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पीड़ित परिवारों ने घरों में ही गुजारी रात
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राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बिलासपुर के साथ लगते नाले में बने घर।संवाद
- फोटो : BILASPUR
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घुमारवीं (बिलासपुर)। घुमारवीं उपमंडल के तहत ग्राम पंचायत कुहमझवाड़ के भगौट में बादल फटने से वीरवार रात को भारी नुकसान हुआ। नाले में आए उफान से तीन घर क्षतिग्रस्त हो गए हैं। प्रभावितों ने शुक्रवार रात इन्हीं क्षतिग्रस्त घरों में रात गुजारी। हालांकि प्रशासन ने टेंट लगा दिए हैं। जब बारिश होगी तो टेंटों का सहारा लिया जाएगा। पीड़ित परिवार अपने घरों को छोड़ने से मना कर रहे हैं।
शनिवार को पूरे दिन मलबे में दबे पशुओं को खोजने का काम जारी रहा। एक भैंस का शव घरों से करीब आधा किलोमीटर से दूर मिला। उसे दफना दिया गया है। सड़क न होने से प्रशासन के लिए एलएनटी मशीन मौके पर पहुंचाना चुनौती बना हुआ है। प्रशासन की ओर से रविवार को मजदूरों की संख्या बढ़ाई जाएगी ताकि पशुओं को निकालकर दफनाया जा सके।
बता दें कि वीरवार रात करीब 2:00 बजे भगौट गांव में बादल फटने से तबाही मची थी। निक्कू राम, सरवन कुमार और कुलदीप के घर और गोशालाएं क्षतिग्रस्त हो गई थीं। इनकी तीन भैंसें और 10 बकरियां बह गई थीं। एसडीएम घुमारवीं राजीव ठाकुर ने बताया कि मजदूरों की सहायता से दबे हुए पशुओं को निकालने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन बड़ी-बड़ी चट्टानें होने से समय लग रहा है। पीड़ित परिवारों को राशन और अन्य जरूरी वस्तुएं उपलब्ध करवा दी गई हैं। रहने के लिए टेंट का इंतजाम भी कर दिया गया है। परिवार वाले दूसरे स्थान पर जाने के लिए राजी नहीं हैं।
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शनिवार को पूरे दिन मलबे में दबे पशुओं को खोजने का काम जारी रहा। एक भैंस का शव घरों से करीब आधा किलोमीटर से दूर मिला। उसे दफना दिया गया है। सड़क न होने से प्रशासन के लिए एलएनटी मशीन मौके पर पहुंचाना चुनौती बना हुआ है। प्रशासन की ओर से रविवार को मजदूरों की संख्या बढ़ाई जाएगी ताकि पशुओं को निकालकर दफनाया जा सके।
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बता दें कि वीरवार रात करीब 2:00 बजे भगौट गांव में बादल फटने से तबाही मची थी। निक्कू राम, सरवन कुमार और कुलदीप के घर और गोशालाएं क्षतिग्रस्त हो गई थीं। इनकी तीन भैंसें और 10 बकरियां बह गई थीं। एसडीएम घुमारवीं राजीव ठाकुर ने बताया कि मजदूरों की सहायता से दबे हुए पशुओं को निकालने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन बड़ी-बड़ी चट्टानें होने से समय लग रहा है। पीड़ित परिवारों को राशन और अन्य जरूरी वस्तुएं उपलब्ध करवा दी गई हैं। रहने के लिए टेंट का इंतजाम भी कर दिया गया है। परिवार वाले दूसरे स्थान पर जाने के लिए राजी नहीं हैं।
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