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धड़ाधड़ खुल रहे निजी शिक्षण संस्थान दुर्भाग्यपूर्ण : केडी लखनपाल
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विश्वविद्यालयों की डिग्रियां बेचने का अड्डा बने निजी शिक्षण संस्थान
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड और हिमाचल अधीनस्थ चयन बोर्ड के सचिव रह चुके रिटायर्ड प्रशासनिक अधिकारी डॉ. केडी लखनपाल ने प्रदेश में धड़ाधड़ खुल रहे निजी शिक्षण संस्थानों को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है।
उन्होंने कहा कि निजी संस्थानों ने अपने स्वार्थ पूरे करने के लिए शिक्षा को व्यावसायिक और व्यापारिक माध्यम बनाकर रख दिया है। इससे जहां शिक्षा का स्तर लगातार गिर रहा है, वहीं पढ़ाई में ईमानदारी से मेहनत करने वाले युवाओं में हताशा और निराशा पैदा हो रही है। एक ही जिले में कई विश्वविद्यालय खोलने का कोई औचित्य नहीं है, लेकिन प्रदेश में ऐसा बड़े पैमाने पर हो रहा है। बच्चों से मुंहमांगा पैसा ऐंठकर यह संस्थान उन्हें सरेआम बोर्ड और विश्वविद्यालयों की डिग्रियां बेच रहे हैं। एक निजी विश्वविद्यालय द्वारा लगभग 45 हजार फर्जी डिग्रियां बेचने का पर्दाफाश पहले ही हो चुका है। उन्होंने कहा कि हिमाचल अधीनस्थ चयन बोर्ड को भी इसी वजह से भंग करना पड़ा, क्योंकि वह फर्जीवाड़े का अड्डा बन चुका था। इस सारे फर्जीवाड़े को रोकने के लिए ऐसा स्थायी मैकेनिज्म तैयार किया जाए, जो स्कूल शिक्षा बोर्ड के साथ ही सभी सरकारी और गैर सरकारी विश्वविद्यालयों और निजी स्कूलों का नियमित अंतराल पर सही मायनों में निरीक्षण करता रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड और हिमाचल अधीनस्थ चयन बोर्ड के सचिव रह चुके रिटायर्ड प्रशासनिक अधिकारी डॉ. केडी लखनपाल ने प्रदेश में धड़ाधड़ खुल रहे निजी शिक्षण संस्थानों को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है।
उन्होंने कहा कि निजी संस्थानों ने अपने स्वार्थ पूरे करने के लिए शिक्षा को व्यावसायिक और व्यापारिक माध्यम बनाकर रख दिया है। इससे जहां शिक्षा का स्तर लगातार गिर रहा है, वहीं पढ़ाई में ईमानदारी से मेहनत करने वाले युवाओं में हताशा और निराशा पैदा हो रही है। एक ही जिले में कई विश्वविद्यालय खोलने का कोई औचित्य नहीं है, लेकिन प्रदेश में ऐसा बड़े पैमाने पर हो रहा है। बच्चों से मुंहमांगा पैसा ऐंठकर यह संस्थान उन्हें सरेआम बोर्ड और विश्वविद्यालयों की डिग्रियां बेच रहे हैं। एक निजी विश्वविद्यालय द्वारा लगभग 45 हजार फर्जी डिग्रियां बेचने का पर्दाफाश पहले ही हो चुका है। उन्होंने कहा कि हिमाचल अधीनस्थ चयन बोर्ड को भी इसी वजह से भंग करना पड़ा, क्योंकि वह फर्जीवाड़े का अड्डा बन चुका था। इस सारे फर्जीवाड़े को रोकने के लिए ऐसा स्थायी मैकेनिज्म तैयार किया जाए, जो स्कूल शिक्षा बोर्ड के साथ ही सभी सरकारी और गैर सरकारी विश्वविद्यालयों और निजी स्कूलों का नियमित अंतराल पर सही मायनों में निरीक्षण करता रहे।
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