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Bilaspur News: रोहिण के मकान पर मुआवजा और ध्वस्तीकरण को लेकर जांच शुरू

Mon, 29 Dec 2025 10:31 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Mon, 29 Dec 2025 10:31 PM IST
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Investigation begins regarding compensation and demolition of Rohin's house
एसडीओ विद्युत मंडल-2 की अध्यक्षता में दो सदस्यीय कमेटी गठित
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2002 में लगे विद्युत मीटर की सप्लाई बाधित हुई या नहीं जांचेगी समिति
कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन में हुआ था जिले में 324 मकान का अधिग्रहण
मुआवजा आवंटन के बाद भी मौके पर मौजूद हैं कुछ मकान
समिति को 10 दिन के भीतर बिंदुवार रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। कीरतपुर–नेरचौक फोरलेन परियोजना के तहत मौजा रोहिण सब डिवीजन कंदरौर में सड़क की जद में आए एक मकान को लेकर मुआवजा, ध्वस्तीकरण और विद्युत कनेक्शन को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड ने मामले की जांच के लिए एसडीओ विद्युत मंडल-2 की अध्यक्षता में दो सदस्यीय विभागीय कमेटी का गठन किया है।
बिजली बोर्ड की ओर से गठित कमेटी को सभी तथ्यों की जांच कर 10 दिन के भीतर बिंदु वार रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं और जिम्मेदारी किसकी बनती है। कमेटी यह भी जांच करेगी कि संबंधित मकान में विद्युत उपभोक्ता की ओर से वर्ष 2002 में लगाया गया विद्युत मीटर, मकान के सड़क की जद में आने के बाद नियमानुसार डिस्कनेक्ट किया गया था या नहीं। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि मौके पर विद्युत आपूर्ति बाधित की गई या कनेक्शन यथावत रहा। इस फोरलेन परियोजना में कुल 324 मकान सड़क की जद में आए। इनमें से कुछ मकान मालिकों ने स्वयं अपने मकान ध्वस्त कर कब्जा एनएचएआई को सौंप दिया, जबकि कुछ मकानों को पुलिस बल की मौजूदगी में सड़क निर्माण कंपनी ने गिराया। इसके बाद भी कुछ मकान आज तक मौके पर मौजूद बताए जा रहे हैं, जिनमें मौजा रोहिण का यह मकान प्रमुख मामला बनकर उभरा है। विद्युत बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार 2002 में लिया गया विद्युत कनेक्शन आज भी उसी स्थान पर मौजूद पाया गया है, जहां वह लगाया गया था। इससे संकेत मिलता है कि मकान को पूरी तरह ध्वस्त नहीं किया गया। वहीं, तहसीलदार घुमारवीं ने अपनी रिपोर्ट में भी पुष्टि की है कि संबंधित मकान आज भी मौके पर मौजूद है। हाल ही की मौका रिपोर्ट में तहसीलदार घुमारवीं ने यह भी दर्ज किया है कि मकान का आंशिक शौचालय सड़क निर्माण की जद में आया था। इससे यह स्पष्ट होता है कि मकान का केवल आंशिक हिस्सा प्रभावित हुआ, लेकिन इसके बावजूद पूरे मकान का मुआवजा आवंटित कर दिया गया। फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के महासचिव मदन लाल शर्मा ने कहा कि मुआवजा प्राप्त करने के बावजूद न तो मकान मालिक ने मकान ध्वस्त किया और न ही एनएचएआई ने उसे गिराकर कब्जा लिया। विभिन्न निरीक्षण टीमों पर भी सवाल उठे हैं।
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इनसेट
तकनीकी साक्ष्य मौजूद
जानकारी के मुताबिक, मौके पर स्थापित बुर्जियों की निशानदेही, मूल्यांकनकर्ता की ओर से तैयार की गई सीटें, तहसीलदार कार्यालय और एनएचएआई के पास उपलब्ध हैं। इसके अलावा जीपीएस कॉर्डिनेट्स के आधार पर गूगल इमेज (2013 व 2025), राइट ऑफ वे के इंतकाल, राजस्व रिकॉर्ड में गैर मुमकिन मकान/सड़क का दर्ज होना भी इस मामले को और गंभीर बनाता है।
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