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जगदीश ने मशरूम के कारोबार से 500 युवाओं को दिया रोजगार

Sun, 29 May 2022 11:18 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 29 May 2022 11:18 PM IST
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Jagdish gave employment to 500 youth through mushroom business
झंडूता के प्रगतीशील किसान जगदीश वर्मा मशरुम की तुड़ाइ्र करते हुए। संवाद - फोटो : BILASPUR
झंडूता (बिलासपुर)। उपमंडल की बलघाड़ पंचायत के प्राहु गांव के जगदीश वर्मा ने मशरूम के कारोबार से करीब 500 युवाओं को रोजगार दिया है। जगदीश ने साल 2008 में करीब 50,000 रुपये से मशरूम का कारोबार शुरू किया। यह कारोबार आज 30 लाख रुपये तक पहुंच गया है।
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जगदीश ग्राम पंचायत बैहना ब्रह्मणा, बरमाणा, जमथल, धार टटोह, पंजगाई, धौन कोठी और कलोल में युवाओं को मशरूम उगाने की ट्रेनिंग दे रहे हैं।
उन्होंने ठंडे इलाके में होने वाली शिटाके मशरूम को उगाने में सफलता पाई है। ढिंगरी, दूधिया और बटन मशरूम को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने आजतक करीब 500 क्विंटल मशरूम का उत्पादन कर करीब 25 लाख का मुनाफा कमाया है। शिटाके मशरूम कैंसर जैसे भयानक रोगों से लड़ने में सहायक होती है।
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मशरूम रिसर्च सेंटर सोलन के विशेषज्ञों की देखरेख में उन्होंने शिटाके मशरूम का उत्पादन शुरू किया है। शिटाके रिच एंटी ऑक्सीडेंट का स्रोत होने के कारण शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। इसका उत्पादन ऑर्गेनिक तरीके से किया जा रहा है। इसमें सिर्फ पानी का ही छिड़काव किया जाता है।
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आमतौर पर यह मशरूम ठंडे इलाकों में होती है। दिसंबर में इसकी खेती शुरू करें तो मार्च तक यह तैयार होना शुरू हो जाती है। शिटाके को सूखे और गीले रूप में बेचा जाता है। गीले यानी तैयार मशरूम की कीमत 800 से 1,200 रुपये प्रति किलोग्राम और सूखे मशरूम की कीमत 2,000 से 2,500 रुपये किलोग्राम तक है। मशरूम को मांग के हिसाब से विशेष प्रकार की मशीन से सुखाया जाता है। गीली मशरूम को खाने के रूप में प्रयोग किया जाता है। सूखी मशरूम औषधि के रूप में प्रयोग होती है।

जगदीश वर्मा ने साल 2009 में मशरूम की खेती शुरू की थी। एकीकृत बागवानी मिशन के तहत वर्ष 2017 में बीस लाख रुपये से मशरूम की खेती शुरू कर आठ लाख का अनुदान राशि हासिल की। उन्हें पालमपुर यूनिवर्सिटी में प्रदेश भर में मशरूम की खेती में पहले स्थान पर आने पर सम्मानित किया गया है। जिले की करीब 26 मशरूम इकाइयों में वह पहले स्थान पर काम कर रहे हैं। जगदीश वर्मा ने बताया कि बेरोजगार युवा उद्यान और कृषि विभाग की योजनाओं का लाभ लें, ताकि वह अच्छी कमाई कर सके। युवा शहरों की ओर न भागकर ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्वरोजगार के साधन अपना सकते हैं।
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