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कारगिल में इतिहास रचने वाले रणबांकुरों का देश सदैव रहेगा कर्जदार : कै.संजय
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शहीद स्मारक बिलासपुर मे शहीदों को नमन करने पहुंचे उपायुक्त राजेश्वर गोयल व अन्य पूर्व सैनिक।
- फोटो : BILASPUR
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बिलासपुर। कारगिल विजय दिवस पर जिला स्तरीय कार्यक्रम पूर्व सैनिक कल्याण समिति हिमाचल प्रदेश की ओर से बिलासपुर शहीद स्मारक स्थल पर रविवार को आयोजित किया गया। इसमें उपायुक्त राजेश्वर गोयल ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। उन्होंने शहीद स्मारक पर कारगिल में इतिहास रचने वाले देश के रणबांकुरों को नम आंखों से श्रद्धांजली दी। वहीं भारत माता की जय और शहीद अमर रहे के नारों से शहीद स्मारक गूंज उठा। इस मौके पर विशेष तौर से समिति के प्रदेशाध्यक्ष सेवानिवृत कैप्टन संजय कुमार व सैनिक कल्याण बोर्ड बिलासपुर के उप निदेशक कर्नल पीएस अत्री मौजूद रहे।
कैप्टन संजय कुमार ने कहा कि कारगिल युद्ध करीब दो माह चलने के बाद 26 जुलाई 1999 को खत्म हुआ। भारत पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध में भारत ने विजय पाई और तभी से यह दिन कारगिल विजय दिवस के नाम से मनाया जाता है। 26 जुलाई 1999 एक ऐसा दिन था जब भारत के सपूतों ने अपने लहू से कारगिल में अपनी विजय पताका फहराई थी। उसी वर्ष से भारत में इस दिन को कारगिल विजय दिवस के नाम से मनाया जाता है।
बोले, इस युद्ध में भारत के वीर जवानों ने हर परिस्थिति में निडर रहकर दुश्मनों से लोहा लिया और विजय प्राप्त की थी। कारगिल युद्ध में भारत के 527 सैनिकों ने अपने प्राणों की आहुती दी। बताया कि इस इतिहास को लिखने में हिमाचल के 54 जवानों ने हंसते-हंसते देश के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया। जिनमें 7 जवान बिलासपुर के थे, जिन्होंने देश के लिए अपनी सांसे कुर्बान कर दी थी।
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उन्होंने कहा कि इस युद्ध में परमवीर चक्र प्राप्त करने का गौरव भी प्रदेश के नाम है। जिनमें कांगड़ा के मरणोपरांत कैप्टन विक्रम बत्रा को सर्वोच्च युद्ध पदक परमवीर चक्र से नवाजा गया। वहीं बिलासपुर के राइफलमैन संजय कुमार को आजीवन इस पदक से नवाजा गया। उन्होंने कहा कि कारगिल में अपने प्राणों की आहुति डालने वाले जांबाजों का देश हमेशा कर्जदार रहेगा।
इस मौके पर सदर विधायक सुभाष ठाकुर, कैप्टन जोगिंद्र सेन, कैप्टन सुनील गुलेरिया,कैप्टन अमर नाथ धीमान, कै. सुभाष चंद शुक्ला, कै. सीता राम, सूबेदार मेजर सर्वजीत सिंह, सूबेदार मेजर बक्सी राम, सूबेदार बुद्धि सिंह, सूबेदार अंबा प्रसाद, सूबेदार सुनीत सिंह, नायब सुबेदार सुरेंद्र सिंह, नायब सूबेदार प्रकाशं चंद, हवलदार सुरेश नड्डा और नाइक कृष्ण लाल सहित लाडली फाउंडेशन, रेनबो स्टार कल्ब, सर्वधर्म समभाव राष्ट्रीय मंच के पदाधिकारी मौजूद रहे।
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कैप्टन संजय कुमार ने कहा कि कारगिल युद्ध करीब दो माह चलने के बाद 26 जुलाई 1999 को खत्म हुआ। भारत पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध में भारत ने विजय पाई और तभी से यह दिन कारगिल विजय दिवस के नाम से मनाया जाता है। 26 जुलाई 1999 एक ऐसा दिन था जब भारत के सपूतों ने अपने लहू से कारगिल में अपनी विजय पताका फहराई थी। उसी वर्ष से भारत में इस दिन को कारगिल विजय दिवस के नाम से मनाया जाता है।
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बोले, इस युद्ध में भारत के वीर जवानों ने हर परिस्थिति में निडर रहकर दुश्मनों से लोहा लिया और विजय प्राप्त की थी। कारगिल युद्ध में भारत के 527 सैनिकों ने अपने प्राणों की आहुती दी। बताया कि इस इतिहास को लिखने में हिमाचल के 54 जवानों ने हंसते-हंसते देश के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया। जिनमें 7 जवान बिलासपुर के थे, जिन्होंने देश के लिए अपनी सांसे कुर्बान कर दी थी।
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उन्होंने कहा कि इस युद्ध में परमवीर चक्र प्राप्त करने का गौरव भी प्रदेश के नाम है। जिनमें कांगड़ा के मरणोपरांत कैप्टन विक्रम बत्रा को सर्वोच्च युद्ध पदक परमवीर चक्र से नवाजा गया। वहीं बिलासपुर के राइफलमैन संजय कुमार को आजीवन इस पदक से नवाजा गया। उन्होंने कहा कि कारगिल में अपने प्राणों की आहुति डालने वाले जांबाजों का देश हमेशा कर्जदार रहेगा।
इस मौके पर सदर विधायक सुभाष ठाकुर, कैप्टन जोगिंद्र सेन, कैप्टन सुनील गुलेरिया,कैप्टन अमर नाथ धीमान, कै. सुभाष चंद शुक्ला, कै. सीता राम, सूबेदार मेजर सर्वजीत सिंह, सूबेदार मेजर बक्सी राम, सूबेदार बुद्धि सिंह, सूबेदार अंबा प्रसाद, सूबेदार सुनीत सिंह, नायब सुबेदार सुरेंद्र सिंह, नायब सूबेदार प्रकाशं चंद, हवलदार सुरेश नड्डा और नाइक कृष्ण लाल सहित लाडली फाउंडेशन, रेनबो स्टार कल्ब, सर्वधर्म समभाव राष्ट्रीय मंच के पदाधिकारी मौजूद रहे।