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किरतपुर-नेरचौक फोरलेन : अवैध डंपिंग पर दूसरा रिमाइंडर नोटिस जारी
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-गठित कमेटी को 15 दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट सौंपने का निर्देश
-श्री नयना देवी जी के सुन्नण में माइनिंग ने नोटिस, टीसीपी ने जारी कारण बताओ नोटिस
-तहसीलदार ने मौके की रिपोर्ट प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड बिलासपुर को भेजी
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। किरतपुर-नेरचौक फोरलेन के किनारे अवैध रूप से हो रही मलबे की डंपिंग पर रोक लगाने के लिए प्रशासन ने एक बार फिर दूसरा रिमाइंडर नोटिस जारी किया है। श्री नयना देवी जी के सुन्नण में माइनिंग विभाग ने नोटिस, टीसीपी ने दोषी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
इसी संबंध में पर्यावरण अभियंता ने वन मंडलाधिकारी बिलासपुर,तहसीलदार स्वारघाट, खंड विकास अधिकारी नयना देवी जी, पंचायत टाली के प्रधान को उच्च न्यायालय के निर्देशों का हवाला देते हुए 15 दिनों के भीतर आवश्यक कार्रवाई कर अनुपालन रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। मौजा सुनण में अवैध डंपिंग को लेकर पर्यावरण अभियंता ने टीसीपी के असिस्टेंट टाउन प्लानर, जिला खनन अधिकारी बिलासपुर और अन्य संबंधित अधिकारियों की एक संयुक्त जांच कमेटी गठित की थी। कमेटी ने मौके का निरीक्षण कर रिपोर्ट में बताया कि स्थानीय लोग भूमि समतल करते समय निकली मिट्टी और पत्थर को फोरलेन के किनारे ही डंप कर रहे हैं। टीसीपी ने 2015 के नियमों के अंतर्गत दोषियों को नोटिस जारी किया है, लेकिन इसके बावजूद अवैध डंपिंग की मिट्टी नहीं उठाई गई। तहसीलदार स्वारघाट ने मौके पर निरीक्षण के दौरान यह पुष्टि की कि सरकारी भूमि खसरा नंबर 2/2, जिसमें 623-02 बीघा क्षेत्र शामिल है, इसके साथ डंपिंग हुई है। साथ ही निजी भूमि खसरा नंबर 172/49 पर भी कटान के बाद मिट्टी डंप की गई है। इस दौरान पंचायत टाली के प्रधान ने भूमि समतल करने के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी कर दिया, जिससे डंपिंग का कार्य जारी रहा, लेकिन मौके पर मलबे का निपटारा नहीं किया गया और न ही भूमि समतल करने के नियमों का पालन हुआ।
समय पर कार्रवाई न होने के कारण पर्यावरण को गंभीर नुकसान हो रहा है। अवैध डंपिंग के कारण जल स्रोत, श्मशान घाट, फुटपाथ, घासनी, उपजाऊ भूमि, पगडंडियां, मोटर बोट, भाखड़ा बांध परियोजना, मछुआरों का कारोबार तक प्रभावित हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते सख्त कार्रवाई की जाती तो जल, जंगल और जमीन को इतना नुकसान नहीं होता।
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इनसेट
12 साल से चल रहा डंपिंग का खेल, उच्च न्यायालय में गुहार
फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के महासचिव एवं कोर्ट में इस मामले को ले जाने वाले मदन लाल शर्मा ने कहा कि यह अवैध डंपिंग पिछले 12 साल से जारी है। इसमें निर्माण कंपनियां खुलेआम मिट्टी और मलबा फेंक रही हैं। प्रशासन की ओर से बार-बार नोटिस और रिमाइंडर तो जारी किए जा रहे हैं, लेकिन जमीन पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। अब स्थिति यह है कि स्थानीय लोग न्याय के लिए उच्च न्यायालय का सहारा ले रहे हैं, क्योंकि प्रशासन की ओर से केवल पत्राचार हो रहा है, जबकि दोषियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही।
