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Bilaspur News: शारीरिक और मानसिक विकास के लिए आयोडीन बहुत जरूरी
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- कोठीपुरा में मनाया खंड स्तरीय आयोडीन लापता विकार रोकथाम दिवस
संवाद न्यूज एजेंसी
जुखाला (बिलासपुर)। खंड स्तरीय आयोडीन लापता विकार रोकथाम दिवस कहलूर पब्लिक स्कूल कोठीपुरा में मनाया गया। इसकी अध्यक्षता प्रधानाचार्य पूर्णिमा ठाकुर ने की।
स्वास्थ्य शिक्षक विजय शर्मा और मस्तराम ने बच्चों को आयोडीन की कमी के कारण होने वाले विकारों और रोगों के बारे में विस्तृत जानकारीी दी। उन्होंने बताया कि आयोडीन एक गैसीय तत्व है। आयोडीन की कमी के कारण कई विकार और रोग उत्पन्न हो जाते हैं। आयोडीन की कमी से निपटने के सर्वोत्तम तरीकों में से एक यह सुनिश्चित करना है कि आप उस मात्रा का सेवन करें, जिससे आपके शरीर को आवश्यकता है। एक व्यक्ति को प्रतिदिन 150 माइक्रोग्राम आयोडीन की आवश्यकता होती है। इससे यह सुनिश्चित करने में भी मदद मिल सकती है कि आपकी थायरॉयड ग्रंथि और चयापचय ठीक से काम करते हैं। भारतीय उपमहाद्वीप की मिट्टी में आयोडीन की कमी के कारण पूरी आबादी आईडीडी से ग्रस्त है। आईडीडी में विकलांगता और बीमारी के स्पेक्ट्रम शामिल हैं। इसमें घेंघा, क्रेटिनिज्म, हाइपोथायरायडिज्म, गर्भपात, मृत जन्म, मस्तिष्क क्षति, सीखने की अक्षमता, मानसिक मंदता, साइकोमोटर दोष, श्रवण और भाषण हानि शामिल हैं। आयोडीन की कमी वाले क्षेत्रों में पैदा होने वाले बच्चों का बौद्धिक भागफल (आईक्यू) आयोडीन की कमी वाले क्षेत्रों में पैदा हुए बच्चों की तुलना में औसतन 13.5 अंक कम होता है। भारत में आईडीडी नियंत्रण कार्यक्रम एक सार्वजनिक स्वास्थ्य सफलता की कहानी है, जिसमें 92 प्रतिशत आबादी आयोडीन युक्त नमक का सेवन करती है। इस अवसर पर अंत में प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता भी कराई गई। सही जवाब देकर नमन, लक्ष्य, जागृति, अंतरा, आदित्य, अनुराग, उपासना, अभिषेक और अध्यापिका किरण ने इनाम प्राप्त किए। इस अवसर पर आशा वर्कर स्कीनू देवी उपस्थित रहीं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
जुखाला (बिलासपुर)। खंड स्तरीय आयोडीन लापता विकार रोकथाम दिवस कहलूर पब्लिक स्कूल कोठीपुरा में मनाया गया। इसकी अध्यक्षता प्रधानाचार्य पूर्णिमा ठाकुर ने की।
स्वास्थ्य शिक्षक विजय शर्मा और मस्तराम ने बच्चों को आयोडीन की कमी के कारण होने वाले विकारों और रोगों के बारे में विस्तृत जानकारीी दी। उन्होंने बताया कि आयोडीन एक गैसीय तत्व है। आयोडीन की कमी के कारण कई विकार और रोग उत्पन्न हो जाते हैं। आयोडीन की कमी से निपटने के सर्वोत्तम तरीकों में से एक यह सुनिश्चित करना है कि आप उस मात्रा का सेवन करें, जिससे आपके शरीर को आवश्यकता है। एक व्यक्ति को प्रतिदिन 150 माइक्रोग्राम आयोडीन की आवश्यकता होती है। इससे यह सुनिश्चित करने में भी मदद मिल सकती है कि आपकी थायरॉयड ग्रंथि और चयापचय ठीक से काम करते हैं। भारतीय उपमहाद्वीप की मिट्टी में आयोडीन की कमी के कारण पूरी आबादी आईडीडी से ग्रस्त है। आईडीडी में विकलांगता और बीमारी के स्पेक्ट्रम शामिल हैं। इसमें घेंघा, क्रेटिनिज्म, हाइपोथायरायडिज्म, गर्भपात, मृत जन्म, मस्तिष्क क्षति, सीखने की अक्षमता, मानसिक मंदता, साइकोमोटर दोष, श्रवण और भाषण हानि शामिल हैं। आयोडीन की कमी वाले क्षेत्रों में पैदा होने वाले बच्चों का बौद्धिक भागफल (आईक्यू) आयोडीन की कमी वाले क्षेत्रों में पैदा हुए बच्चों की तुलना में औसतन 13.5 अंक कम होता है। भारत में आईडीडी नियंत्रण कार्यक्रम एक सार्वजनिक स्वास्थ्य सफलता की कहानी है, जिसमें 92 प्रतिशत आबादी आयोडीन युक्त नमक का सेवन करती है। इस अवसर पर अंत में प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता भी कराई गई। सही जवाब देकर नमन, लक्ष्य, जागृति, अंतरा, आदित्य, अनुराग, उपासना, अभिषेक और अध्यापिका किरण ने इनाम प्राप्त किए। इस अवसर पर आशा वर्कर स्कीनू देवी उपस्थित रहीं।
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