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Bilaspur News: कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन प्रभावितों को 13 साल बाद भी नहीं मिला मुआवजा

Thu, 26 Feb 2026 11:15 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Thu, 26 Feb 2026 11:15 PM IST
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Kiratpur-Nerchowk four-lane affected people did not get compensation even after 13 years
प्रभावितों ने सीएम सहित 11 विभागों के अधिकारियों को भेजी शिकायत
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आरओडब्ल्यू के अंदर मुआवजे का नहीं हुआ है 1.66 करोड़ का आंवटन
परियोजना में राइट ऑफ वे के 363 प्रभावित भूमि मालिकों का भुगतान लंबित

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन परियोजना से प्रभावित लोगों ने फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के माध्यम से लंबित मुआवजे का मुद्दा उठाया है। प्रभावितों ने मुख्यमंत्री सहित 11 विभागों के अधिकारियों को इस संबंध में शिकायत पत्र भेजा है। मामला यह है कि उक्त परियोजना में 13 साल बाद भी राइट ऑफ वे के अंदर बिलासपुर और मंडी के 363 प्रभावित परिवारों को 1.66 करोड़ के मुआवजे का भुगतान नहीं हुआ है।
बिलासपुर में इन परिवारों में मौजा पलथीं में 33, औहर में पांच, दड़याणा में एक, बैहना जट्टा में दो, कल्लर में दो, छत में एक, भंजवाणी में नौ, लघेड़ा में सात, मेहरोईयां में 18, री में पांच, टाली में छह, मेहला में एक, थापना में एक, उपरली भटेड़ में चार, समलेटू में 25, खुराड़ी में एक, पनोह में 24, बागठेहड़ु में तीन सहित अन्य गांवों के परिवार शामिल हैं। बिलासपुर में इनकी संख्या 148 है। वहीं इसके अलावा अधिकांश प्रभावित परिवार मंडी जिले के सुंदरनगर और सदर क्षेत्र से संबंधित हैं। प्रभावितों का कहना है कि 13 साल बाद भी इन्हें मुआवजे का पैसा नहीं मिला। समिति के महासचिव मदन लाल ने 25 फरवरी 2026 को मुख्य अभियंता, हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग को पत्र भेजकर कई बिंदुओं पर जानकारी और कार्रवाई की मांग की है। पत्र में 31 जुलाई 2025 को लोक निर्माण विभाग के सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक की अनुपालना रिपोर्ट का हवाला देते हुए भूमि अधिग्रहण और मुआवजा वितरण में विसंगतियां होने का आरोप लगाया गया है। पत्र के अनुसार भूमि अर्जन अधिकारी कार्यालय की ओर से भेजे गए पत्र में यह उल्लेख किया गया कि कीरतपुर–नेरचौक सेक्शन में 2078 करोड़ रुपये भूमि अधिग्रहण अधिकारी बिलासपुर को कम प्राप्त हुए। समिति ने पूछा है कि यह पुष्टि किस आधार पर की गई और संबंधित दस्तावेजों की प्रतियां उपलब्ध करवाई जाएं। साथ ही यह भी जानकारी मांगी गई है कि यह राशि कब कम प्राप्त हुई और परियोजना निदेशक से कब मांगी गई। कहा कि 1.66 करोड़ रुपये उन खसरा नंबरों के बनते थे जो आरओडब्ल्यू के बाहर थे, लेकिन यह राशि वितरित नहीं की गई। मांग की है कि आरओडब्ल्यू के बाहर अधिग्रहित भूमि का खसरा, मौजा, तहसील और जिला अनुसार पूरा विवरण उपलब्ध करवाया जाए। साथ ही अधिग्रहण के कानूनी आधार और प्लान की प्रतियां भी दी जाएं।
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समिति ने यह भी पूछा है कि यह राशि इस समय कहां है और कब तक वितरित की जाएगी। पत्र में कहा गया कि विभाग ने 1,66,02,742 रुपये की अतिरिक्त मुआवजा राशि की आवश्यकता बताई है। समिति ने पूछा है कि यह आवश्यकता कब से थी और परियोजना निदेशक को कब पत्र लिखा गया। कुल 363 भू-स्वामियों को राइट ऑफ वे के साथ अधिग्रहीत हुई भूमि, मकान और पेड़ों का मुआवजा दिया जाना शेष है। संबंधित विभागों से प्रभावितों की सूची और प्रत्येक को देय मुआवजे का पूरा ब्योरा उपलब्ध करवाने की मांग की है। सीएम को दी शिकायत में कहा कि संबंधित इकाई अपने ही अभिलेखों से जुड़ी जानकारी उपलब्ध नहीं करवा रही और समिति व प्रभावितों को अलग-अलग तर्क देकर गुमराह किया जा रहा है। पत्र की प्रतिलिपियां मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, मुख्यमंत्री कार्यालय, राजस्व विभाग के अधिकारियों, उपायुक्त बिलासपुर, संबंधित एसडीएम कार्यालयों और एलएओ एनएचएआई बिलासपुर को भेजकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। प्रभावितों का कहना है कि लंबे समय से मुआवजा लंबित होने के कारण उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने जल्द समाधान न होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है।
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