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-श्री नयना देवी जी के सुन्नण में माइनिंग ने नोटिस, टीसीपी ने जारी कारण बताओ नोटिस
-तहसीलदार ने मौके की रिपोर्ट प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड बिलासपुर को भेजी
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। किरतपुर-नेरचौक फोरलेन के किनारे अवैध रूप से हो रही मलबे की डंपिंग पर रोक लगाने के लिए प्रशासन ने एक बार फिर दूसरा रिमाइंडर नोटिस जारी किया है। श्री नयना देवी जी के सुन्नण में माइनिंग विभाग ने नोटिस, टीसीपी ने दोषी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
इसी संबंध में पर्यावरण अभियंता ने वन मंडलाधिकारी बिलासपुर,तहसीलदार स्वारघाट, खंड विकास अधिकारी नयना देवी जी, पंचायत टाली के प्रधान को उच्च न्यायालय के निर्देशों का हवाला देते हुए 15 दिनों के भीतर आवश्यक कार्रवाई कर अनुपालन रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। मौजा सुनण में अवैध डंपिंग को लेकर पर्यावरण अभियंता ने टीसीपी के असिस्टेंट टाउन प्लानर, जिला खनन अधिकारी बिलासपुर और अन्य संबंधित अधिकारियों की एक संयुक्त जांच कमेटी गठित की थी। कमेटी ने मौके का निरीक्षण कर रिपोर्ट में बताया कि स्थानीय लोग भूमि समतल करते समय निकली मिट्टी और पत्थर को फोरलेन के किनारे ही डंप कर रहे हैं। टीसीपी ने 2015 के नियमों के अंतर्गत दोषियों को नोटिस जारी किया है, लेकिन इसके बावजूद अवैध डंपिंग की मिट्टी नहीं उठाई गई। तहसीलदार स्वारघाट ने मौके पर निरीक्षण के दौरान यह पुष्टि की कि सरकारी भूमि खसरा नंबर 2/2, जिसमें 623-02 बीघा क्षेत्र शामिल है, इसके साथ डंपिंग हुई है। साथ ही निजी भूमि खसरा नंबर 172/49 पर भी कटान के बाद मिट्टी डंप की गई है। इस दौरान पंचायत टाली के प्रधान ने भूमि समतल करने के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी कर दिया, जिससे डंपिंग का कार्य जारी रहा, लेकिन मौके पर मलबे का निपटारा नहीं किया गया और न ही भूमि समतल करने के नियमों का पालन हुआ।
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समय पर कार्रवाई न होने के कारण पर्यावरण को गंभीर नुकसान हो रहा है। अवैध डंपिंग के कारण जल स्रोत, श्मशान घाट, फुटपाथ, घासनी, उपजाऊ भूमि, पगडंडियां, मोटर बोट, भाखड़ा बांध परियोजना, मछुआरों का कारोबार तक प्रभावित हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते सख्त कार्रवाई की जाती तो जल, जंगल और जमीन को इतना नुकसान नहीं होता।
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12 साल से चल रहा डंपिंग का खेल, उच्च न्यायालय में गुहार
फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के महासचिव एवं कोर्ट में इस मामले को ले जाने वाले मदन लाल शर्मा ने कहा कि यह अवैध डंपिंग पिछले 12 साल से जारी है। इसमें निर्माण कंपनियां खुलेआम मिट्टी और मलबा फेंक रही हैं। प्रशासन की ओर से बार-बार नोटिस और रिमाइंडर तो जारी किए जा रहे हैं, लेकिन जमीन पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। अब स्थिति यह है कि स्थानीय लोग न्याय के लिए उच्च न्यायालय का सहारा ले रहे हैं, क्योंकि प्रशासन की ओर से केवल पत्राचार हो रहा है, जबकि दोषियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही।