां शुरू भी हो गई हैं। लेकिन बिलासपुर को अभी तक मंजूरी न मिलने से यहां पर पर्यटन को विकसित ही नहीं किया जा सका है। बिलासपुर के लुहणू से बागछाल पुल तक भी अगर बीबीएमबी झील में साहसिक गतिविधियों के लिए साइट नोटिफाई कर देता है तो करीब 15 किलोमीटर तक इन गतिविधियों को शुरू किया जा सकता है।
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सबसे बड़ी बात यह होगी कि किरतपुर-नेरचौक फोरलेन बनने के बाद प्रदेश में पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी। ऐसे में अगर बिलासपुर में वाटर स्पोर्ट्स की गतिविधियों को शुरू किया जाता है तो यहां पर पर्यटक साहसिक गतिविधियों के लिए आकर्षित होंगे। प्रदेश के अंदर आने वाला पर्यटक सबसे पहले बिलासपुर में रुकेगा। यहां पर वोटिंग व अन्य गतिविधियों से जहां सरकार के राजस्व में बढ़ोत्तरी होगी वहीं स्थानीय लोगों का रोजगार भी मिलेगा।
पर्यटन विभाग के जन सूचना अधिकारी रितेश पटियाल ने बताया कि विभाग का कार्य सिर्फ झील में काम करने वालों का पंजीकरण करना है। जिला प्रशासन अगर साइट नोटिफाई करवाता है तो विभाग आगे की कार्रवाई करेगा। कहा कि बिलासुपर में एडवेंचर वाटर स्पोर्ट्स के लिए बेहतर संभावनाएं हैं।
झील में साइट को बीबीएमबी से नोटिफाई करवाने के लिए जल्द ही अधिकारियों से वार्ता करेंगे। कोशिश की जाएगी कि जिले में वाटर स्पोर्ट्स, पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए इस साइट को जल्द नोटिफाई करवाया जा सके।
पंकज राय, उपायुक्त बिलासपुर।